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यात्री दीपक ने कहा, ‘उन फरिश्तों ने मुझे बचाया’

Sun, 20 Nov 2016 07:54 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 20 Nov 2016 07:54 PM IST
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passenger deepak said angels who saved me
रेल हादसे में घायल यात्री दीपक - फोटो : अमर उजाला
इंदौर-राजेंद्र नगर (पटना) एक्सप्रेस के एस-1 कोच की बर्थ-24 पर सफर कर रहे आजमगढ़ के ग्राम मवई (तरवां) निवासी दीपक (20) पुत्र मार्कंडेय के मुताबिक अचानक आये आठ फरिश्तों ने उसकी जान बचाई। दीपक ने कहा कि वह इंदौर की एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करने वाले पिता से मिलकर लौट रहा था। पापा के दोस्त बनारस के जयप्रकाश वेटिंग टिकट होने के कारण उसी की बर्थ में सो रहे थे। सोते समय अचानक तेज आवाज से उसकी नींद खुली तो खुद को बर्थ में फंसा पाया। वह कोच के छत की लोहे की चादर और बर्थ के बीच बुरी तरह दबा हुआ था। हिलना-ढुलना तो दूर, सांस लेना तक मुश्किल हो रहा था। दाहिना पैर रेलिंग में फंसा था। बगल में दो यात्रियों के शव पड़े थे। वह चीखता रहा। बाद में पहुंचे दो सिपाही उसे नहीं निकाल पाए। आठ लोगों ने स्लीपर के ऊपर की लोहे की चादर ऊठाई और उसे बाहर निकाला। उस समय जान बचाने वाले वो आठ लोग दीपक को फरिश्ते जैसे नजर आए।
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