Kanpur: ठंड में लापरवाही से मार रहा चेहरे पर लकवा, ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे हैं तीन-चार रोगी, ऐसे करें बचाव
हैलट अस्पताल की ओपीडी में रोजाना तीन से चार रोगी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में लापरवाही के कारण रोग का हमला बढ़ गया है। इसमें मुंह और आंखें टेढ़ी हो जाती हैं। साथ ही, मरीज को बोलने में भी दिक्कत आती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में ठंड के मौसम में चेहरे के लकवा के रोगी बढ़ने लगे हैं। शीत लहर और वायरल संक्रमण से कान के अंदर नर्व में सूजन आ जा रही है। इससे चेहरे की मांसपेशियों को लकवा मार जा रहा है। हैलट की ओपीडी और नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञों के यहां रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड में लापरवाही के कारण रोग का हमला बढ़ गया है। इस रोग में जान, तो नहीं जाती लेकिन चेहरे पर टेढ़ापन आ जाता है। पलक नहीं झपकती है। आवाज साफ नहीं निकलती है। रोगियों को इलाज से ठीक होने में दो-तीन महीने लग जाते हैं।
हैलट ओपीडी में तीन-चार रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। इसके अलावा निजी नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञों के यहां रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ईयर फाउंडेशन के निदेशक सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी का कहना है कि जब से ठंड तेज हुई है, रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के डॉ. निशांत सक्सेना ने बताया कि वायरल संक्रमण से भी नर्व में सूजन आती है। इस समय ठंड भी बढ़ी हुई है और मौसमी वायरल संक्रमण भी फैला हुआ है। ठंड के एक्सपोजर से सर्दी-जुकाम, खांसी लंबे समय तक बने रहने से भी नर्व में सूजन आ जाती है।
ऐसे होता है असर
कान से होकर नर्व चेहरे पर जाती है। इसमें सूजन आने से चेहरे की मांसपेशियों में खून का बहाव प्रभावित होता है। इससे चेहरे में टेढ़ापन आ जाता। नर्व प्रभावित होने से पलक के झपकने में भी दिक्कत आती है। नर्व की सूजन ठीक होने के बाद चेहरा सामान्य हो जाता है।
ऐसे करें बचाव
- शीत लहर में सुबह टहलने के लिए न जाएं।
- पानी गर्म करके नहाएं।
- धूप में बाहर निकलें।
- कान में दर्द हो, तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं।
- जुकाम, खांसी और ठंड से बचाव करें।