चौंका देंगे, ईसा पूर्व आदिमानवों द्वारा बनाए गए ये शैलचित्र
हनुमत ने बताया कि किताबों में इन शैलचित्रों के बारे पढ़ा था लेकिन पूरी तरह स्पष्ट नही था कि पाठा की इस हजारों साल पुरानी संस्कृति के अवशेष मुझे मिलेंगे भी या नही लेकिन तमाम खोजबीन और स्थानीय लोगो की मदद से आश्चर्चजनक परिणाम निकले।
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कई युगों बाद अभी तक वैसे ही बने हैं चित्र
यह देखना आश्चर्यजनक है कि इन पेंटिंग्स में जो रंग भरे गए थे वो कई युगों बाद अभी तक वैसे ही बने हुए हैं. इन पेंटिंग्स में आमतौर पर प्राकृतिक लाल, गेरुआ और सफेद रंगों का प्रयोग किया गया है। यहाँ की दीवारें धार्मिक संकेतों से सजी हुई है, जो पूर्व ऐतिहासिक कलाकारों के बीच लोकप्रिय थे। इस प्रकार भीम बैठका के प्राचीन मानव के संज्ञानात्मक विकास का कालक्रम विश्व के अन्य प्राचीन समानांतर स्थलों से हजारों वर्ष पूर्व हुआ था। इस प्रकार से यह स्थल मानव विकास का आरंभिक स्थान भी माना जा सकता है। इन शैलचित्रों में दैनिक जीवन की घटनाओं से लिए गए विषय अंकित हैं । ये हज़ारों वर्ष पहले का जीवन दर्शाते हैं। यहाँ बनाए गए चित्र मुख्यतः नृत्य, संगीत, आखेट, घोड़ों और हाथियों की सवारी, आभूषणों को सजाने तथा शहद जमा करने के बारे में हैं। इनके अलावा बाघ, सिंह जंगली सुअर, हाथियों, कुत्तों और घड़ियालों जैसे जानवरों को भी इन तस्वीरों में चित्रित किया गया है जो कि अविश्वसनीय है।
इंसानों के पूर्वज रहते थे यहां पर
पुरापाषाण से मध्यपाषाण काल के बीच के हैं ये चित्र
तमाम रहस्य समेटे हुए है पाठा की ये संस्कृति