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आक्सीजन का संकट, संक्रमितों की फूली सांसें, हैलट में 24 घंटे का बैकअप नहीं, कोरोना रोगी बढ़ने से बढ़ी खपत

Sun, 18 Apr 2021 01:34 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 18 Apr 2021 01:34 AM IST
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Oxygen crisis, no 24-hour backup in hallet, increased consumption as corona patients increase
ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कानपुर कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही शहर में आक्सीजन का संकट पैदा हो गया है। मांग करीब 20 गुना बढ़ गई है। आक्सीजन गैस प्लांट संचालक जरूरत से एक चौथाई आक्सीजन भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जबकि कोरोना के तमाम मरीजों को निमोनिया, फेफड़ों में पानी भरने के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
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इन्हें आक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। सबसे ज्यादा संकट हैलट के कोविड अस्पतालों में है। हैलट में 24 घंटे का भी आक्सीजन बैकअप नहीं बचा है। कायदे से 48 या 72 घंटे का बैकअप होना चाहिए। इससे जीएसवीएम मेडिकल कालेज प्रबंधन में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है।
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Oxygen crisis, no 24-hour backup in hallet, increased consumption as corona patients increase
कोरोना से हो रहीं मौतें - फोटो : अमर उजाला
किसी तरह थोड़ा-बहुत बैकअप बरकरार रखने के लिए हमीरपुर से 100 सिलिंडर मंगाए गए हैं। आगे आक्सीजन की क्या स्थिति रहेगी? किसी को पता नहीं है। हैलट के न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल और मैटरनिटी विंग के अस्पताल में 150 कोरोना रोगी भर्ती हैं।

इनमें 90 फीसदी रोगी आक्सीजन सपोर्ट पर हैं। आक्सीजन सेच्युरेशन लेवल कम होने से रोगियों को हाई फ्लो के साथ आक्सीजन देनी पड़ रही है। अगर एक दिन लिंडे कंपनी का आक्सीजन टैंकर नहीं आया तो स्थिति बिगड़ जाएगी। हैलट में देहरादून से एक आक्सीजन का टैंकर रोज आता है। इसमें 30 से 35 हजार लीटर लिक्विड आक्सीजन होती है।

यहां पर लिक्विड आक्सीजन के तीन प्लांट हैं। इनकी क्षमता नौ हजार लीटर की है। एक प्लांट से न्यूरो साइंसेज, दूसरे वार्डों और तीसरे मैटरनिटी विंग को आक्सीजन जाती है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि आक्सीजन का 24 घंटे का बैकअप नहीं बचा है। एनेस्थीसिया विभाग से आक्सीजन की खपत का ब्योरा मांगा गया है।

 

प्रमुख सचिव ने मांगी रिपोर्ट
दो दिन पहले किसी ने इस संबंध में प्रमुख सचिव से शिकायत भी की थी। इस पर शुक्रवार को प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने प्राचार्य डॉ. आरबी कमल से रिपोर्ट मांगी।

सिलिंडरों में घटतौली, 15 मिनट में बोल गए
अस्पताल प्रशासन सिलिंडरों में घटतौली की शिकायत पर तुलवाना चाह रहा था, पर कर्मचारियों और तीमारदारों में सिलिंडर लेने के लिए मारामारी मच गई। वे बिना तुले ही सिलिंडर लेकर चले गए। घटतौली की वजह से ये सिलिंडर 15 मिनट से आधे घंटे में ही दगा दे गए।

हैलट और संबद्ध अस्पतालों में आक्सीजन की जरूरत
- न्यूरो कोविड अस्पताल में 3500-4000 लीटर
- इमरजेंसी में 2900-3000 लीटर
- जच्चा बच्चा एवं बाल रोग चिकित्सालय में 2800-3500 लीटर
- वार्डों में - 1500-2000 लीटर
- शहर में आक्सीजन की आपूर्ति - 36 टन
- कोरोना काल में जरूरत- लगभग 100 टन
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