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कोरोनाकाल में हैलट में सिर्फ एक दिन का ऑक्सीजन बैकअप, शासन ने तीन दिन के बैक अप के दिए हैं निर्देश
Sun, 27 Sep 2020 04:56 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 27 Sep 2020 04:56 PM IST
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कानपुर हैलट
- फोटो : amar ujala
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कानपुर हैलट के कोविड अस्पतालों में शासन ने तीन दिन के ऑक्सीजन बैक अप रखने के निर्देश दिए हैं लेकिन हकीकत में एक ही दिन का बैक अप है। अगर हर दूसरे दिन आने वाला लिंडे का टैंकर न आए तो रोगियों की शामत आ जाएगी। हर रोज लिक्विड आक्सीजन टैंकर भेजने से लिंडे कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
कानपुर प्रभारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार साथ बैठक में एनेस्थेसिया विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने सारी स्थिति साफ की। 20 हजार लीटर का नया टैंक भी हैलट में बनाने के लिए लिंडे तैयार नहीं है। प्रभारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने मेडिसिन विभाग के सभागार में जीएसवीएम मेडिकल कालेज और हैलट के अधिकारियों के साथ बैठक की।
ऑक्सीजन के मुद्दे पर उन्हें बताया कि इस वक्त सामान्य दिनों से 15 गुना अधिक खपत हो रही है। न्यूरो साइंसेस और मैटरनिटी विंग के कोविड अस्पताल में 4500 लीटर ऑक्सीजन की खपत है। इसमें 9000 हजार लीटर ऑक्सीजन रहती है। अगले दिन टैंक आधा खाली रहता है। यही बैक अप रहता है। अगर हर दूसरे दिन आने वाला लिंडे का टैंकर नहीं आया तो बैक अप खत्म।
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कानपुर प्रभारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार साथ बैठक में एनेस्थेसिया विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने सारी स्थिति साफ की। 20 हजार लीटर का नया टैंक भी हैलट में बनाने के लिए लिंडे तैयार नहीं है। प्रभारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने मेडिसिन विभाग के सभागार में जीएसवीएम मेडिकल कालेज और हैलट के अधिकारियों के साथ बैठक की।
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ऑक्सीजन के मुद्दे पर उन्हें बताया कि इस वक्त सामान्य दिनों से 15 गुना अधिक खपत हो रही है। न्यूरो साइंसेस और मैटरनिटी विंग के कोविड अस्पताल में 4500 लीटर ऑक्सीजन की खपत है। इसमें 9000 हजार लीटर ऑक्सीजन रहती है। अगले दिन टैंक आधा खाली रहता है। यही बैक अप रहता है। अगर हर दूसरे दिन आने वाला लिंडे का टैंकर नहीं आया तो बैक अप खत्म।
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बैठक में एनेस्थेसिया विभागाध्यक्ष अनिल वर्मा ने तीन तरीके सुझाए। पहला कि हैलट खुद एक करोड़, 20 लाख कीमत का टैंकर खरीदे, दूसरा रोज ऑक्सीजन टैंकर आए और तीसरा सिलिंडर रहें। यहां 48 घंटे के बैक अप के लिए 4600 सिलिंडर की जरूरत बताई गई जबकि हैं 394 जंबो सिलिंडर।
डॉ. वर्मा ने कहा कि अगर सिलिंडर ले भी लें तो इसके लिए 70 स्टाफ की नियुक्ति करनी पड़ेगी। इसके अलावा शहर की कंपनियां इतने सिलिंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर पाएंगी। स्थिति को देखते हुए लिक्विड ऑक्सीजन का ही विकल्प सुझाया गया। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. आरबी कमल, उप प्राचार्य डॉ. रि
चा गिरि आदि रहीं।
15 दिन की खपत हो रही एक दिन में
हैलट में जितनी ऑक्सीजन की खपत 15 दिनों में होती है, उतनी इस वक्त कोविड अस्पतालों में एक दिन में हो जा रही है। अभी तक एक दिन में सबसे अधिक 5200 लीटर न्यूरो साइंसेस अस्पताल में एक दिन में हुई है। औसत साढ़े चार हजार लीटर प्रतिदिन का बना हुआ है। नया प्लांट बनाने में करीब 70 लाख रुपये खर्च आएगा। नए प्लांट बनने में तीन महीने लगेंगे। प्रमुख सचिव आलोक कुमार का कहना है कि तीन महीने में पता नहीं क्या स्थिति हो, व्यवस्था आज के लिहाज से करनी है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि अगर सिलिंडर ले भी लें तो इसके लिए 70 स्टाफ की नियुक्ति करनी पड़ेगी। इसके अलावा शहर की कंपनियां इतने सिलिंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर पाएंगी। स्थिति को देखते हुए लिक्विड ऑक्सीजन का ही विकल्प सुझाया गया। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. आरबी कमल, उप प्राचार्य डॉ. रि
चा गिरि आदि रहीं।
15 दिन की खपत हो रही एक दिन में
हैलट में जितनी ऑक्सीजन की खपत 15 दिनों में होती है, उतनी इस वक्त कोविड अस्पतालों में एक दिन में हो जा रही है। अभी तक एक दिन में सबसे अधिक 5200 लीटर न्यूरो साइंसेस अस्पताल में एक दिन में हुई है। औसत साढ़े चार हजार लीटर प्रतिदिन का बना हुआ है। नया प्लांट बनाने में करीब 70 लाख रुपये खर्च आएगा। नए प्लांट बनने में तीन महीने लगेंगे। प्रमुख सचिव आलोक कुमार का कहना है कि तीन महीने में पता नहीं क्या स्थिति हो, व्यवस्था आज के लिहाज से करनी है।