एक विवादास्पद रहस्यवादी आध्यात्मिक गुरु अोशो के बारे में शायद ये नहीं जानते होंगे
जीवन के अद्भुत रहस्य को बताने का दावा करने वाले भारतीय विचारक ओशो (रजनीश जैन) का जन्म 11 दिसंबर 1939 को हुआ था। ओशो ने मानव जीवन में कामुकता पर खुलकर अपनी राय रखी। ओशो ने 'संभोग से समाधि की ओर' जाने का विचार लोगों को दिया।
जानें कौन हैं ओशो...
ओशो का जन्म 11 दिसम्बर 1 9 3 9 को मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव में में हुआ था। उनके बचपन का नाम चंद्रमोहन जैन था। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा नरसिंहपुर गाडरवारा स्थित ननिहाल में हुई। उनके परिवारिक सदस्य राजवी जैन बताते हैं कि ग्यारह भाई-बहनों में से एक ओशो अपनी मां को भाभी और नानी को मां कहकर पुकारते थे। उनके पिता बाबूलाल जैन कपड़ों के व्यापारी थे। उन्होंने पुत्र ओशो से ही गुरु दीक्षा लेकर सन्यास ग्रहण किया था। ओशो के चाचा भी उनके हम उम्र थे। सभी चाचा ओशो की मां यानी सरस्वती जैन को भाभी कहकर पुकारते थे। इसलिए वे भी मां को भाभी कहने लगे। जब वे ननिहाल में गाडरवारा आए तो हम उम्र मामा लोगों से संपर्क हुआ। उनके साथ वे भी अपनी नानी को मां कहकर बुलाने लगे। ओशो के बचपन के साथी स्वामी नरेंद्र बोधिसत्व बताते हैं कि ओशो का व्यक्तित्व बचपन से ही अद्भुत और बेहद प्रभावी था।
छात्र जीवन से ही मेधावी
गाडरवारा में शिक्षा प्राप्त करने के बाद ओशो जबलपुर आ गए। उनका एक वाकया यह भी प्रचलित है कि जब वे जबलपुर के हितकारिणी कॉलेज में पढाई कर रहे थे, तो क्लास में एक विषय पर एक प्राध्यापक से उन्होंने खुलकर संवाद किया। विषय वस्तु का विरोध किया, इस पर उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया। इसके बाद 1955 में उन्होंने डी. एन. जैन कॉलेज से दर्शन शास्त्र की पढ़ाई की।छात्र जीवन से ही उन्होंने लोगों के समक्ष भाषण देना शुरू कर दिया था। ओशो ने करीब 600 पुस्तकें लिखीं। संभोग से समाधी की ओर उनकी सबसे चर्चित कृति रही। उनके लिखे साहित्य का करीब १०० विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है। रशिया, चाइना एवं अरब जैसे कम्युनिस्ट देशों में भी अब ओशो पढ़े और सुने जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि ओशो में किसी प्रकार का जातीय धार्मिक पाखंड नहीं है। यहां सिर्फ खुशहाल जीवन जीने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिलता है।
हर पहलू पर रखे विचार
बालक रजनीश