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नया सफर: आयुध कर्मचारियों को सरकारी खजाने से मिलेगा आखिरी वेतन, एक अक्तूबर से नई कंपनियों का संचालन संभव
Tue, 21 Sep 2021 09:26 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Sep 2021 09:26 AM IST
सार
कानपुर में पांच आयुध निर्माणियां हैं, जिनमें सात हजार से ज्यादा स्थायी कर्मचारी हैं। सरकार ने 14 अगस्त से शहर समेत देशभर की 41 निर्माणियों का विलय कर सात कंपनियां बना दी हैं।
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आयुध निर्माणी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में आयुध निर्माणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सरकारी सेवा का यह आखिरी माह है। अक्तूबर से ये सभी नई कंपनियों के मुलाजिम हो जाएंगे। इस तरह इन्हें सरकारी कोष से अंतिम बार सितंबर का वेतन मिलेगा। इसके बाद का वेतन और भत्ता नई कंपनियों की ओर से दिया जा सकता है।
देश में 220 साल पहले अस्तित्व में आईं आयुध निर्माणियों के अधिकारी-कर्मचारी सरकारी कोष से वेतन पाते रहे हैं। शहर में पांच आयुध निर्माणियां हैं, जिनमें सात हजार से ज्यादा स्थायी कर्मचारी हैं। सरकार ने 14 अगस्त से शहर समेत देशभर की 41 निर्माणियों का विलय कर सात कंपनियां बना दी हैं।
इनमें से तीन कंपनियों के मुख्यालय शहर में बनाए गए हैं, जिसमें 13 आयुध निर्माणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक कर्मचारियों को अगले महीने की 10 तारीख तक वेतन मिल जाता है, जबकि गैर-औद्योगिक कर्मचारियों को महीने के आखिरी दिन भुगतान होता रहा है।
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30 सितंबर तक आयुध निर्माणी बोर्ड का अस्तित्व बना रह सकता है। एक अक्तूबर से नई कंपनियों के अंतर्गत कामकाज शुरू करने की तैयारी है। इसके पीछे तर्क यह है कि बोर्ड के चेयरमैन 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह बोर्ड के अंतिम चेयरमैन होंगे। सरकार ने अभी तक किसी भी चेयरमैन के नाम की घोषणा नहीं की है। वेतन के संबंध में 16 सितंबर को आदेश जारी किया गया है।
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देश में 220 साल पहले अस्तित्व में आईं आयुध निर्माणियों के अधिकारी-कर्मचारी सरकारी कोष से वेतन पाते रहे हैं। शहर में पांच आयुध निर्माणियां हैं, जिनमें सात हजार से ज्यादा स्थायी कर्मचारी हैं। सरकार ने 14 अगस्त से शहर समेत देशभर की 41 निर्माणियों का विलय कर सात कंपनियां बना दी हैं।
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इनमें से तीन कंपनियों के मुख्यालय शहर में बनाए गए हैं, जिसमें 13 आयुध निर्माणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक कर्मचारियों को अगले महीने की 10 तारीख तक वेतन मिल जाता है, जबकि गैर-औद्योगिक कर्मचारियों को महीने के आखिरी दिन भुगतान होता रहा है।
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30 सितंबर तक आयुध निर्माणी बोर्ड का अस्तित्व बना रह सकता है। एक अक्तूबर से नई कंपनियों के अंतर्गत कामकाज शुरू करने की तैयारी है। इसके पीछे तर्क यह है कि बोर्ड के चेयरमैन 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह बोर्ड के अंतिम चेयरमैन होंगे। सरकार ने अभी तक किसी भी चेयरमैन के नाम की घोषणा नहीं की है। वेतन के संबंध में 16 सितंबर को आदेश जारी किया गया है।
दो साल तक रहेंगे प्रतिनियुक्ति पर
सूत्रों के अनुसार, निर्माणियों के अधिकारी और कर्मचारियों के सभी प्रकार के वेतन, भत्ते आदि का भुगतान दो साल तक सरकार करेगी। इसकी घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है। सभी दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे। हालांकि, इसके बाद क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
वेतन-भत्तों में इजाफे की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि सभी आयुध निर्माणियां उत्पादन इकाइयां हैं। यहां वर्कलोड बढ़ने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को ओवरटाइम दिया जाता था, जो अधिकतम 54 घंटे तक होता था। इससे कर्मचारियों के वेतन में अच्छा इजाफा होता था। अब वर्कलोड कम होने से ओवरटाइम घटा दिया गया है। निर्माणियों के कंपनी बनने के बाद सैलरी पैकेज के आधार पर होने की संभावना है। जैसा निजी क्षेत्र की कंपनियों में होता है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में इजाफे की उम्मीद है। दरअसल, यह कंपनियां उत्पादन और निर्यात बढ़ाएंगी। इसका लाभ कर्मचारियों को भी मिलने की संभावना है।
शहर में सबसे पहले ओईएफ की स्थापना
देश में पहली आयुध निर्माणी की स्थापना 18 मार्च 1801 को काशीपुर (पश्चिम बंगाल) में हुई थी। इसी दिन को आयुध निर्माणी दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। शहर में सबसे पहले 1859 को आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) की स्थापना की गई थी। इसके बाद अक्तूबर 1941 में आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) की स्थापना हुई थी। आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) की स्थापना 1942 में हुई, जबकि 1949 में लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) और 1971 में फील्ड गन फैक्ट्री की स्थापना की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, निर्माणियों के अधिकारी और कर्मचारियों के सभी प्रकार के वेतन, भत्ते आदि का भुगतान दो साल तक सरकार करेगी। इसकी घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है। सभी दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे। हालांकि, इसके बाद क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
वेतन-भत्तों में इजाफे की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि सभी आयुध निर्माणियां उत्पादन इकाइयां हैं। यहां वर्कलोड बढ़ने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को ओवरटाइम दिया जाता था, जो अधिकतम 54 घंटे तक होता था। इससे कर्मचारियों के वेतन में अच्छा इजाफा होता था। अब वर्कलोड कम होने से ओवरटाइम घटा दिया गया है। निर्माणियों के कंपनी बनने के बाद सैलरी पैकेज के आधार पर होने की संभावना है। जैसा निजी क्षेत्र की कंपनियों में होता है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में इजाफे की उम्मीद है। दरअसल, यह कंपनियां उत्पादन और निर्यात बढ़ाएंगी। इसका लाभ कर्मचारियों को भी मिलने की संभावना है।
शहर में सबसे पहले ओईएफ की स्थापना
देश में पहली आयुध निर्माणी की स्थापना 18 मार्च 1801 को काशीपुर (पश्चिम बंगाल) में हुई थी। इसी दिन को आयुध निर्माणी दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। शहर में सबसे पहले 1859 को आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) की स्थापना की गई थी। इसके बाद अक्तूबर 1941 में आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) की स्थापना हुई थी। आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) की स्थापना 1942 में हुई, जबकि 1949 में लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) और 1971 में फील्ड गन फैक्ट्री की स्थापना की गई थी।