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Kanpur News: समय से नहीं चेते अफसर, 2200 लोगों को दोबारा करना पड़ सकता आवेदन
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कानपुर। जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महीनों से तहसीलों के चक्कर काट रहे 2200 से अधिक आवेदकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कानपुर की चार तहसीलों में लंबित आवेदनों का नए नियम लागू होने से पहले निस्तारण नहीं किया गया। छह अगस्त 2026 को नए नियमों का गजट जारी होने और एक अक्तूबर से नई व्यवस्था लागू होने की जानकारी होने के बावजूद अधिकारी फाइलें लंबित रखे रहे। अब नियम बदलने के बाद इन आवेदनों के बंडल संबंधित विकासखंडों को वापस भेज दिए गए हैं। इससे आवेदकों को दोबारा आवेदन करने और नए सिरे से कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की नौबत आ सकती है।
इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने जन्म के एक साल बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसीलों में आवेदन किया था। दोबारा प्रक्रिया शुरू होने पर उन्हें शपथपत्र बनवाने से लेकर अन्य दस्तावेज जुटाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
पहले जन्म के एक माह के भीतर ग्राम पंचायत या नगर निकाय से प्रमाणपत्र जारी किया जाता था। एक माह से अधिक और एक साल से कम अवधि वाले मामलों में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) की अनुमति से प्रमाणपत्र जारी होता था। जन्म के एक साल से अधिक समय बीतने पर संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के स्तर से कार्रवाई की जाती थी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई लोग समय पर जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनवा पाते। जरूरत पड़ने पर आवेदन करते हैं, तब तक जन्म को एक साल से अधिक समय बीत चुका होता है। ऐसे आवेदनों के निस्तारण की जिम्मेदारी तहसीलों पर थी, लेकिन लंबित मामलों को समय रहते नहीं निपटाया गया।
नए नियमों के तहत जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। एक माह से अधिक और एक साल से कम अवधि वाले मामलों में डीपीआरओ स्तर से प्रमाणपत्र जारी होगा। जन्म के एक साल से अधिक और दो साल तक की अवधि वाले मामलों में एसडीएम या जिला रजिस्ट्रार प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। वहीं, जन्म के दो साल बाद आवेदन करने पर प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
बिल्हौर: 1,800
घाटमपुर: 150
सदर: 200
नर्वल: 50
वर्जन
नए नियमों के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। अगर तहसील स्तर पर लंबे समय से आवेदन लंबित पड़े रहे हैं तो इसकी जांच करवाकर संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा। - महेंद्र सिंह तंवर, जिलाधिकारी
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इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने जन्म के एक साल बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसीलों में आवेदन किया था। दोबारा प्रक्रिया शुरू होने पर उन्हें शपथपत्र बनवाने से लेकर अन्य दस्तावेज जुटाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
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पहले जन्म के एक माह के भीतर ग्राम पंचायत या नगर निकाय से प्रमाणपत्र जारी किया जाता था। एक माह से अधिक और एक साल से कम अवधि वाले मामलों में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) की अनुमति से प्रमाणपत्र जारी होता था। जन्म के एक साल से अधिक समय बीतने पर संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के स्तर से कार्रवाई की जाती थी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई लोग समय पर जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनवा पाते। जरूरत पड़ने पर आवेदन करते हैं, तब तक जन्म को एक साल से अधिक समय बीत चुका होता है। ऐसे आवेदनों के निस्तारण की जिम्मेदारी तहसीलों पर थी, लेकिन लंबित मामलों को समय रहते नहीं निपटाया गया।
नए नियमों के तहत जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। एक माह से अधिक और एक साल से कम अवधि वाले मामलों में डीपीआरओ स्तर से प्रमाणपत्र जारी होगा। जन्म के एक साल से अधिक और दो साल तक की अवधि वाले मामलों में एसडीएम या जिला रजिस्ट्रार प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। वहीं, जन्म के दो साल बाद आवेदन करने पर प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
बिल्हौर: 1,800
घाटमपुर: 150
सदर: 200
नर्वल: 50
वर्जन
नए नियमों के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। अगर तहसील स्तर पर लंबे समय से आवेदन लंबित पड़े रहे हैं तो इसकी जांच करवाकर संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा। - महेंद्र सिंह तंवर, जिलाधिकारी