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गांवों में लंबित वरासत का पता लगाएंगे अफसर

Wed, 01 Sep 2021 12:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 12:38 AM IST
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Officers will find out the pending inheritance in the villages
कानपुर देहात। तहसील के अफसर गांवों में जाकर लंबित वरासत की जानकारी हासिल करेंगे। जिन गांवों में वरासत दर्ज होने के ज्यादा मामले लंबित होंगे वहां अभियान चलाया जाएगा। वरासत के लंबित प्रकरणों में एसडीएम की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके निर्देश डीएम ने दिए हैं।
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किसान की मौत के बाद राजस्व अभिलेख में कृषि भूमि वारिसों के नाम दर्ज की जाती है। अविवादित प्रकरण में अब ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया मृतक किसान के परिजन करते हैं।
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राजस्व कर्मियों की जांच के बाद वरासत दर्ज की जाती है। देखने में आया है कि अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां वरासत दर्ज नहीं होने के मामले हैं। समीक्षा में डीएम ने अविवादित वरासत के मामलों के लंबित होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने तहसील में उपलब्ध आर-6 रजिस्टर से ऐसे गांवों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें एक या दो वर्ष में कोई वरासत दर्ज नहीं की गई है। इसके बाद चिह्नित इन गांवों में वरासत अभियान चलाया जाएगा। डीएम जेपी सिंह ने बताया कि वरासत के मामले लंबित होने पर अब एसडीएम की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
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पांच तहसीलों में 154 मामले लंबित
ऑनलाइन आए वरासत दर्ज करने के मामलों में भोगनीपुर तहसील की स्थिति सबसे अच्छी है। यहां एक भी प्रकरण लंबित नहीं है। वहीं, सबसे अधिक 43 मामले प्रकरण अकबरपुर तहसील में लंबित हैं। डेरापुर में 40, सिकंदरा में 17, रसूलाबाद में 38 व मैथा तहसील में 16 मामले लंबित हैं।

बीना-पनकी पाइप लाइन प्रोजेक्ट का मुआवजा अटका
कानपुर देहात। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरशेन लिमिटेड के बीना-पनकी पाइप लाइन अकबरपुर तहसील के सरवनखेड़ा, पतरा सड़वा, नाही ज्यूनिया, शाहजहांपुर निनायां, नाही ज्यूनिया, मोहाना, सूरजपुर, कोरारी, उस्मानपुर जमरेही, जसौरा वीरसिंह आदि गांवों से होकर निकली है। करीब 14 गांवों के 140 से अधिक मृतकों की सूची कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर सचेतन बीएम ने वरासत दर्ज कराने के लिए तहसील प्रशासन को उपलब्ध कराई थी। करीब सौ किसानों की वरासत दर्ज हो गई, लेकिन गांव के बाहर रहने वाले तीस से अधिक लोगों की वरासत नहीं हुई है। ऐसे में मृतक किसानों के वारिसानों का मुआवजा अटका है। तहसीलदार सदर संजय कुमार ने बताया कि कई किसानों के परिवार गांव में नहीं रहते हैं। ऐसे प्रकरणों में वरासत नहीं हो सकी है।
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