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अफसर अच्छे हैं, शहर में रामराज है
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:35 AM IST
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फेथफुलगंज मे आयोजित रोजा-इफ्तार में शिरकत करते कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया (दाएं) व अन्य
- फोटो : amarujala
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कानपुर। साहबों की नजर में गांव का मौसम गुलाबी है, पर ये आंकड़े झूठे, ये दावे किताबी हैं...। अफसर अच्छा काम कर रहे हैं। शहर में कहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं है। सब कुछ ठीक है। अभी मैं 30 जून तक ट्रांसफर, पोस्टिंग में व्यस्त हूं, फिर शहर के विकास पर फोकस करेंगे। ये कहना है जिले के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक करके पीछे हट जाने वाले प्रभारी मंत्री बलवंत सिंह रामू वालिया का। पिछली बार भी वे एलान करके समीक्षा बैठक करने से पीछे हट गए थे और बुुधवार को फिर ऐसा किया। अमर उजाला ने बुधवार के अंक में ही यह आशंका जता दी थी कि मंत्री जी बैठक-वैठक नहीं करने वाले।
चार महीने तक शहर गंभीर जल संकट से जूझता रहा, पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची रही, मंत्री जी ने कहा था कि मैं पानी संकट का निदान होने तक शहर में कैंप करूंगा। लेकिन वे नहीं आए। पहली तेज बारिश में शहर के हर हिस्से में जलभराव हुआ, सड़कें पापड़ की तरह टूट-धंस रही हैं, आशुतोष अपहरण-हत्याकांड और तमाम अनसुलझी वारदात कानून-व्यवस्था की पोल खोल रही हैं और मंत्री जी को शहर में अफसरों का काम अच्छा लग रहा है। शहर में सब कुछ ठीक लग रहा है। इस बाबत सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि मैंने कानपुर को ही कर्मभूमि बना रखा है। पिछली मीटिंगों के दावे, आदेशों पर अमल न होने का मामला मंत्री टाल गए। जवाब देने से बचते दिखे। प्रभारी मंत्री ने बुधवार को दोपहर बाद 3:30 बजे सर्किट हाउस में मीटिंग बुलाई थी। कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, डीएम और एसएसपी सहित तमाम अधिकारियों को भी तलब किया गया था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मंत्री जी का कार्यक्रम बदल गया। मंत्री जी शाम 6:15 बजे सर्किट हाउस आए और पार्टी पदाधिकारियोें से बात करके रवाना हो गए। मीडिया ने सवाल किया तो मंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत काम में हिस्सा लेने आया हूं। इस कारण मीटिंग स्थगित कर दी। अब जुलाई में आकर विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।
बताते चलें कि कारागार मंत्री 18 अप्रैल और 10 मई 2016 को भी कानपुर आए थे। तालाब, जमीनों पर अवैध कब्जे की जांच, पेयजल संकट दूर करने सहित तमाम समस्याओं के समाधान का भरोसा भी दिलाया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल करके आईना भी दिखाया था। बताया था कि मंत्री जी की मीटिंग से शहर या फिर शहरवासियों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। अब कहा जा रहा है कि अच्छा हुआ जो मंत्री जी की मीटिंग नहीं हो सकी। इससे कोई फायदा नहीं होता है।
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चार महीने तक शहर गंभीर जल संकट से जूझता रहा, पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची रही, मंत्री जी ने कहा था कि मैं पानी संकट का निदान होने तक शहर में कैंप करूंगा। लेकिन वे नहीं आए। पहली तेज बारिश में शहर के हर हिस्से में जलभराव हुआ, सड़कें पापड़ की तरह टूट-धंस रही हैं, आशुतोष अपहरण-हत्याकांड और तमाम अनसुलझी वारदात कानून-व्यवस्था की पोल खोल रही हैं और मंत्री जी को शहर में अफसरों का काम अच्छा लग रहा है। शहर में सब कुछ ठीक लग रहा है। इस बाबत सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि मैंने कानपुर को ही कर्मभूमि बना रखा है। पिछली मीटिंगों के दावे, आदेशों पर अमल न होने का मामला मंत्री टाल गए। जवाब देने से बचते दिखे। प्रभारी मंत्री ने बुधवार को दोपहर बाद 3:30 बजे सर्किट हाउस में मीटिंग बुलाई थी। कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, डीएम और एसएसपी सहित तमाम अधिकारियों को भी तलब किया गया था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मंत्री जी का कार्यक्रम बदल गया। मंत्री जी शाम 6:15 बजे सर्किट हाउस आए और पार्टी पदाधिकारियोें से बात करके रवाना हो गए। मीडिया ने सवाल किया तो मंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत काम में हिस्सा लेने आया हूं। इस कारण मीटिंग स्थगित कर दी। अब जुलाई में आकर विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।
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बताते चलें कि कारागार मंत्री 18 अप्रैल और 10 मई 2016 को भी कानपुर आए थे। तालाब, जमीनों पर अवैध कब्जे की जांच, पेयजल संकट दूर करने सहित तमाम समस्याओं के समाधान का भरोसा भी दिलाया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल करके आईना भी दिखाया था। बताया था कि मंत्री जी की मीटिंग से शहर या फिर शहरवासियों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। अब कहा जा रहा है कि अच्छा हुआ जो मंत्री जी की मीटिंग नहीं हो सकी। इससे कोई फायदा नहीं होता है।
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