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ओएफसी धमाकाः सामने आई बड़ी लापरवाही, परीक्षण टीम ने हादसे से दो घंटे पहले ही कही थी ये बात
Mon, 15 Apr 2019 12:02 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 15 Apr 2019 12:02 AM IST
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ओएफसी धमाका (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर (ओएफसी) में नौ अप्रैल को एलएफजी (लाइट फील्ड गन) में हुए धमाके में बड़ी लापरवाही सामने आई है। परीक्षण करने वाली टीम ने घटना से दो घंटे पहले ही कैरिज के रिक्वाइल सिस्टम के खराब होने की जानकारी दे दी थी। यही नहीं जिस कैरिज पर परीक्षण किया जा रहा था, उसे जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) पहले ही रिजेक्ट कर चुकी थी। इसके बाद भी यूनिट के अधिकारी ने परीक्षण करने को कहा और हादसा हो गया। इसमें दो लोगों की मौत भी हुई।
सूत्रों के मुताबिक लंच पर जाने से पहले सहायक इंजीनियर मोहन सिंह राजपूत, एग्जामिनर एमपी महतो ने टीम इंचार्ज और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी से कहा था कि कैरिज का रिक्वाइल सिस्टम ठीक नहीं है। इस पर काम करना जोखिम भरा हो सकता है। यह जानकारी अधिकारी ने यूनिट के उच्च अधिकारी को दी लेकिन अधिकारी ने परीक्षण के आदेश दे दिए।
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सूत्रों के मुताबिक लंच पर जाने से पहले सहायक इंजीनियर मोहन सिंह राजपूत, एग्जामिनर एमपी महतो ने टीम इंचार्ज और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी से कहा था कि कैरिज का रिक्वाइल सिस्टम ठीक नहीं है। इस पर काम करना जोखिम भरा हो सकता है। यह जानकारी अधिकारी ने यूनिट के उच्च अधिकारी को दी लेकिन अधिकारी ने परीक्षण के आदेश दे दिए।
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जानिए...क्या होता है रिक्वाइल सिस्टम
एलएफजी बैरल के परीक्षण के दौरान जैसे ही नाइट्रोजन सिलिंडर के रिक्वाइल ने पुल बैक मारा और धमाका हो गया। सबसे नजदीक होने के कारण सहायक इंजीनियर मोहन सिंह राजपूत की मौके पर मौत हो गई और एग्जामिनर एमपी महतो की इलाज के दौरान मौत हुई। सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी देखा गया कि आखिर किस वजह से रिजेक्ट किए जा चुके कैरिज को फिर से इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया।
निर्माणी में करीब 50 साल पुराना कैरिज रखा है। इसी कैरिज पर नई बैरल की टेस्टिंग की जाती है। कैरिज में ही रिक्वाइल सिस्टम होता है। इस सिस्टम में नाइट्रोजन और ऑयल के सिलिंडर लगे होते हैं। ये सिलिंडर गोला दगने के बाद बैरल को कंट्रोल करते हैं। यदि यह सिस्टम न हो तो गोला दगने के बाद बैरल 10-12 फीट पीछे चली जाए।
निर्माणी में करीब 50 साल पुराना कैरिज रखा है। इसी कैरिज पर नई बैरल की टेस्टिंग की जाती है। कैरिज में ही रिक्वाइल सिस्टम होता है। इस सिस्टम में नाइट्रोजन और ऑयल के सिलिंडर लगे होते हैं। ये सिलिंडर गोला दगने के बाद बैरल को कंट्रोल करते हैं। यदि यह सिस्टम न हो तो गोला दगने के बाद बैरल 10-12 फीट पीछे चली जाए।
खुलने लगी जांच की परतें
ओएफसी में हुए धमाके की जांच की परतें खुलने लगी हैं। इसमें कई बड़े अफसरों की लापरवाही की बात सामने आ रही है। हालांकि इन अफसरों को बचाने के लिए भी तिकड़म शुरू हो गए हैं। संभावना है कि जल्द ही कुछ लोगों को चार्ज शीट जारी की जा सकती है। सूत्रों की मानें तो परीक्षण करने वाली टीम को डराया-धमकाया जा रहा है।
घटनास्थल की सफाई, हटा दी गई कैरिज
हादसे के पांचवें दिन हादसा स्थल की पूरी तरह से साफ-सफाई कर दी गई। खून के धब्बे मिटा दिए गए हैं। इसके अलावा जिस कैरिज पर एलएफजी का परीक्षण किया जा रहा था, उसे भी हटा दिया गया है। अचानक घटनास्थल की सफाई भी कई सवाल खड़े कर रही है।
घटनास्थल की सफाई, हटा दी गई कैरिज
हादसे के पांचवें दिन हादसा स्थल की पूरी तरह से साफ-सफाई कर दी गई। खून के धब्बे मिटा दिए गए हैं। इसके अलावा जिस कैरिज पर एलएफजी का परीक्षण किया जा रहा था, उसे भी हटा दिया गया है। अचानक घटनास्थल की सफाई भी कई सवाल खड़े कर रही है।