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Kanpur News: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने परखी बाल गृहों की व्यवस्थाएं
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माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। किशोर न्याय समिति, हाईकोर्ट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय भनोट ने शनिवार को स्वरूप नगर स्थित राजकीय बालिका गृह तथा कल्याणपुर स्थित बाल गृह का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संवासिनी बालिकाओं और बालकों से सीधे संवाद कर उनकी शिक्षा, रहन-सहन और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति ने बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों को विस्तार से देखा। राजकीय बालिका गृह में संचालित होटल मैनेजमेंट, कंप्यूटर प्रशिक्षण, क्राफ्ट और कथक जैसी गतिविधियों का अवलोकन करते हुए उन्होंने अधिकारियों की सराहना की। साथ ही निर्देश दिए कि शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को केवल आश्रय देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा और कौशल भी दिया जाना चाहिए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मानजनक जीवन जी सकें। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने उन्हें बताया कि बालिका गृह की दो संवासिनियों को रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है। इनमें एक युवती को लेक्मे कंपनी में तथा दूसरी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कराया गया है। इस पर न्यायमूर्ति ने संतोष व्यक्त करते हुए ऐसे प्रयासों को और बढ़ाने के निर्देश दिए।
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कानपुर। किशोर न्याय समिति, हाईकोर्ट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय भनोट ने शनिवार को स्वरूप नगर स्थित राजकीय बालिका गृह तथा कल्याणपुर स्थित बाल गृह का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संवासिनी बालिकाओं और बालकों से सीधे संवाद कर उनकी शिक्षा, रहन-सहन और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति ने बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों को विस्तार से देखा। राजकीय बालिका गृह में संचालित होटल मैनेजमेंट, कंप्यूटर प्रशिक्षण, क्राफ्ट और कथक जैसी गतिविधियों का अवलोकन करते हुए उन्होंने अधिकारियों की सराहना की। साथ ही निर्देश दिए कि शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को केवल आश्रय देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा और कौशल भी दिया जाना चाहिए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मानजनक जीवन जी सकें। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने उन्हें बताया कि बालिका गृह की दो संवासिनियों को रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है। इनमें एक युवती को लेक्मे कंपनी में तथा दूसरी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कराया गया है। इस पर न्यायमूर्ति ने संतोष व्यक्त करते हुए ऐसे प्रयासों को और बढ़ाने के निर्देश दिए।
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