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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   NTC will get back bungalows worth 60 crores after 46 years, illegal occupant will have to pay Rs 20 lakh as co

Kanpur: एनटीसी को 46 साल बाद वापस मिलेंगे 60 करोड़ के बंगले, अवैध कब्जेदार को देना होगा 20 लाख रुपये हर्जाना

Thu, 12 Jan 2023 03:42 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 12 Jan 2023 03:42 PM IST
सार

एनटीसी लिमिटेड के दो बंगलों पर 46 साल से कब्जा जमाए अवैध कब्जेदार को एक सप्ताह में बंगले खाली करने होंगे। बता दें कि जिला जज ने अपील खारिज करते हुए 20 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

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NTC will get back bungalows worth 60 crores after 46 years, illegal occupant will have to pay Rs 20 lakh as co
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) लिमिटेड के दो बंगलों पर 46 साल से कब्जा जमाए राजीव चांदगोठिया को एक सप्ताह में बंगले खाली करने होंगे। दोनों बंगलों की कीमत लगभग साठ करोड़ रुपये है। जिला जज संदीप जैन ने राजीव की अपीलें खारिज करते हुए बंगले खाली करने के साथ ही 20 लाख की क्षतिपूर्ति भी एक सप्ताह में अदा करने का आदेश दिया है। क्षतिपूर्ति न देने पर भू-राजस्व की तरह वसूली भी की जा सकेगी।

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अनवरगंज स्थित फोकलैंड बंगला नंबर 84/45 और विनबर्टन बंगला नंबर 84/45-46 पर वर्ष 1976 से कपड़े का कारोबार करने वाली अथर्टन मिल्स कंपनी कानपुर का स्वामित्व था। कंपनी की सभी चल-अचल संपत्ति, संयंत्र, मशीनरी आदि को राष्ट्रीयकरण नीति के तहत एक अप्रैल 1995 को एनटीसी में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद सभी संपत्तियों पर केंद्र सरकार का कब्जा हो गया।

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सरकारी जमीन पर सालों से है कब्जा
फोकलैंड व विनबर्टन दोनों बंगलों पर राजीव चांदगोठिया सालों से कब्जा जमाए बैठे थे। कई बार कब्जा खाली करने को कहा गया, लेकिन किया नहीं। वर्ष 2003 में कानूनी नोटिस दी गई। इसके बाद इस्टेट ऑफिसर ने 24 सितंबर 2013 को राजीव को बंगला खाली करने के आदेश दे दिए। अवर न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ राजीव ने जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की।

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बचाव पक्ष बोला- पहले कभी कोई नोटिस नहीं दिया
तर्क रखा कि बंगलों में वह और उनके पूर्वज वर्ष 1970 से काबिज हैं। संपत्ति पर केंद्र सरकार या एनटीसी का कोई अधिकार नहीं है। पहले कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया। 30 साल बाद अचानक नोटिस भेजा गया। कानूनन 12 साल से ज्यादा की अवधि बीत जाने के बाद विपक्षी से कब्जा लेने के लिए कोई वाद दाखिल नहीं किया जा सकता। एनटीसी की ओर से अधिवक्ता रामनाथ मिश्रा ने तर्क रखा कि संपत्ति राजीव के पिता को रहने के लिए दी गई थी।

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उनके पास न तो कोई किरायानामा है न पट्टा या लाइसेंस है। वर्ष 1976 में ही उन्हें बंगले खाली कर देने चाहिए थे। एक फर्जी व कूटरचित विक्रय अनुबंध पत्र के आधार पर कुछ व्यक्तियों नरेंद्र नाथ देब, श्याम सुंदर मटोलिया, किशोरी लाल चौधरी, धीरेंद्र नाथ बनर्जी व ठकुराई दास पसारी ने संपत्ति पर अधिकार के लिए कोलकाता हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया था, जो वर्ष 2002 में खारिज हो गया था।

अवैध कब्जेदारों को नहीं मिल सकती अनुमति
इसमें हाईकोर्ट ने माना था कि बंगले अथर्टन मिल्स कंपनी की संपत्ति हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी संपत्ति पर प्रतिकूल अध्यासन के आधार पर स्वामित्व प्राप्त करने की मियाद 30 साल बताई है। दोनों बंगले पॉश इलाके में 5.17 एकड़ यानी 20,992 वर्गमीटर में स्थित हैं। सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जेदारों को रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इन्हीं आधारों पर अपील खारिज कर दी।

कोर्ट के आदेश से एक सप्ताह में संपत्ति पर कब्जा ले लिया जाएगा। साथ ही हर्जाने की रकम की वसूली भी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वसूली वाद भी न्यायालय में दाखिल किया जाएगा।  -रमाकांत यादव, प्रभारी संपत्ति, एनटीसी

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