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बगास के बिस्कुट की तकनीक के लिए कंपनियों में होड़, एनएसआई ने तैयार की डाइटरी फाइबर बिस्कुट तकनीक
Sat, 16 Jan 2021 04:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 16 Jan 2021 04:16 PM IST
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एनएसआई कानपुर
- फोटो : amar ujala
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नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) की बगास से डाइटरी फाइबर बिस्कुट बनाने वाली तकनीक कंपनियों को बहुत पसंद आ रही हैै। देशभर की बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों ने एनएसआई में तकनीक के लिए आवेदन किया है। एनएसआई के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि कंपनियों को यह तकनीक नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कारपोरशन (एनआरडीसी) के जरिये दी जाएगी।
तकनीक देने के लिए शर्तें तय की जा रही हैं। गन्ने की पेराई के बाद बचने वाले बगास के डाइटरी फाइबर से बिस्कुट बनाने की तकनीक का मॉडल एनएसआई ने विकसित किया है। इसमें और भी पौष्टिक तत्व मिलाए जा सकते हैं। बिस्कुट में फाइबर होने की वजह से ये बहुत फायदेमंद साबित होंगे। खासतौर पर डायबिटीज, लिवर, किडनी आदि रोगियों को अधिक फायदा होगा।
बगास से बिस्कुट बनाने की तकनीक लेने के लिए मुंबई, कोलकाता आदि शहरों की कंपनियों ने आवेदन किया है। निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि तकनीक देने में शर्तें तय की जा रही हैं। एक तो तकनीक ट्रांसफर करने में कंपनी से भुगतान लिया जाएगा। इसके साथ ही उत्पाद की बिक्री से जो मुनाफा होगा उसमें भी हिस्सा तय रहेगा। बाकी एनआरडीसी तकनीक के व्यवसायीकरण केे मामले तय करती है।
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तकनीक देने के लिए शर्तें तय की जा रही हैं। गन्ने की पेराई के बाद बचने वाले बगास के डाइटरी फाइबर से बिस्कुट बनाने की तकनीक का मॉडल एनएसआई ने विकसित किया है। इसमें और भी पौष्टिक तत्व मिलाए जा सकते हैं। बिस्कुट में फाइबर होने की वजह से ये बहुत फायदेमंद साबित होंगे। खासतौर पर डायबिटीज, लिवर, किडनी आदि रोगियों को अधिक फायदा होगा।
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बगास से बिस्कुट बनाने की तकनीक लेने के लिए मुंबई, कोलकाता आदि शहरों की कंपनियों ने आवेदन किया है। निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि तकनीक देने में शर्तें तय की जा रही हैं। एक तो तकनीक ट्रांसफर करने में कंपनी से भुगतान लिया जाएगा। इसके साथ ही उत्पाद की बिक्री से जो मुनाफा होगा उसमें भी हिस्सा तय रहेगा। बाकी एनआरडीसी तकनीक के व्यवसायीकरण केे मामले तय करती है।
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