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Kanpur News: बाढ़ पीड़ितों के लिए अब मदद का सूखा
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:गोविन्द की मां ।
- फोटो : :गोविन्द की मां ।
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- जलस्तर घटने से बुखार और त्वचा रोग से पीड़ित हो रहे ग्रामीण, नहीं पहुंच रहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें, परचून की दुकानों स दवा लेना मजबूरी , पर्याप्त राशन बांटने का दावा फिर भी भटक रहे बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा/चकरनगर। चंबल-यमुना नदियों में फिलहाल बाढ़ का पानी घटने लगा है लेकिन मुसीबतें कम नहीं हुईं हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में अब बीमारियां फैलने लगीं हैं। सीएमओ के आदेश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रहीं हैं। इस कारण बुखार और त्वचा संक्रमण से पीड़ित लोग आसपास की परचून की दुकान से ही दवाएं लेने को मजबूर हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से भले ही राशन वितरण बांटने का दावा किया जा रहा हो लेकिन अभी भी पर्याप्त वितरण न हो पाने से बाढ़ पीड़ित राशन पाने के लिए भटक रहे हैं।
बता दें कि बीते दिनों कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के चलते चंबल, यमुना व क्वारी नदियां उफान पर थीं। चकरनगर और उदी क्षेत्र के 27 गांव पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। कुछ गांव आंशिक रूप से प्रभावित हुए थे। अब चंबल, यमुना और क्वांरी शांत होने लगी हैं। गांवों में भरा पानी भी कम हो रहा है। पानी कम होने से टीलों पर पन्नी डालकर रह रहे लोग अपने घरों को वापस आना शुरू हो गए हैं। भले ही कई गांवों से नदी का पानी निकल गया है लेकिन वह अपने पीछे बाढ़ की दुश्वारियां छोड़ गया है। पानी निकलने के बाद गांवों की गलियों से लेकर घरों के अंदर तक चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ है।
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बाढ़ पीड़ित परिवार अब अपने घर को साफ कर फिर से गृहस्थी बसाने के प्रयास में जुटे हैं। 24 घंटे इस नमी में रहने से लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आने लगे हैं। हर तरफ कीचड़ व दलदल होने से कई लोगों के पैरों में संक्रमण हो गया है और उनका चलना फिरना भी दूभर है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है। बच्चे इस कीचड़ में रहकर जुखाम, बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
सोमवार को ककरैया गांव में तंबू में बैठी रामकांति अपने पैरों को दिखाकर बताती हैं कि कीचड़ से पूरे पैर गलने लगे हैं। संक्रमण से पैरों में तेज खुजली हो रही है गांव में कहीं भी कोई दवा न मिलने से वह पैरों में सिर्फ सरसों का तेल लगाकर काम चला रही हैं। वहीं पास ही तंबू में बैठीं सुनीता ने बताया कि उनके पति को दो दिन से बुखार आ रहा है। गांव में अभी तक कोई डाॅक्टरों की टीम नहीं आई है। इस पर गांव की एक परचून की दुकान से वह बुखार की गोली लाकर उन्हें दे रही हैं। गांव की ही सुधा ने बताया कि उनके दोनों बच्चों को बुखार आ रहा है और वे कुछ खा पी भी नहीं रहे हैं। गांव की सड़कों पर अभी भी कीचड़ और पानी है, जिससे वह उनका इलाज कराने नहीं जा पा रही हैं।
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मां बीमार...कीचड़-दलदल की वजह से नहीं ले जा पा रहे अस्पताल
बिरौनाबाग के गोविंद कुशवाहा ने बताया कि उनकी मां भूरी देवी की तबीयत खराब है। दो दिन से तेज बुखार आ रहा है। रास्ते में कीचड़-दलदल होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पाया है। गांव में अभी तक कोई स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। कुंअरपुर कुरछा में मुलायम सिंह परिहार, पिंकी देवी, रनसिंह, सोनेलाल कुशवाहा, गुलजारी शाक्य भी बुखार की चपेट में आकर कराह रहे हैं। परचून की दुकान पर मिलने वाली गोली खाकर काम चला रहे हैं।
वर्जन
सभी बाढ़ चौकियों पर सीएचओ के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात हैं, जहां भी किसी के बीमार होने की जानकारी होती है। टीम गांव में जाकर उनका इलाज कर रही हैं।
- डॉ. बृजेंद्र सिंह, सीएमओ
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- जलस्तर घटने से बुखार और त्वचा रोग से पीड़ित हो रहे ग्रामीण, नहीं पहुंच रहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें, परचून की दुकानों स दवा लेना मजबूरी , पर्याप्त राशन बांटने का दावा फिर भी भटक रहे बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा/चकरनगर। चंबल-यमुना नदियों में फिलहाल बाढ़ का पानी घटने लगा है लेकिन मुसीबतें कम नहीं हुईं हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में अब बीमारियां फैलने लगीं हैं। सीएमओ के आदेश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रहीं हैं। इस कारण बुखार और त्वचा संक्रमण से पीड़ित लोग आसपास की परचून की दुकान से ही दवाएं लेने को मजबूर हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से भले ही राशन वितरण बांटने का दावा किया जा रहा हो लेकिन अभी भी पर्याप्त वितरण न हो पाने से बाढ़ पीड़ित राशन पाने के लिए भटक रहे हैं।
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बता दें कि बीते दिनों कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के चलते चंबल, यमुना व क्वारी नदियां उफान पर थीं। चकरनगर और उदी क्षेत्र के 27 गांव पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। कुछ गांव आंशिक रूप से प्रभावित हुए थे। अब चंबल, यमुना और क्वांरी शांत होने लगी हैं। गांवों में भरा पानी भी कम हो रहा है। पानी कम होने से टीलों पर पन्नी डालकर रह रहे लोग अपने घरों को वापस आना शुरू हो गए हैं। भले ही कई गांवों से नदी का पानी निकल गया है लेकिन वह अपने पीछे बाढ़ की दुश्वारियां छोड़ गया है। पानी निकलने के बाद गांवों की गलियों से लेकर घरों के अंदर तक चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ है।
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बाढ़ पीड़ित परिवार अब अपने घर को साफ कर फिर से गृहस्थी बसाने के प्रयास में जुटे हैं। 24 घंटे इस नमी में रहने से लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आने लगे हैं। हर तरफ कीचड़ व दलदल होने से कई लोगों के पैरों में संक्रमण हो गया है और उनका चलना फिरना भी दूभर है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है। बच्चे इस कीचड़ में रहकर जुखाम, बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
सोमवार को ककरैया गांव में तंबू में बैठी रामकांति अपने पैरों को दिखाकर बताती हैं कि कीचड़ से पूरे पैर गलने लगे हैं। संक्रमण से पैरों में तेज खुजली हो रही है गांव में कहीं भी कोई दवा न मिलने से वह पैरों में सिर्फ सरसों का तेल लगाकर काम चला रही हैं। वहीं पास ही तंबू में बैठीं सुनीता ने बताया कि उनके पति को दो दिन से बुखार आ रहा है। गांव में अभी तक कोई डाॅक्टरों की टीम नहीं आई है। इस पर गांव की एक परचून की दुकान से वह बुखार की गोली लाकर उन्हें दे रही हैं। गांव की ही सुधा ने बताया कि उनके दोनों बच्चों को बुखार आ रहा है और वे कुछ खा पी भी नहीं रहे हैं। गांव की सड़कों पर अभी भी कीचड़ और पानी है, जिससे वह उनका इलाज कराने नहीं जा पा रही हैं।
मां बीमार...कीचड़-दलदल की वजह से नहीं ले जा पा रहे अस्पताल
बिरौनाबाग के गोविंद कुशवाहा ने बताया कि उनकी मां भूरी देवी की तबीयत खराब है। दो दिन से तेज बुखार आ रहा है। रास्ते में कीचड़-दलदल होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पाया है। गांव में अभी तक कोई स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। कुंअरपुर कुरछा में मुलायम सिंह परिहार, पिंकी देवी, रनसिंह, सोनेलाल कुशवाहा, गुलजारी शाक्य भी बुखार की चपेट में आकर कराह रहे हैं। परचून की दुकान पर मिलने वाली गोली खाकर काम चला रहे हैं।
वर्जन
सभी बाढ़ चौकियों पर सीएचओ के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात हैं, जहां भी किसी के बीमार होने की जानकारी होती है। टीम गांव में जाकर उनका इलाज कर रही हैं।
- डॉ. बृजेंद्र सिंह, सीएमओ