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कारोबारियों के सामने 'टैक्स टेररिज्म' जैसा माहौल, आयकर अधिनियम की कई धाराएं क्रूर: कपिल गोयल
Sun, 30 Dec 2018 11:29 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 30 Dec 2018 11:29 AM IST
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कारोबारियों में टैक्स टेररिज्म जैसा माहौल
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दिल्ली से आए जाने माने सीए व अधिवक्ता कपिल गोयल ने आयकर अधिनियम की कई धाराओं को क्रूरतम करार दिया है। उन्होंने कहा है कि नए प्रावधानों की वजह से कारोबारियों में टैक्स टेररिज्म जैसा माहौल बन गया है।
सर्च और सर्वे के बाद कारोबारियों से जबरन सरेंडर करवाया जा रहा है। प्रैक्टिस के दौरान कई ऐसे प्रकरण उनके सामने आए जिसमें धारा-115(बीबीई) को हथियार बनाकर कारोबारी से 90 फीसदी टैक्स और जुर्माना वसूला गया।
कानपुर के सीए संस्थान की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के लखनपुर स्थित भवन में शनिवार को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर पर पूरे दिन की कार्यशाला हुई। इसमें सीए कपिल गोयल बतौर वक्ता शामिल थे।
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सर्च और सर्वे के बाद कारोबारियों से जबरन सरेंडर करवाया जा रहा है। प्रैक्टिस के दौरान कई ऐसे प्रकरण उनके सामने आए जिसमें धारा-115(बीबीई) को हथियार बनाकर कारोबारी से 90 फीसदी टैक्स और जुर्माना वसूला गया।
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कानपुर के सीए संस्थान की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के लखनपुर स्थित भवन में शनिवार को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर पर पूरे दिन की कार्यशाला हुई। इसमें सीए कपिल गोयल बतौर वक्ता शामिल थे।
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डेमो
उन्होंने कहा कि किसी के यहां सर्च या सर्वे हो जाए तो आयकर अधिकारी किसी अन्य धारा का इस्तेमाल करने के बजाय सीधे धारा-115 (बीबीई) के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि इस धारा के इस्तेमाल से पहले कई ऐसी धाराएं हैं जिनमें कार्रवाई होनी चाहिए।
यह आयकर की क्रूर धारा है। यह अघोषित आय को रोकने के लिए बनी थी। इसमें टैक्स की दर 60 फीसदी और जुर्माना 30 फीसदी है। प्रत्यक्ष कर बोर्ड ऐसा स्पष्टीकरण जारी करे जिसे सामान्य कारोबारी भी समझे और अपने हक के लिए लड़ सके।
उन्होंने कहा कि जांच विंग के अधिकारी कारोबारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। ब्यूरोक्रेट प्रावधानों को ठीक से समझ नहीं पा रहे और मनमानी कार्रवाई कर रहे हैं। नियमानुसार धारा-148 का इस्तेमाल तभी होना चाहिए जब टैक्स चोरी साबित हो चुकी हो।
उन्होंने अभियोजन की बढ़ती कार्रवाई पर भी चिंता जताई। कार्यशाला में सीए हिमांशु सिंह और सीए आशीष बंसल ने अप्रत्यक्ष कर के प्रावधानों पर चर्चा की। अध्यक्षता सीए सुधींद्र जैन ने की।
यह आयकर की क्रूर धारा है। यह अघोषित आय को रोकने के लिए बनी थी। इसमें टैक्स की दर 60 फीसदी और जुर्माना 30 फीसदी है। प्रत्यक्ष कर बोर्ड ऐसा स्पष्टीकरण जारी करे जिसे सामान्य कारोबारी भी समझे और अपने हक के लिए लड़ सके।
उन्होंने कहा कि जांच विंग के अधिकारी कारोबारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। ब्यूरोक्रेट प्रावधानों को ठीक से समझ नहीं पा रहे और मनमानी कार्रवाई कर रहे हैं। नियमानुसार धारा-148 का इस्तेमाल तभी होना चाहिए जब टैक्स चोरी साबित हो चुकी हो।
उन्होंने अभियोजन की बढ़ती कार्रवाई पर भी चिंता जताई। कार्यशाला में सीए हिमांशु सिंह और सीए आशीष बंसल ने अप्रत्यक्ष कर के प्रावधानों पर चर्चा की। अध्यक्षता सीए सुधींद्र जैन ने की।