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डॉ. सडरेला के उत्पीड़न मामले में कार्रवाई शुरू, आईआईटी धनबाद के निदेशक को नोटिस
Sun, 15 Sep 2019 01:45 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 15 Sep 2019 01:45 PM IST
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आईआईटी कानपुर
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आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस विभाग में तैनात शेड्यूल कास्ट वर्ग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शनिवार को नोएडा में हुई इंस्टीट्यूट के बैठक में प्रो. राजीव शेखर को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर फैसला हुआ।
इसमें उनसे पूछा जाएगा कि आखिर उन्हें उनके पद से डिमोट क्यों न किया जाए? जवाब उचित नहीं मिला तो प्रो. राजीव को डिमोट करके एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया जाएगा। ऐसे में उन्हें निदेशक का पद भी छोड़ना पड़ेगा। इसी मामले में तीन अन्य आरोपी प्रोफेसरों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि प्रोफेसरों ने इसपर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है।
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इसमें उनसे पूछा जाएगा कि आखिर उन्हें उनके पद से डिमोट क्यों न किया जाए? जवाब उचित नहीं मिला तो प्रो. राजीव को डिमोट करके एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया जाएगा। ऐसे में उन्हें निदेशक का पद भी छोड़ना पड़ेगा। इसी मामले में तीन अन्य आरोपी प्रोफेसरों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि प्रोफेसरों ने इसपर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है।
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क्या था मामला
मामला जनवरी 2018 का है। एयरोस्पेस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. सडरेला की नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति पर विभाग के कई प्रोफेसरों ने सवाल खड़े किए थे। इसके बाद डॉ. सडरेला ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले में जांच के बाद चार सीनियर प्रोफेसरों को दोषी ठहराया गया था।
इसमें प्रो. राजीव शेखर, प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा और प्रो. संजय मित्तल पर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने कार्रवाई शुरू की। प्रो. राजीव के अलावा अन्य तीनों प्रोफेसरों पर इंस्टीट्यूट प्रशासन ने कार्रवाई कर दी थी, जबकि प्रो. राजीव शेखर पर कार्रवाई के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मंजूरी मांगी गई थी। मंत्रालय ने मंजूरी दे दी। अब फिर से बोर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अन्य तीनों प्रोफेसर पर हुई कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा है।
मामला जनवरी 2018 का है। एयरोस्पेस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. सडरेला की नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति पर विभाग के कई प्रोफेसरों ने सवाल खड़े किए थे। इसके बाद डॉ. सडरेला ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले में जांच के बाद चार सीनियर प्रोफेसरों को दोषी ठहराया गया था।
इसमें प्रो. राजीव शेखर, प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा और प्रो. संजय मित्तल पर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने कार्रवाई शुरू की। प्रो. राजीव के अलावा अन्य तीनों प्रोफेसरों पर इंस्टीट्यूट प्रशासन ने कार्रवाई कर दी थी, जबकि प्रो. राजीव शेखर पर कार्रवाई के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मंजूरी मांगी गई थी। मंत्रालय ने मंजूरी दे दी। अब फिर से बोर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अन्य तीनों प्रोफेसर पर हुई कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा है।
डॉ. सडरेला को राहत, डिग्री नहीं होगी रद्द
बोर्ड ने डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला को थीसिस मामले में बड़ी राहत दी है। उनकी पीएचडी डिग्री रद्द नहीं की जाएगी। डॉ. सडरेला पर संस्थान के दो पूर्व छात्रों की थीसिस चोरी करने का आरोप लगा था। एक्सपर्ट कमेटी ने जांच कर बोर्ड की बैठक में शनिवार को रिपोर्ट पेश कर दी। बताया गया कि थीसिस के जिन बिंदुओं को चोरी करने का आरोप लगाया गया है वह सामान्य हैं।
ऐसे सामान्य शब्द एक जैसे प्रयोग किए जा सकते हैं। इसे चोरी नहीं कहा जाएगा। हालांकि डॉ. सडरेला और उनके रिसर्च गाइड के लिए एडवायजरी भी जारी की गई है। उधर इंस्टीट्यूट प्रशासन जल्द ही छात्रों व शिक्षकों के लिए भी एडवायजरी जारी करेगा। इसमें बताया जाएगा कि पीएचडी थीसिस लिखते समय क्या करें और क्या न करें।
बोर्ड ने डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला को थीसिस मामले में बड़ी राहत दी है। उनकी पीएचडी डिग्री रद्द नहीं की जाएगी। डॉ. सडरेला पर संस्थान के दो पूर्व छात्रों की थीसिस चोरी करने का आरोप लगा था। एक्सपर्ट कमेटी ने जांच कर बोर्ड की बैठक में शनिवार को रिपोर्ट पेश कर दी। बताया गया कि थीसिस के जिन बिंदुओं को चोरी करने का आरोप लगाया गया है वह सामान्य हैं।
ऐसे सामान्य शब्द एक जैसे प्रयोग किए जा सकते हैं। इसे चोरी नहीं कहा जाएगा। हालांकि डॉ. सडरेला और उनके रिसर्च गाइड के लिए एडवायजरी भी जारी की गई है। उधर इंस्टीट्यूट प्रशासन जल्द ही छात्रों व शिक्षकों के लिए भी एडवायजरी जारी करेगा। इसमें बताया जाएगा कि पीएचडी थीसिस लिखते समय क्या करें और क्या न करें।