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लीज पर चलाई जाएंगी नौ कताई मिलें
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 18 Apr 2015 03:15 AM IST
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17 सालों से बंद पड़ीं नौ कताई मिलों को लीज पर चलाया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। मई के पहले हफ्ते से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मिलों के चलने से करीब 5-7 हजार श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। इन मिलों का मुख्यालय कानपुर में ही है।
उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल 1983-84 में प्रदेश के अमरोहा, बहेड़ी, सीतापुर, मऊआईमा, इटावा, फतेहपुर, मगहर, महमूदाबाद, भदोही, कम्पिल में खोली गई थी। जिसमें में 12 हजार से अधिक श्रमिक-अफसर काम करते थे। 1998 में सभी 11 मिलें बंद कर दी गई थी।
कताई मिल के जीएम वीके मिश्रा ने बताया कि इन 11 में से नौ मिलों को लीज पर चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह लीज 10 वर्ष या अधिक के लिए होगी। लीज लेने वाली कंपनी को प्रतिमाह किराया भुगतान करना पड़ेगा। किराया जल्द ही शासन की ओर से तय किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि मई के पहले हफ्ते में इन मिलों को चलाने के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया सवा महीने की होगी। इसके बाद मिलों को चलाने का काम शुरू होगा। मिलों के चलने से हजारों श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। इटावा और सीतापुर की मिलों की संपत्ति बेचकर पूंजी जुटाई गई है।
इस पूंजी से इन मिलों में काम करते रहे करीब 12 श्रमिकों-अफसरों का बकाया पीएफ का भुगतान भी किया गया है। अब तक 45 करोड़ रुपये पीएफ विभाग में जमा हुआ है।
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उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल 1983-84 में प्रदेश के अमरोहा, बहेड़ी, सीतापुर, मऊआईमा, इटावा, फतेहपुर, मगहर, महमूदाबाद, भदोही, कम्पिल में खोली गई थी। जिसमें में 12 हजार से अधिक श्रमिक-अफसर काम करते थे। 1998 में सभी 11 मिलें बंद कर दी गई थी।
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कताई मिल के जीएम वीके मिश्रा ने बताया कि इन 11 में से नौ मिलों को लीज पर चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह लीज 10 वर्ष या अधिक के लिए होगी। लीज लेने वाली कंपनी को प्रतिमाह किराया भुगतान करना पड़ेगा। किराया जल्द ही शासन की ओर से तय किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि मई के पहले हफ्ते में इन मिलों को चलाने के लिए टेंडर निकाले जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया सवा महीने की होगी। इसके बाद मिलों को चलाने का काम शुरू होगा। मिलों के चलने से हजारों श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। इटावा और सीतापुर की मिलों की संपत्ति बेचकर पूंजी जुटाई गई है।
इस पूंजी से इन मिलों में काम करते रहे करीब 12 श्रमिकों-अफसरों का बकाया पीएफ का भुगतान भी किया गया है। अब तक 45 करोड़ रुपये पीएफ विभाग में जमा हुआ है।