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Kanpur News: कागजों में चलते मिले रैनबसेरा, स्टेशन, बस स्टैंड पर गुजारी रात

Sat, 31 Aug 2024 04:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 04:09 AM IST
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Night shelters were found running only on paper, night spent at station and bus stand
लाइव पड़ताल
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फोटो 01::स्टेशन के पास जेल रोड पर बने रैन बसेरा में लगा ताला। संवाद
फोटो 02::सुंदरपुर रोड पर खुला रैन बसेरा। संवाद
फोटो 03::बस स्टैंड परिसर में खुले में लेटकर रात व्यतीत करते पुरुष व महिला अभ्यर्थी। संवाद
फोटो 04::रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय में बैठे पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी। संवाद
फोटो 06::स्टेशन के पास बने हेल्प डेस्क पर लगा चार बैनर। संवाद



- बैनरों पर परीक्षार्थियों के ठहरने के लिए चार रैनबसेरों का पता फोन नंबरों सहित दर्ज
- कहीं ताला तो कहीं गंदगी के लगे ढेर, पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी भटकने के लिए मजबूर


ऋषि तिवारी
इटावा। पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा में परीक्षार्थियों के ठहरने के लिए नगर पालिका की ओर से की गई रैनबसेरों की व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही दौड़ती मिली। जिले के 11 केंद्रों पर परीक्षा देने आए दूसरे जिलों के परीक्षार्थियों को स्टेशन, बस स्टैंड और सड़कों के किनारे रात काटनी पड़ी।
पालिका प्रशासन की ओर से स्टेशन के बाहर हेल्प डेस्क बनाई गई है। हेल्प डेस्क के साथ पालिका की ओर से अभ्यर्थियों के ठहरने के लिए निशुल्क रैनबसेरा की व्यवस्था का बैनर भी लगाया गया। इन बैनरों पर परीक्षार्थियों के ठहरने के लिए बाकायदा चार रैनबसेरों का पता फोन नंबरों सहित दर्ज किया गया है।
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पालिका की ओर से जेल रोड के पास, स्टेशन बजरिया, सुंदरपुर मोड और बस स्टैंड पर रैन बसेरा बनाकर अभ्यर्थियों को ठहरने के लिए व्यवस्था होने का दावा किया गया। जबकि हकीकत में सिर्फ दो ही रैन बसेरे चलते मिले, जबकि दो कागजों में ही चला दिए गए।
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गुरुवार रात अमर उजाला की पड़ताल में पालिका के दो रैनबसेरा सिर्फ बैनर में चलते मिले, जबकि एक में ताला लटका मिला। वहीं, एक रैनबसेरा खुला मिला, इसमें अभ्यर्थियों को 10 बजे तक आने की हिदायत दी गई। पालिका के रैन बसेरों की हकीकत बयां करती ये लाइव रिपोर्ट...

सीन-एक
स्थान- जेल रोड रैन बसेरा
समय-8:38
ताले में बंद रैनबसेरा, परीक्षार्थियों को स्टेशन पर ही रुकना पड़ा
1- स्टेशन से चार सौ मीटर दूर स्थित रैनबसेरा का फोन नंबर बैनर पर सबसे पहले लिखा था। फोन पर संपर्क करने पर पता चला कि इसमें ठहरने का इंतजाम है। हालांकि मौके पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। निजी बसों को ठहरने के लिए बने इस रैन बसेरा में ताला लगा था। आसपास गंदगी और अंधेरे से ऐसा लगा कि इसे महीनों से नहीं खोला गया हो। वहीं बैनर पर लिखे दूसरे नंबर पर फोन किया गया तो जवाब आया कि जेल के सामने ही रैन बसेरा में व्यवस्था की गई है।

सीन-दो
स्थान-सुंदरपुर रोड
समय- रात्रि 9:39 बजे
रात 10 बजे के बाद प्रवेश की इजाजत नहीं
2- बस स्टैंड से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित पालिका के इस रैन बसेरा का फोन नंबर तीसरे स्थान पर लिखा था। फोन करने पर अभ्यर्थियों के ठहरने की व्यवस्था होने की बात कही गई। अभ्यर्थी बनकर वहां पहुंचकर देखा तो कर्मचारी मौजूद मिले। कर्मचारियों ने बताया कि 10 बजे तक ही प्रवेश की इजाजत है। कर्मचारी ने बताया कि यहां अभी तक सिर्फ एक अभ्यर्थी ठहरा है। (संवाद)


वर्जन
साहब बोले-रैन बसेरों की संख्या पता करते हैं
बैनर को लेकर पूरी जानकारी नहीं है कि उसमें कितने रैनबसेरों की संख्या लिखी है। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए दोनों रैन बसेरे खुले रखने के निर्देश दिए है, फिर भी अगर कर्मचारियों की ओर से लापरवाही की जा रही है, तो तत्काल संज्ञान में लेकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जाएगा।-विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ
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