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नाइजीरियन ठगी का मामला: मेडिकल वीजा पर आया था नाइजीरियन, बना लिया गिरोह, एक साथी को मुंबई पुलिस ले गई
Sun, 01 Aug 2021 12:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 01 Aug 2021 12:43 PM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में साइबर ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच की जांच में एक अहम खुलासा हुआ है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 2019 से अब तक मोसिस का भारत में दो बार आना जाना रहा है। दूसरी बार वह मेडिकल वीजा पर आया है। उसने दावा किया था कि उसको दिल्ली के एक अस्पताल में अपना इलाज करवाना है। इससे संबंधित दस्तावेज नाइजीरिया में तैयार किए गए। उसी आधार पर उसको वीजा जारी किया गया। वहीं वह पहली बार टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। इस पूरे फर्जीवाड़े के लिए खुफिया विभाग उस पर और एक केस दर्ज कराएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। कस्टम अफसर बन करता था
वीडियो कॉल, देता था धमकी
पुलिस कमिश्नर असीम अरुण के मुताबिक आरोपी दो तरह से लोगों से पैसे वसूलता था। पहली बार में वह गिफ्ट भेजने के नाम पर टैक्स और सरचार्ज आदि के नाम पर रुपये जमा करवाता था। जब पीड़ित को एहसास होता था कि वह ठगी का शिकार हो रहा है और रुपये देने से इनकार कर देता है तो साइबर ठग नई साजिश रचते थे। गिरोह के सदस्य वीडियो कॉल पर कस्टम विभाग का अफसर बन बात करते थे। दावा करते थे कि जो गिफ्ट भेजा गया है वह अवैध तरीके से लाया गया है लिहाजा जेल जाना होगा। जेल के डर से लोग सहम जाते थे और उनको रकम भेजते रहते थे। यही वजह है कि आरोपी के पास से कस्टम अधिकारी के नाम से फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है।
महिलाएं भी हैं शामिल
पुलिस की जांच में पता चला है कि गिरोह में महिलाएं भी शामिल हैं। लोगों से चैट सभी करते हैं लेकिन जब फोन पर बातचीत करनी होती है तो ये देखते हैं कि सामने वाला युवक है या युवती। अगर युवती है तो गिरोह का युवक बात करता है अगर युवक है तो युवती बात करती है। जिससे पीड़ित को पूरा भरोसा हो जाए।
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साथी को मुंबई पुलिस ले गई
मोसिस का एक और साथी दिल्ली से गिरफ्तार हुआ है। जिसको मुंबई पुलिस अपने साथ ले गई। जानकारी के मुताबिक वह मोसिस के गिरोह का सदस्य है। जिसने मुंबई के लोगों से ठगी की है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी की है। क्राइम ब्रांच आरोपी के विदेशी खातों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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वीडियो कॉल, देता था धमकी
पुलिस कमिश्नर असीम अरुण के मुताबिक आरोपी दो तरह से लोगों से पैसे वसूलता था। पहली बार में वह गिफ्ट भेजने के नाम पर टैक्स और सरचार्ज आदि के नाम पर रुपये जमा करवाता था। जब पीड़ित को एहसास होता था कि वह ठगी का शिकार हो रहा है और रुपये देने से इनकार कर देता है तो साइबर ठग नई साजिश रचते थे। गिरोह के सदस्य वीडियो कॉल पर कस्टम विभाग का अफसर बन बात करते थे। दावा करते थे कि जो गिफ्ट भेजा गया है वह अवैध तरीके से लाया गया है लिहाजा जेल जाना होगा। जेल के डर से लोग सहम जाते थे और उनको रकम भेजते रहते थे। यही वजह है कि आरोपी के पास से कस्टम अधिकारी के नाम से फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है।
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महिलाएं भी हैं शामिल
पुलिस की जांच में पता चला है कि गिरोह में महिलाएं भी शामिल हैं। लोगों से चैट सभी करते हैं लेकिन जब फोन पर बातचीत करनी होती है तो ये देखते हैं कि सामने वाला युवक है या युवती। अगर युवती है तो गिरोह का युवक बात करता है अगर युवक है तो युवती बात करती है। जिससे पीड़ित को पूरा भरोसा हो जाए।
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साथी को मुंबई पुलिस ले गई
मोसिस का एक और साथी दिल्ली से गिरफ्तार हुआ है। जिसको मुंबई पुलिस अपने साथ ले गई। जानकारी के मुताबिक वह मोसिस के गिरोह का सदस्य है। जिसने मुंबई के लोगों से ठगी की है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी की है। क्राइम ब्रांच आरोपी के विदेशी खातों के बारे में जानकारी जुटा रही है।