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'मास बर्निंग' पर एनजीटी गंभीर, 25 हजार रुपये तक जुर्माना वसूलने का आदेश
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 24 Dec 2016 08:38 PM IST
सार
-हर रोज जलाया जाता है कई क्विंटल कूड़ा
-एनजीटी ने कूड़ा जलाने पर लगाई एक से रोक
-छह माह के लिए लागू होगा कचरा अधिनियम
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विस्तार
मास बर्निंग यानी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा कचरा जलाने से हो रहे प्रदूषण को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीरता से लिया है। ऐसा करने वालों पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना और निजीतौर पर ऐसा करते पाए जाने पर 5000 रुपये जुर्माने का आदेश दिया है।
एनजीटी ने पहली जनवरी से छह महीने के लिए पूरे देश में ठोस कचरा अधिनियम-2016 लागू करने के आदेश दिए हैं। आदेश लागू होने पर शायद यहां भी रोजाना कचरा जलाकर फैलाए जा रहे प्रदूषण पर लगाम लग सकती है।
दो दिन पूर्व एनजीटी ने आदेश पारित किया है। आम तौर पर स्थानीय निकायों के सफाई कर्मी जगह-जगह कूड़े के ढेर आग के हवाले कर देते हैं। इसके पीछे उनका मकसद कचरे के बड़े ढेर को राख के छोटे ढेर में बदलना होता है।
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लेकिन कचरे में शामिल पालीथिन, पत्तियां व अन्य सामग्रियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण फैलाता है। बांदा में भी नगर पालिका सफाई कर्मी रोजाना सुबह जगह-जगह कूड़े ढेर जलाते पाए जाते हैं। साथ ही शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर दक्षिण में गंछा गांव के पास प्रतिदिन भारी मात्रा में शहर का कचरा डाला जा रहा है। सफाई कर्मी इसमें आग भी लगा देते हैं। पहली जनवरी से नया आदेश लागू होने के बाद शायद इस पर लगाम लगे।
पांच से 25 हजार तक जुर्माना
बांदा। उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अवर अभियंता कुंवर संतोष कुमार का कहना है कि कूड़ा या कचरा जलाने पर कार्बन मोनोआक्साइड, क्लोराइड, नाइट्रोजन आक्साइड और मेथेन गैस निकलती है। यह ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती है। यह भी बताया कि 0.355 प्रति किलोग्राम/एमएसडब्ल्यू (एरिया) में कार्बन से 0.947 केजी/एमएसडब्ल्यू आक्सीजन वैल्यू नष्ट हो जाती है। अवर अभियंता ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर पहली जनवरी से लागू किए जा रहे ठोस कचरा प्रबंधन अधिनियम संबंधी आदेश फिलहाल प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि जानकारी हुई है। जल्द ही आदेश आने की उम्मीद है। बताया कि इस कानून के तहत 5000 से 25000 तक जुर्माना हो सकता है।
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एनजीटी ने पहली जनवरी से छह महीने के लिए पूरे देश में ठोस कचरा अधिनियम-2016 लागू करने के आदेश दिए हैं। आदेश लागू होने पर शायद यहां भी रोजाना कचरा जलाकर फैलाए जा रहे प्रदूषण पर लगाम लग सकती है।
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दो दिन पूर्व एनजीटी ने आदेश पारित किया है। आम तौर पर स्थानीय निकायों के सफाई कर्मी जगह-जगह कूड़े के ढेर आग के हवाले कर देते हैं। इसके पीछे उनका मकसद कचरे के बड़े ढेर को राख के छोटे ढेर में बदलना होता है।
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लेकिन कचरे में शामिल पालीथिन, पत्तियां व अन्य सामग्रियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण फैलाता है। बांदा में भी नगर पालिका सफाई कर्मी रोजाना सुबह जगह-जगह कूड़े ढेर जलाते पाए जाते हैं। साथ ही शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर दक्षिण में गंछा गांव के पास प्रतिदिन भारी मात्रा में शहर का कचरा डाला जा रहा है। सफाई कर्मी इसमें आग भी लगा देते हैं। पहली जनवरी से नया आदेश लागू होने के बाद शायद इस पर लगाम लगे।
पांच से 25 हजार तक जुर्माना
बांदा। उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अवर अभियंता कुंवर संतोष कुमार का कहना है कि कूड़ा या कचरा जलाने पर कार्बन मोनोआक्साइड, क्लोराइड, नाइट्रोजन आक्साइड और मेथेन गैस निकलती है। यह ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती है। यह भी बताया कि 0.355 प्रति किलोग्राम/एमएसडब्ल्यू (एरिया) में कार्बन से 0.947 केजी/एमएसडब्ल्यू आक्सीजन वैल्यू नष्ट हो जाती है। अवर अभियंता ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर पहली जनवरी से लागू किए जा रहे ठोस कचरा प्रबंधन अधिनियम संबंधी आदेश फिलहाल प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि जानकारी हुई है। जल्द ही आदेश आने की उम्मीद है। बताया कि इस कानून के तहत 5000 से 25000 तक जुर्माना हो सकता है।