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इंटरनेशनल साधु सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर, इन विषयों पर होगा चिंतन
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:05 PM IST
सार
- मैनावती मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर में 10 से 22 अक्तूबर तक होगा इंटरनेशनल साधु सम्मेलन
- इंटरनेशनल जीबीसी प्रमुख अनुतमा दास और जीबीसी भारत के प्रमुख गोपालकृष्ण गोस्वामी आंएगे
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इस्कॉन मंदिर कानपुर
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विस्तार
अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की ओर से यूपी के कानपुर स्थित इस्कॉन मंदिर में 10 से 22 अक्तूबर तक इंटरनेशनल साधु सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसमें इस्कॉन इंटरनेशनल गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) के प्रमुख अनुतमा दास और इस्कॉन इंडिया जीबीसी के प्रमुख गोपालकृष्ण गोस्वामी समेत दुनियाभर के 900 इस्कॉन मंदिरों के 250 प्रमुख भाग लेंगे। इस दौरान जनकल्याण के लिए भगवान श्रीकृष्ण के बताए उपदेशों के बारे में चिंतन किया जाएगा। यह बताया जाएगा कि जीवन कैसे जिया जाए।
देश में इस्कॉन जीबीसी के प्रमुख गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज हैं। जबकि, इस्कॉन इंटरनेशनल जीबीसी के अध्यक्ष अमेरिका के अनुतमा दास महाराज हैं। दोनों ही प्रमुख कानपुर पहली बार आएंगे। इस्कॉन मंदिर के राधा रंजन दास ने बताया कि अक्तूबर में कानपुर में पहली बार इस्कॉन इंटरनेशनल साधु सम्मेलन होगा। इसमें दुनियाभर में इस्कॉन के 900 मंदिरों के 250 प्रमुख जुटेंगे। उन्होंने बताया कि चार से पांच मंदिरों पर एक प्रमुख बनाया जाता है। ये सभी यहां गोष्ठी में भाग लेंगे। गोष्ठी में जनकल्याण पर चिंतन होगा। साथ ही भगवान कृष्ण के उपदेशों को जनकल्याण से जोड़ा जाएगा। सभी के रहने और खानपान की व्यवस्था मंदिर में ही की जाएगी। इसके अलावा सभी लोग एक दिन शहर के व्यस्त इलाके नयागंज या बिरहाना रोड में हरिनाम संकीर्तन भी करेंगे।
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देश में इस्कॉन जीबीसी के प्रमुख गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज हैं। जबकि, इस्कॉन इंटरनेशनल जीबीसी के अध्यक्ष अमेरिका के अनुतमा दास महाराज हैं। दोनों ही प्रमुख कानपुर पहली बार आएंगे। इस्कॉन मंदिर के राधा रंजन दास ने बताया कि अक्तूबर में कानपुर में पहली बार इस्कॉन इंटरनेशनल साधु सम्मेलन होगा। इसमें दुनियाभर में इस्कॉन के 900 मंदिरों के 250 प्रमुख जुटेंगे। उन्होंने बताया कि चार से पांच मंदिरों पर एक प्रमुख बनाया जाता है। ये सभी यहां गोष्ठी में भाग लेंगे। गोष्ठी में जनकल्याण पर चिंतन होगा। साथ ही भगवान कृष्ण के उपदेशों को जनकल्याण से जोड़ा जाएगा। सभी के रहने और खानपान की व्यवस्था मंदिर में ही की जाएगी। इसके अलावा सभी लोग एक दिन शहर के व्यस्त इलाके नयागंज या बिरहाना रोड में हरिनाम संकीर्तन भी करेंगे।
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इस्कॉन मंदिर कानपुर
इस्कॉन पर एक नजर
इस्कॉन की स्थापना वर्ष-1966 में न्यूयार्क (अमेरिका) में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। हरे रामा-हरे कृष्णा... संकीर्तन से इस संगठन ने कृष्ण भक्ति आंदोलन को दुनियाभर में प्रसारित किया। इस्कॉन के दुनियाभर में करोड़ों अनुयायी हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी भी हैं। इस्कॉन ने कई देशों में भव्य मंदिर और विद्यालय बनवाए हैं। साथ ही संस्था हिंदू सनातन संस्कृति का प्रचार कर रही है। भारत में बंगलूरू में इस्कॉन का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है। यह हरे कृष्णा हिल पर है। इस्कॉन के अनुयायी धर्म के चार स्तंभ दया, तपस्या, सत्य और शुद्धता हैं।
इस्कॉन की स्थापना वर्ष-1966 में न्यूयार्क (अमेरिका) में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। हरे रामा-हरे कृष्णा... संकीर्तन से इस संगठन ने कृष्ण भक्ति आंदोलन को दुनियाभर में प्रसारित किया। इस्कॉन के दुनियाभर में करोड़ों अनुयायी हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी भी हैं। इस्कॉन ने कई देशों में भव्य मंदिर और विद्यालय बनवाए हैं। साथ ही संस्था हिंदू सनातन संस्कृति का प्रचार कर रही है। भारत में बंगलूरू में इस्कॉन का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है। यह हरे कृष्णा हिल पर है। इस्कॉन के अनुयायी धर्म के चार स्तंभ दया, तपस्या, सत्य और शुद्धता हैं।