{"_id":"5bc2f3a9bdec226966334fa1","slug":"nepali-man-attempted-suicide","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्यार में खाया धोखा और फिर किस्मत से मिले 'धरती के भगवान', हैरान कर देगी नेपाल के उमेश की ये कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्यार में खाया धोखा और फिर किस्मत से मिले 'धरती के भगवान', हैरान कर देगी नेपाल के उमेश की ये कहानी
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 14 Oct 2018 02:14 PM IST
सार
जूनियर डॉक्टरों की मदद से आए नेपाली युवक के परिजन
प्रेमिका से धोखा खाने के बाद गुड़गांव में नौकरी के लिए कहकर आया था
विज्ञापन
डेमो पिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल का उमेश (23) मौत की तलाश करते करते कब जिंदगी और 'धरती के भगवानों' के करीब आ गया ये उसे खुद पता नहीं चला। प्यार में धोखा खाने के बाद उमेश बार-बार खुद को खत्म करने की कोशिश करता रहा लेकिन हर बार वह बच जाता था। रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर उसने कटने की कोशिश की तो अपना बायां हाथ और कलाई गंवा बैठा। इसके बाद भी उसकी मरने की इच्छा खत्म न हुई तो हॉस्पिटल में डॉक्टर से बार-बार जहर दे देने की गुजारिश करता रहा। आखिर धरती की भगवानों की मेहरबानी से अब उसकी जीने की इच्छा प्रबल हो गई है।
कुछ ऐसी है नेपाल के उमेश की अजीबोगरीब कहानी
कानपुर में हैलट अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की मदद से नेपाली युवक उमेश के परिजन अस्पताल आए। उसकी हालत देखकर भाई की आंखों में आंसू आ गए। डॉक्टरों को धन्यवाद देते हुए वे उमेश को लेकर लौट गए। उमेश ने इलाज के दौरान तीन बार वार्ड से निकलकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
उमेश (23) नेपाल के जिला अरगा में स्थित मोहल्ला माता रानी देव पालिका, वार्ड-5 निवासी देवीराम का बेटा है। चार दिन पहले सेंट्रल स्टेशन के पास ट्रेन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कलाई से कट गया था। सिर में भी चोट लगने की वजह से वह अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि नहीं बता पा रहा था। जीआरपी ने उसे लहूलुहान हालत में हैलट में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रग्नेश की यूनिट में भर्ती कराया था। वार्ड - 18 में इलाज के दौरान उसने दो बार अस्पताल के पीछे जीटी रोड की तरफ रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर ट्रेन से कटने की कोशिश की। राहगीरों, पुलिस की मदद से उसे दोनों बार बचाकर हैलट इमरजेंसी पहुंचा दिया गया। तीसरी बार वह ईएमओ डॉ. सुबोध से जहर मांगने लगा। जूनियर डॉक्टर अपने पास से दवाओं का बंदोबस्त कर उसका इलाज कर रहे थे।
विज्ञापन
11 अक्तूबर को देर शाम हालत में सुधार होने पर उसने अपना नाम, पता बताया। जूनियर डॉक्टरों ने उसके परिजनों को फोन कर जानकारी दी। शनिवार को उमेश का भाई गोपाल मामा के साथ हैलट आया। वह नेपाल में ही इलाज कराने की बात कह कर उसे साथ ले गए।
गुड़गांव में नौकरी करने निकला था उमेश
गोपाल ने बताया कि प्रेमिका से धोखा खाने के बाद एक हफ्ते पहले गुड़गांव में नौकरी करने की बात कह कर घर से निकला था, तब से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था। उमेश कानपुर कैसे आया, यह बात गले नहीं उतर रही है।
विज्ञापन
कुछ ऐसी है नेपाल के उमेश की अजीबोगरीब कहानी
कानपुर में हैलट अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की मदद से नेपाली युवक उमेश के परिजन अस्पताल आए। उसकी हालत देखकर भाई की आंखों में आंसू आ गए। डॉक्टरों को धन्यवाद देते हुए वे उमेश को लेकर लौट गए। उमेश ने इलाज के दौरान तीन बार वार्ड से निकलकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
विज्ञापन
उमेश (23) नेपाल के जिला अरगा में स्थित मोहल्ला माता रानी देव पालिका, वार्ड-5 निवासी देवीराम का बेटा है। चार दिन पहले सेंट्रल स्टेशन के पास ट्रेन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कलाई से कट गया था। सिर में भी चोट लगने की वजह से वह अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि नहीं बता पा रहा था। जीआरपी ने उसे लहूलुहान हालत में हैलट में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रग्नेश की यूनिट में भर्ती कराया था। वार्ड - 18 में इलाज के दौरान उसने दो बार अस्पताल के पीछे जीटी रोड की तरफ रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर ट्रेन से कटने की कोशिश की। राहगीरों, पुलिस की मदद से उसे दोनों बार बचाकर हैलट इमरजेंसी पहुंचा दिया गया। तीसरी बार वह ईएमओ डॉ. सुबोध से जहर मांगने लगा। जूनियर डॉक्टर अपने पास से दवाओं का बंदोबस्त कर उसका इलाज कर रहे थे।
विज्ञापन
11 अक्तूबर को देर शाम हालत में सुधार होने पर उसने अपना नाम, पता बताया। जूनियर डॉक्टरों ने उसके परिजनों को फोन कर जानकारी दी। शनिवार को उमेश का भाई गोपाल मामा के साथ हैलट आया। वह नेपाल में ही इलाज कराने की बात कह कर उसे साथ ले गए।
गुड़गांव में नौकरी करने निकला था उमेश
गोपाल ने बताया कि प्रेमिका से धोखा खाने के बाद एक हफ्ते पहले गुड़गांव में नौकरी करने की बात कह कर घर से निकला था, तब से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था। उमेश कानपुर कैसे आया, यह बात गले नहीं उतर रही है।