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Kanpur News: युवकों के शव घर पहुंचे तो मची चीत्कार, अलग-अलग हुआ अंतिम संस्कार

Sun, 04 May 2025 12:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sun, 04 May 2025 12:43 AM IST
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Nen akasabi ed abung da ray bangkay na saray kalangweran, walay dakel ya inmeyag tan saray unor a ritual et ginawa ya manbibiigan
पुखरायां इंद्रानगर में मृतक बीरू उर्फ छंगा के रोते बिलखते परिजन। - फोटो : संवाद
पुखरायां। पटेल चौक के पास झांसी-कानपुर हाईवे पर शुक्रवार देर रात रोडवेज बस की टक्कर से बाइक सवार तीन युवकों मौत हो गई थी। शनिवार पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचे तो परिजनों में चीत्कार मच गई। शवों से लिपट कर परिजन बिलखते रहे। शाम को तीनों के शवों का अलग अलग अंतिम संस्कार करा दिया।
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पुखरायां कस्बा के इंद्रानगर निवासी के अनुराग (18) पड़ोसी बीरू उर्फ छंगा (20) के शव शुक्रवार की शाम एक साथ घर पहुंचे तो परिजनों में चीखपुकार मच गई। अनुराग की मां श्रीदेवी, पिता राकेश, भाई आदेश, नितिन, शनि कौशल का हाल बेहाल हो गया। मृतक बीरू उर्फ छंगा की मां गुड्डन, बहन दीपा, निशा और प्रीना रोती हाल बेहाल रहा। पड़ोस के लोग पीड़ित परिवार के लोगों को ढांढस बंधाते रहे।
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वहीं, अर्जुन (22) का शव हांसेमऊ पहुंचा तो मां मालती, बहन लक्ष्मी, भाई संजय बिलखते रहे। परिवार व पड़ोस के लोगों ने बताया कि मृतक तीनों युवक आपस में मित्र थे। तीनों मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। इधर हांसेमऊ निवासी छंगा के शव का अंतिम संस्कार दुर्वाषा आश्रम स्थित सेंगुर नदी तट घाट और पुखरायां इंद्रानगर निवासी दोनों युवकों के शवों का कालपी यमुना घाट में अंतिम संस्कार किया गया। कोतवाल अंजन कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। बस को कब्जे में लिया गया है।
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तीन बेटों में दो की दुर्घटना में हुई मौत
हांसेमऊ निवासी मृतक अर्जुन की मां मालती ने बताया कि पति की मौत पहले हो चुकी है। एक बेटी है जिसकी शादी कर दी। तीन बेटे थे जिनके सहारे जीवन यापन कर रही थी। बड़ा बेटा ट्रक में खलासी था जिसकी बारा जोड़ के पास दुर्घटना में मौत हो गई थी। सबसे छोटा अर्जुन था जिसकी गुरुवार की शाम दुर्घटना में मौत हो गई। बीच का एक बेटा संजय है। हादसे को लेकर वह बदहवाश नजर आई।

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परिवार का अकेला सहारा था छंगा
बीरू उर्फ छंगा की के पिता की मौत हो चुकी है। तीन बहनों के बीच वह अकेला भाई था। जो मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। मां गुड्डन व बहनें यह कहकर बिलखती रहीं कि अब परिवार का भरण पोषण कौन करेगा। कौन देखभाल करेगा। परिवार का एक आसरा था वह भी अब नहीं है।
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