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बीमारी से भाई की मौत के बाद 7 साल की उम्र में बहन ने किया था डॉक्टर बनने का प्रण, अब होगा सपना पूरा
Thu, 06 Jun 2019 08:51 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 06 Jun 2019 08:51 PM IST
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माता पिता के साथ माधवी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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नीट की परीक्षा में कन्नौज जिले की बेटी ने 700 में 601 अंक हासिल किए हैं। छात्रा का बचपन से ही डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने का सपना था। काजी टोला निवासी माधवी सिंह पुत्री रणधीर सिंह ने नीट परीक्षा में 601 अंक लाकर जिले का नाम रोशन किया है। माधवी के पिता की फर्नीचर की दुकान है। मां गृहणी हैं। बड़ी बहन शताक्षी सिंह एक्सिस बैंक कन्नौज में कार्यरत है।
माधवी ने अपनी कामयाबी का श्रेय पिता व माता सरिता सिंह को दिया है। माधवी ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड से मानस्थली पब्लिक स्कूल बरेली से हाईस्कूल की परीक्षा 84 व जेपीएस इंटर कालेज कन्नौज से इंटरमीडिएट की परीक्षा 80 फीसदी अंक के साथ पास की थी। इसके बाद तैयारी के लिए कोटा चली गईं। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से नाता तोड़ लिया। सुबह पांच से 2 बजे तक कोचिंग रहती थी।
इसके अलावा वह कमरे में करीब छह घंटे पढ़ाई करती थीं। पढ़ने से ऊबने पर पौराणिक कथाएं व अन्य किताबें पढ़ती थीं। माधवी सिंह ने बताया कि उनका डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही था। वह अपने बड़े भाई के साथ डॉक्टर की किट के साथ खेला करती थीं। जब वह कक्षा दो में थीं तो 2007 में भाई वरुण सिंह वायरल फीवर का शिकार हो गया था।
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परिवार की लाख कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। तभी से डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का संकल्प ले लिया था। एक्सीडेंट में घायल हो जाने पर माधवी ने नीट परीक्षा वॉकर के सहारे केंद्र पर जाकर दी थी। शहर की बेटी की कामयाबी पर रघुराज सिंह बघेल, धीरेंद्र सिंह बघेल, शिवकुमार सिंह चंदेल, ब्रजेंद्र सिंह तोमर, देवेश प्रताप सिंह, अरविंद सिंह सहित अन्य लोगों ने घर पहुंचकर बधाई दी।
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माधवी ने अपनी कामयाबी का श्रेय पिता व माता सरिता सिंह को दिया है। माधवी ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड से मानस्थली पब्लिक स्कूल बरेली से हाईस्कूल की परीक्षा 84 व जेपीएस इंटर कालेज कन्नौज से इंटरमीडिएट की परीक्षा 80 फीसदी अंक के साथ पास की थी। इसके बाद तैयारी के लिए कोटा चली गईं। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से नाता तोड़ लिया। सुबह पांच से 2 बजे तक कोचिंग रहती थी।
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इसके अलावा वह कमरे में करीब छह घंटे पढ़ाई करती थीं। पढ़ने से ऊबने पर पौराणिक कथाएं व अन्य किताबें पढ़ती थीं। माधवी सिंह ने बताया कि उनका डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही था। वह अपने बड़े भाई के साथ डॉक्टर की किट के साथ खेला करती थीं। जब वह कक्षा दो में थीं तो 2007 में भाई वरुण सिंह वायरल फीवर का शिकार हो गया था।
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परिवार की लाख कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। तभी से डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का संकल्प ले लिया था। एक्सीडेंट में घायल हो जाने पर माधवी ने नीट परीक्षा वॉकर के सहारे केंद्र पर जाकर दी थी। शहर की बेटी की कामयाबी पर रघुराज सिंह बघेल, धीरेंद्र सिंह बघेल, शिवकुमार सिंह चंदेल, ब्रजेंद्र सिंह तोमर, देवेश प्रताप सिंह, अरविंद सिंह सहित अन्य लोगों ने घर पहुंचकर बधाई दी।