{"_id":"6ac943fc16757c538f0a0547","slug":"navratri-from-11th-maa-durga-will-come-riding-on-an-elephant-kanpur-news-c-220-1-ka21001-150241-2026-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: 11 से नवरात्र, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: 11 से नवरात्र, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
Sat, 10 Oct 2026 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:13 AM IST
विज्ञापन
कानपुर देहात। 11 अक्तूबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। मां भगवती की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र इस बार विशेष धार्मिक संयोग लेकर आ रहा है। मान्यता के अनुसार रविवार से नवरात्र का शुभारंभ होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। इसे वर्षा, अन्न-धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
इस बार 10 दिनों तक नवरात्र की आराधना होगी, जबकि अष्टमी तिथि दो दिन रहने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रियंक दीक्षित ने बताया कि इस बार भक्तों को नौ के बजाय 10 दिन तक मां भगवती की आराधना और व्रत का अवसर मिलेगा। अष्टमी तिथि भी दो दिन रहने के कारण नवरात्र का यह संयोग विशेष माना जा रहा है। वहीं, रूरा निवासी आचार्य महेश तिवारी ने बताया कि नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की भी आराधना की जाती है। 19 अक्तूबर को श्री दुर्गाष्टमी, 20 अक्तूबर को महानवमी और इसी दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
...............
घटस्थापना के लिए ये रहेंगे शुभ मुहूर्त
पंडित प्रियंक दीक्षित ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करना शुभ माना गया है। कन्या लग्न में सूर्योदय से सुबह 6:51 बजे तक घटस्थापना का समय रहेगा। इसके बाद वृश्चिक स्थिर लग्न में सुबह 9:15 से 11:30 बजे तक शुभ समय बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा। इस दौरान घटस्थापना करना विशेष शुभ माना गया है।
विज्ञापन
...............
जौं को माना जाता है ब्रह्म स्वरूप
आचार्य महेश तिवारी के अनुसार नवरात्र में जौ बोने की भी परंपरा है। जौ को ब्रह्म स्वरूप और पृथ्वी की पहली फसल माना गया है। वहीं घटस्थापना में कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। कहा कि घटस्थापना और पूजा के लिए कलश, गंगाजल, रोली, मौली, सुपारी, लौंग-इलायची, पान, दूर्वा, सिक्के, पंचरत्न, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, फूल-माला, फल और पंचमेवा सहित अन्य सामग्री की आवश्यकता होगी। पूजा के दौरान अखंड ज्योति भी जलाई जाएगी। घी का दीपक जलाकर उसका विधि-विधान से पूजन किया जाता है।
विज्ञापन
इस बार 10 दिनों तक नवरात्र की आराधना होगी, जबकि अष्टमी तिथि दो दिन रहने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रियंक दीक्षित ने बताया कि इस बार भक्तों को नौ के बजाय 10 दिन तक मां भगवती की आराधना और व्रत का अवसर मिलेगा। अष्टमी तिथि भी दो दिन रहने के कारण नवरात्र का यह संयोग विशेष माना जा रहा है। वहीं, रूरा निवासी आचार्य महेश तिवारी ने बताया कि नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की भी आराधना की जाती है। 19 अक्तूबर को श्री दुर्गाष्टमी, 20 अक्तूबर को महानवमी और इसी दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
विज्ञापन
...............
घटस्थापना के लिए ये रहेंगे शुभ मुहूर्त
पंडित प्रियंक दीक्षित ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करना शुभ माना गया है। कन्या लग्न में सूर्योदय से सुबह 6:51 बजे तक घटस्थापना का समय रहेगा। इसके बाद वृश्चिक स्थिर लग्न में सुबह 9:15 से 11:30 बजे तक शुभ समय बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा। इस दौरान घटस्थापना करना विशेष शुभ माना गया है।
विज्ञापन
...............
जौं को माना जाता है ब्रह्म स्वरूप
आचार्य महेश तिवारी के अनुसार नवरात्र में जौ बोने की भी परंपरा है। जौ को ब्रह्म स्वरूप और पृथ्वी की पहली फसल माना गया है। वहीं घटस्थापना में कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। कहा कि घटस्थापना और पूजा के लिए कलश, गंगाजल, रोली, मौली, सुपारी, लौंग-इलायची, पान, दूर्वा, सिक्के, पंचरत्न, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, फूल-माला, फल और पंचमेवा सहित अन्य सामग्री की आवश्यकता होगी। पूजा के दौरान अखंड ज्योति भी जलाई जाएगी। घी का दीपक जलाकर उसका विधि-विधान से पूजन किया जाता है।