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आईआईटी में बनेगा राष्ट्रीय भूमंडल शोध केंद्र, मिला 21.14 करोड़ का अनुदान
Wed, 21 Aug 2019 01:47 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 21 Aug 2019 01:47 PM IST
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आईआईटी कानपुर
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर में राष्ट्रीय भूमंडल शोध केंद्र बनाया जाएगा। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) ने कैंपस में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जियोडेसी (भूमंडल मापने का यंत्र) की स्थापना के लिए 21.14 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है।
इस सेंटर के जरिये पृथ्वी विज्ञान, भूमंडल पर कई शोध कार्य हो सकेंगे। पृथ्वी के आकार का मापन भी होगा। इसके अलावा देश भर में पानी के स्टोरेज का स्थान, उसकी स्थिति का भी सेटेलाइट मैपिंग के जरिये पता किया जाएगा। यही नहीं पृथ्वी पर होने वाले विभिन्न बदलावों पर अध्ययन करने के लिए हाइटेक लेबोरेट्री की स्थापना भी यहां की जाएगी। इसके अलावा जियोड मॉडलिंग, हाईट रेफरेंस सिस्टम, पोलर मोशन, क्रस्टल डिफॉरमेशन पर भी यहां काम होगा।
केंद्र प्रमुख सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर ओंकार दीक्षित को बनाए गए हैं जबकि प्रो. बालाजी देवराजू सहायक होंगे। इसी के साथ यह देश का दूसरा ऐसा संस्थान भी बन जाएगा जहां जियोडेसी पर वृहद् स्तर पर शोध कार्य होंगे। यह प्रोजेक्ट पांच साल का होगा। इसी साल से इसकी शुरुआत हो गई है।
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इस सेंटर के जरिये पृथ्वी विज्ञान, भूमंडल पर कई शोध कार्य हो सकेंगे। पृथ्वी के आकार का मापन भी होगा। इसके अलावा देश भर में पानी के स्टोरेज का स्थान, उसकी स्थिति का भी सेटेलाइट मैपिंग के जरिये पता किया जाएगा। यही नहीं पृथ्वी पर होने वाले विभिन्न बदलावों पर अध्ययन करने के लिए हाइटेक लेबोरेट्री की स्थापना भी यहां की जाएगी। इसके अलावा जियोड मॉडलिंग, हाईट रेफरेंस सिस्टम, पोलर मोशन, क्रस्टल डिफॉरमेशन पर भी यहां काम होगा।
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केंद्र प्रमुख सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर ओंकार दीक्षित को बनाए गए हैं जबकि प्रो. बालाजी देवराजू सहायक होंगे। इसी के साथ यह देश का दूसरा ऐसा संस्थान भी बन जाएगा जहां जियोडेसी पर वृहद् स्तर पर शोध कार्य होंगे। यह प्रोजेक्ट पांच साल का होगा। इसी साल से इसकी शुरुआत हो गई है।
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देश का दूसरा जीएनएसएस स्टेशन भी स्थापित होगा
इस सेंटर में देश का दूसरा ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम यानी जीएनएसएस स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा। इस स्टेशन के जरिये प्राकृतिक आपदा, भूकंप, मौसम में बदलाव आदि की तत्काल प्रभाव से जानकारी मिल जाएगी। इसकी मदद से सरकार पहले से ही सतर्क हो सकेगी।
डीएसटी ने संस्थान को नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जियोडेसी के लिए 21.14 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके जरिये पृथ्वी विज्ञान, भूमंडल पर कई तरह के शोध कार्य पूरे हो सकेंगे। वॉटर लेवल आदि पर भी काम किया जा सकेगा।
- प्रो. अभय करंदीकर निदेशक, आईआईटी कानपुर
इस सेंटर में देश का दूसरा ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम यानी जीएनएसएस स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा। इस स्टेशन के जरिये प्राकृतिक आपदा, भूकंप, मौसम में बदलाव आदि की तत्काल प्रभाव से जानकारी मिल जाएगी। इसकी मदद से सरकार पहले से ही सतर्क हो सकेगी।
डीएसटी ने संस्थान को नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जियोडेसी के लिए 21.14 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके जरिये पृथ्वी विज्ञान, भूमंडल पर कई तरह के शोध कार्य पूरे हो सकेंगे। वॉटर लेवल आदि पर भी काम किया जा सकेगा।
- प्रो. अभय करंदीकर निदेशक, आईआईटी कानपुर