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राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के तीन दिवसीय राष्ट्रीय महाधिवेशन में श्रम कानूनों में बदलाव का होगा विरोध
Mon, 11 Nov 2019 10:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 11 Nov 2019 10:50 PM IST
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राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) का त्रिवर्षीय राष्ट्रीय महाधिवेशन शुरु
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के शहर के पहले त्रिवर्षीय राष्ट्रीय महाधिवेशन की शुरुआत सोमवार को हुई। तीन दिवसीय महाधिवेशन के पहले दिन चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय के सभागार में राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद डॉ. जी. संजीवा रेड्डी की अध्यक्षता में संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की 301वीं बैठक हुई।
कार्यसमिति में मुनाफे में चल रहीं सरकारी, अर्धसरकारी संस्थाओं को बेचने की कड़े शब्दों में निंदा की गई। श्रम कानूनों पर सरकार की ओर से लिए जा रहे एकतरफा बदलाव का विरोध करने पर सहमति बनी। सभी महासंघों को जोड़कर देश भर में इसके खिलाफ आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया।
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कार्यसमिति में मुनाफे में चल रहीं सरकारी, अर्धसरकारी संस्थाओं को बेचने की कड़े शब्दों में निंदा की गई। श्रम कानूनों पर सरकार की ओर से लिए जा रहे एकतरफा बदलाव का विरोध करने पर सहमति बनी। सभी महासंघों को जोड़कर देश भर में इसके खिलाफ आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया।
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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक सिंह ने देश में संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों के हो रहे निजीकरण के खिलाफ संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। इंटक के सम्मेलन में भाग लेने के लिए मंगलवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शहर आएंगे। कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं के भी पहुंचने की संभावना है।
कार्यसमिति में रेड्डी ने संगठन की आय-व्यय का ब्योरा रखा। बताया कि वर्तमान में पहली बार इंटक के नाम पर 25 करोड़ रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) किया गया है। संगठन के महामंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। बैठक में पूर्व सांसद अलका क्षत्रिय, राष्ट्रीय सचिव एचएन तिवारी, प्रदेश उपाध्यक्ष पीएस बाजपेई, प्रदेश सचिव विनोद तिवारी, त्रिलोकी व्यास, आशुतोष तिवारी, राजेश कुमार शुक्ला, सिद्धनाथ तिवारी, उमेश कुमार शुक्ला समेत देश भर से आए प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यसमिति में रेड्डी ने संगठन की आय-व्यय का ब्योरा रखा। बताया कि वर्तमान में पहली बार इंटक के नाम पर 25 करोड़ रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) किया गया है। संगठन के महामंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। बैठक में पूर्व सांसद अलका क्षत्रिय, राष्ट्रीय सचिव एचएन तिवारी, प्रदेश उपाध्यक्ष पीएस बाजपेई, प्रदेश सचिव विनोद तिवारी, त्रिलोकी व्यास, आशुतोष तिवारी, राजेश कुमार शुक्ला, सिद्धनाथ तिवारी, उमेश कुमार शुक्ला समेत देश भर से आए प्रतिनिधि शामिल रहे।
श्रमिक हितों के लिए नई नीतियां बनाने का 12 सूत्री प्रस्ताव पास
कार्यसमिति से पूर्व पत्रकारों से वार्ता रेड्डी ने कहा कि भारत समेत कुछ देशों में सरकार और कारपोरेट जगत का गठजोड़ हो गया है। इस कारण ट्रेड यूनियन कमजोर हो रही हैं। हालिया कुछ वर्षों में एक करोड़ लोग बेरोजगार हुए हैं। खुद सरकार ने 90 लाख लोगों के बेरोजगार होने की बात मानी है। जीवनयापन का ढांचा गड़बड़ा गया है।
केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देश भर की 12 ट्रेड यूनियनों को इंटक के इस सम्मेलन से जोड़ा गया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ भी निजीकरण के खिलाफ है। वह खुद इंटक से साथ आना चाहता है, लेकिन हिचक रहा है। केंद्र सरकार एकतरफा फैसले लेकर श्रम कानून बदलने जा रही है। वह अंतरराष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कंफरडेशन के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।
इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार की कोशिशों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) में शिकायत दर्ज कराई है। इंटक के 3.30 करोड़ सदस्य हैं। सभी मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये हो, रोजगार बढ़ाए जाएं, निजीकरण को रोका जाए आदि 12 सूत्री मांगों का प्रस्ताव कार्यसमिति में पास कराया गया है।
कार्यसमिति से पूर्व पत्रकारों से वार्ता रेड्डी ने कहा कि भारत समेत कुछ देशों में सरकार और कारपोरेट जगत का गठजोड़ हो गया है। इस कारण ट्रेड यूनियन कमजोर हो रही हैं। हालिया कुछ वर्षों में एक करोड़ लोग बेरोजगार हुए हैं। खुद सरकार ने 90 लाख लोगों के बेरोजगार होने की बात मानी है। जीवनयापन का ढांचा गड़बड़ा गया है।
केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देश भर की 12 ट्रेड यूनियनों को इंटक के इस सम्मेलन से जोड़ा गया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ भी निजीकरण के खिलाफ है। वह खुद इंटक से साथ आना चाहता है, लेकिन हिचक रहा है। केंद्र सरकार एकतरफा फैसले लेकर श्रम कानून बदलने जा रही है। वह अंतरराष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कंफरडेशन के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।
इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार की कोशिशों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) में शिकायत दर्ज कराई है। इंटक के 3.30 करोड़ सदस्य हैं। सभी मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये हो, रोजगार बढ़ाए जाएं, निजीकरण को रोका जाए आदि 12 सूत्री मांगों का प्रस्ताव कार्यसमिति में पास कराया गया है।