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डॉक्टर्स डे: मरीजों को बचाने के लिए दांव पर लगा दी जान, धरती के इन 15 भगवानों को लील गया कोरोना
Thu, 01 Jul 2021 12:33 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 01 Jul 2021 12:33 PM IST
सार
हम ऐसे कुछ डॉक्टरों की मिसाल भी पेश कर रहे हैं जो कोरोना से लड़े और झुके नहीं, लोगों को बचाने में जान लगा दी। आईएमए के 15 डॉक्टरों ने कोरोना से जान गंवाई है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के 50 डॉक्टर संक्रमित भी हुए।
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डॉक्टर्स डे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना की दूसरी लहर में डॉक्टरों ने अपनी जान पर खेलकर मरीजों की जान बचाई है। इंसानियत की मिसाल पेश करने वाले ऐसे डॉक्टरों को हम डॉक्टर्स डे पर सलाम करते हैं। जो डॉक्टर कोरोना के साथ जंग में लड़ते हुए शहीद हुए हैं, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
हम ऐसे कुछ डॉक्टरों की मिसाल भी पेश कर रहे हैं जो कोरोना से लड़े और झुके नहीं, लोगों को बचाने में जान लगा दी। आईएमए के 15 डॉक्टरों ने कोरोना से जान गंवाई है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के 50 डॉक्टर संक्रमित भी हुए। अब कोरोना की तीसरी लहर से जूझने की तैयारी है।
मौत के मुंह में जाने से पहले तक रोगियों को देखा
कानपुर के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरके महाजन अपने आखिरी वक्त तक रोगियों को देखते रहे। कुछ परिवार ऐसे हैं जिनकी तीन पीढ़ियों का इलाज उन्होंने किया था। काकादेव स्थित अपने आवास पर रोगियों को देखते रहे। कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के एक दिन पहले तक उन्होंने बालरोगियों का इलाज किया था। इसके बाद हालत बिगड़ी और आखिर में काल ने उन्हें छीन लिया।
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हम ऐसे कुछ डॉक्टरों की मिसाल भी पेश कर रहे हैं जो कोरोना से लड़े और झुके नहीं, लोगों को बचाने में जान लगा दी। आईएमए के 15 डॉक्टरों ने कोरोना से जान गंवाई है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के 50 डॉक्टर संक्रमित भी हुए। अब कोरोना की तीसरी लहर से जूझने की तैयारी है।
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मौत के मुंह में जाने से पहले तक रोगियों को देखा
कानपुर के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरके महाजन अपने आखिरी वक्त तक रोगियों को देखते रहे। कुछ परिवार ऐसे हैं जिनकी तीन पीढ़ियों का इलाज उन्होंने किया था। काकादेव स्थित अपने आवास पर रोगियों को देखते रहे। कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के एक दिन पहले तक उन्होंने बालरोगियों का इलाज किया था। इसके बाद हालत बिगड़ी और आखिर में काल ने उन्हें छीन लिया।
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खुद संक्रमित थे, रोगियों की सेवा करते रहे
हैलट के बालरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यशवंत राव रोगियों का इलाज करते-करते खुद कोरोना संक्रमित हो गए। उन्हें हैलट के न्यूरो साइंसेज के लेवल थ्री कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया था। वह जिस तल पर भर्ती थे वहां दूसरे कोरोना रोगियों की सेवा करते रहे। वह बुजुर्ग रोगियों को खाना तक खिलाते थे। कभी-कभी पोंछा भी लगा देते थे। रोगियों को समय पर दवा भी खिलाते थे।
खुद कोरोना से लड़े, दूसरों को बचाया, अपनों को गंवाया भी
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला दो बार कोरोना की चपेट में आए। पहली बार जूझ के बाहर निकले। वैक्सीन लगवाई। इसके बाद फिर कोरोना की चपेट में आ गए। खुद बीमार रह कर कोरोना रोगियों का ध्यान रखते रहे। उनका छोटा भाई भी भर्ती था। उन्होंने कई रोगियों की जान बचा ली। ज्यादातर रोगी जंग जीत गए लेकिन उनके भाई की मौत हो गई। डॉ. काला बताते हैं कि कोरोना काल में उन्होंने अपने छह परिजनों को गंवाया है।
जब सीनियर चपेट में आए तो जूनियरों ने संभाला मोर्चा
कोरोना काल की पीक पर हैलट ने वो वक्त भी देखा है जब कोरोना ने पूरी व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की। हालत यह थी कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरबी कमल, उप प्राचार्य डॉ . रिचा गिरि, हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना और मेटरनिटी विंग के प्रभारी डॉ. सौरभ अग्रवाल समेत लगभग सभी सीनियर कोरोना की चपेट में आ गए थे।
हैलट के बालरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यशवंत राव रोगियों का इलाज करते-करते खुद कोरोना संक्रमित हो गए। उन्हें हैलट के न्यूरो साइंसेज के लेवल थ्री कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया था। वह जिस तल पर भर्ती थे वहां दूसरे कोरोना रोगियों की सेवा करते रहे। वह बुजुर्ग रोगियों को खाना तक खिलाते थे। कभी-कभी पोंछा भी लगा देते थे। रोगियों को समय पर दवा भी खिलाते थे।
खुद कोरोना से लड़े, दूसरों को बचाया, अपनों को गंवाया भी
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला दो बार कोरोना की चपेट में आए। पहली बार जूझ के बाहर निकले। वैक्सीन लगवाई। इसके बाद फिर कोरोना की चपेट में आ गए। खुद बीमार रह कर कोरोना रोगियों का ध्यान रखते रहे। उनका छोटा भाई भी भर्ती था। उन्होंने कई रोगियों की जान बचा ली। ज्यादातर रोगी जंग जीत गए लेकिन उनके भाई की मौत हो गई। डॉ. काला बताते हैं कि कोरोना काल में उन्होंने अपने छह परिजनों को गंवाया है।
जब सीनियर चपेट में आए तो जूनियरों ने संभाला मोर्चा
कोरोना काल की पीक पर हैलट ने वो वक्त भी देखा है जब कोरोना ने पूरी व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की। हालत यह थी कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरबी कमल, उप प्राचार्य डॉ . रिचा गिरि, हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना और मेटरनिटी विंग के प्रभारी डॉ. सौरभ अग्रवाल समेत लगभग सभी सीनियर कोरोना की चपेट में आ गए थे।
डॉ. रिचा गिरि का पूरा परिवार कोरोना की चपेट में था। ऐसे में क्वारंटीन में रह रहे सीनियरों से मार्ग दर्शन लेकर जूनियरों ने मोर्चा संभाल लिया। आधा स्टाफ बीमार और आधा काम में जूूझ गया। इनकी मेहनत के बदौलत बहुत से परिवार खुश हैं, उनके परिजन ठीक होकर साथ रह रहे हैं।
आईएमए के इन 15 डाक्टरों को कोरोना ने छीना
- डॉ. एसी शुक्ला
- डॉ. ईश्वरचंद्र खरे
- डॉ. बीके सिंघनिया
- डॉ. सावित्री सिंघानिया
- डॉ. गुलाब अग्रवाल
- डॉ. अजीत कुमार मथुरिया
- डॉ. पीसी गुप्ता
- डॉ. एसबी मेहरोत्रा
- डॉ.आरपी तिवारी
- डॉ. एनएस दीक्षित
-डॉ. एससी बाधवानी
- डॉ. रामनरेश गुप्ता
- डॉ. विजय कुमार सिंह
- डॉ. निखिल कुमार
- डॉ आरके महाजन
आईएमए के इन 15 डाक्टरों को कोरोना ने छीना
- डॉ. एसी शुक्ला
- डॉ. ईश्वरचंद्र खरे
- डॉ. बीके सिंघनिया
- डॉ. सावित्री सिंघानिया
- डॉ. गुलाब अग्रवाल
- डॉ. अजीत कुमार मथुरिया
- डॉ. पीसी गुप्ता
- डॉ. एसबी मेहरोत्रा
- डॉ.आरपी तिवारी
- डॉ. एनएस दीक्षित
-डॉ. एससी बाधवानी
- डॉ. रामनरेश गुप्ता
- डॉ. विजय कुमार सिंह
- डॉ. निखिल कुमार
- डॉ आरके महाजन