राष्ट्रीय देवदूत दिवस विशेष: सेवा की मिसाल बनीं देवी राधिके जी, रायपुर में बनाएंगी किशोरी गुरुकुलम, पढ़ें डिटेल
Kanpur News: देवी राधिके जी ने मात्र 14 वर्ष की आयु से ही समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया है। अब बालिकाओं के लिए निःशुल्क शिक्षा के लिए किशोरी गुरुकुलम की शुरुआत कर रही हैं।
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राष्ट्रीय देवदूत दिवस पर हम बात करेंगे उस सच्चे समर्पण की जो न उम्र देखता है न लाभ। मूल रूप से नरवल में जन्मी देवी राधिके जी ने मात्र 14 वर्ष की आयु से ही अपना जीवन बुजुर्गों और जनमानस की सेवा में लगा दिया है। बी-टेक कम्यूटर साइंस की पढ़ाई छोड़कर सेवा का मार्ग चुना और तब से आज तक छह वर्षों से निरंतर बुजुर्गों की सेवा में समर्पित हैं।
सरसौल ब्लॉक के रायपुर नरवल मार्ग पर स्थित किशोरी कृपा आश्रम में निःस्वार्थ भाव से वृद्धों को भोजन, वस्त्र और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। आश्रम में दस गायों की सेवा भी नियमित रूप से होती है और हर दिन का हर क्षण जनहित में समर्पित रहता है। देवी राधिके जी न केवल बुजुर्गों के लिए बल्कि बालिकाओं के भविष्य को भी संवारने की दिशा में कार्यरत हैं।
आत्मनिर्भर और संस्कारित बन सकेंगी बालिकाएं
देवी राधिके ने बताया कि दिसंबर माह से किशोरी गुरुकुलम नामक पहल के माध्यम से वे निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था शुरू कर रही हैं, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ गुरुकुल प्रणाली के संस्कार भी दिए जाएंगे। बालिकाओं को भोजन, वस्त्र और शास्त्रों की जानकारी के साथ पूजा पद्धति की शिक्षा भी दी जाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर और संस्कारित बन सकें।
पिता भी कर रहे हैं भरपूर सहयोग
देवी राधिके अपनी दिनचर्या महाभगवत कथा,सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में गुजार रही है। उनके इस नेक कार्य में पिता आनंद चिन्मय भरपूर सहयोग भी कर रहे है। ग्रामीणों ने कहा ऐसे लोग जो बिना किसी लालच बिना किसी प्रचार के समाज के लिए जीते हैं, वही वास्तव में देवदूत कहलाते हैं। राष्ट्रीय देवदूत दिवस के अवसर पर देवी राधिके जैसे व्यक्तित्व को नमन है, जिन्होंने समाज की आत्मा को जीवित रखते हुए सेवा को अपना धर्म मान रही हैं।