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UP: बांदा की बेटी को बचाने में मुस्लिम धर्म गुरु भी आए आगे, बोले- शरई कानून में शहजादी को मिल सकती है माफी
Sat, 14 Sep 2024 06:35 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 14 Sep 2024 06:35 PM IST
सार
बांदा की रहने वाली शहजादी को दुबई में फांसी की सजा सुनाई गई है। 21 सितंबर को शहजादी को दुबई में फांसी दी जाएगी। शहजादी को बचाने के लिए मुस्लिम धर्म गुरु भी सामने आए हैं।
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दुबई जेल में बंद शहजादी का मामला
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बांदा जिले में मटौंध के गोयरा मुगली की शहजादी को मृत्युदंड से बचाने के लिए धर्म गुरु भी सामने आ गए हैं। इन लोगों ने भारत सरकार से मांग की है कि वह बेटी की जान बचाने को संयुक्त अरब अमीरात की हुकूमत से बात करें। किसी बेकसूर को मृत्युदंड नहीं होना चाहिए।
भारत सरकार करे अरब हुकूमत से बात
नवाबी जामा मस्जिद और ईदगाह के मुतावल्ली/अध्यक्ष डॉ. शेख सादी जमा का कहना है कि दुबई की अदालत ने शहजादी को बच्चे की कथित हत्या के जुर्म में शरई कानून के तहत सजाए मौत सुना दी है। शहजादी के बेकसूर होने के उसके पिता और परिजनों ने जो तथ्य गए हैं, उनके आधार पर भारत सरकार को संयुक्त अरब अमीरात की सरकार से बात करके शहजादी का मृत्युदंड रुकवाना चाहिए। शहजादी को उसके माता-पिता को वापस किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाना चाहिए। उधर, शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) का कहना है कि दुबई हुकुमत ने अगर शरई कानून के तहत शहजादी को सजाए मौत की सजा दी है तो कुछ शरई शर्तों को पूरा करके सज़ा माफ भी कराई जा सकती है। शहजादी के बूढ़े मां-बाप और उनकी हमदर्दी में कोशिशें कर रहे तमाम सियासी नुमाइंदों, संगठनों, वकीलों वगैरह के जज्बात की कद्र करते हुए अरब हुकूमत को फैसला लेना चाहिए। भारत की हुकूमत को इसके लिए भरपूर कदम उठाने चाहिए।
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भारत सरकार करे अरब हुकूमत से बात
नवाबी जामा मस्जिद और ईदगाह के मुतावल्ली/अध्यक्ष डॉ. शेख सादी जमा का कहना है कि दुबई की अदालत ने शहजादी को बच्चे की कथित हत्या के जुर्म में शरई कानून के तहत सजाए मौत सुना दी है। शहजादी के बेकसूर होने के उसके पिता और परिजनों ने जो तथ्य गए हैं, उनके आधार पर भारत सरकार को संयुक्त अरब अमीरात की सरकार से बात करके शहजादी का मृत्युदंड रुकवाना चाहिए। शहजादी को उसके माता-पिता को वापस किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाना चाहिए। उधर, शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) का कहना है कि दुबई हुकुमत ने अगर शरई कानून के तहत शहजादी को सजाए मौत की सजा दी है तो कुछ शरई शर्तों को पूरा करके सज़ा माफ भी कराई जा सकती है। शहजादी के बूढ़े मां-बाप और उनकी हमदर्दी में कोशिशें कर रहे तमाम सियासी नुमाइंदों, संगठनों, वकीलों वगैरह के जज्बात की कद्र करते हुए अरब हुकूमत को फैसला लेना चाहिए। भारत की हुकूमत को इसके लिए भरपूर कदम उठाने चाहिए।
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दिल्ली में दुबई दूतावास के सामने देंगे धरना
बुंदेलखंड इंसाफ सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष एएस नोमानी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया कि शहजादी को मृत्युदंड बचाने के लिए दुबई दूतावास के सामने धरना दिया जाएगा। कहा कि भारत सरकार को शहजादी को मृत्युदंड से बचाने के लिए बात करनी चाहिए, लेकिन धर्म जाति के आधार पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार कानों में तेल डाले बैठी है। 21 सितंबर से पहले शहजादी को इंसाफ न मिला तो सेना दिल्ली में दुबई दूतावास कार्यालय में राजदूत का घेराव कर धरना देगी।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष एएस नोमानी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया कि शहजादी को मृत्युदंड बचाने के लिए दुबई दूतावास के सामने धरना दिया जाएगा। कहा कि भारत सरकार को शहजादी को मृत्युदंड से बचाने के लिए बात करनी चाहिए, लेकिन धर्म जाति के आधार पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार कानों में तेल डाले बैठी है। 21 सितंबर से पहले शहजादी को इंसाफ न मिला तो सेना दिल्ली में दुबई दूतावास कार्यालय में राजदूत का घेराव कर धरना देगी।