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Kanpur News: एमएसएमई खाली हाथ, रिफंड प्रक्रिया में बदलाव न होने से उद्यमी निराश
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कानपुर। आईआईए भवन दादनगर में उद्यमियों ने केंद्र सरकार के बजट पर चर्चा की। कहा कि बजट में एमएसएमई के लिए उम्मीद के अनुरूप कुछ खास राहत नहीं दी गई है। उद्यमियों को रिफंड प्रक्रिया में बदलाव होने की उम्मीद थी लेकिन इस पर वित्तमंत्री ने कोई चर्चा नहीं हुई। युवा और महिला उद्यमिता को भी प्रोत्साहित नहीं किया गया जबकि पिछले साल प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया गया था। उद्यमियों ने बताया कि मैन्यूफैक्चरिंग को कुछ खास नहीं दिया गया।
बजट विदेश व्यापार को आकर्षित करने के लिए है। टैरिफ लगने के बाद देश व्यापार में कहीं न कहीं दिक्कत आई थीं लेकिन हमने अपने जीडीपी के लक्ष्य को पूरा किया। कानपुर के ओडीओपी के दो उत्पाद लेदर व टेक्सटाइल है। इन्हें बजट में सहूलियत दी गई हैं। दोनों सेक्टरों में छाई मंदी को दूर करने के लिए उपाय किए गए हैं। बजट संतुलित है। एमएसएमई के लिए बजट बहुत सहूलियत भरा नहीं है लेकिन जो प्रावधान किए गए हैं, उनका असर दिखाई पड़ेगा।
सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
बजट में एमएसएमई को कुछ खास नहीं मिल पाया है। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट फंस गई है। उसके रिफंड की प्रक्रिया में कुछ प्रावधान की उम्मीद थी लेकिन इसमें कुछ नहीं बोला गया। इस वजह से उद्यमी का लंबा निवेश फंस जाता है। इससे व्यापार में परेशानी होती है। दो साल पहले बजट में 45 दिन के भुगतान की प्रक्रिया को लागू किया था। छोटे उद्यमियों पर यह प्रक्रिया लागू है लेकिन बड़े उद्योग व सरकारी प्रतिष्ठान में यह प्रक्रिया लागू नहीं है। सरकारी प्रतिष्ठानों में फंसा एमएसएमई के पैसे के लिए कोई प्रक्रिया नहीं लाई गई।
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-दिनेश बरासिया, मंडल अध्यक्ष, आईआईए।
एमएसएमई बड़ा सेक्टर है। इसके लिए 10 हजार करोड़ का फंड दिया है। अभी तक आयकर में दंड का प्रावधान था। उसे खत्म कर जुर्माने में बदला गया है। इससे उद्यमी का तनाव कम होता है। हमारे यहां स्पोर्ट्स गाड़ी की लागत 13 प्रतिशत पर आती है जबकि चीन में पांच प्रतिशत है। इस पर काम करने की जरूरत है। बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, निवेश क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया है। -आरके अग्रवाल, कानपुर चैप्टर चेयरमैन, आईआईए।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव की वजह से बजट में कुछ खास मिलने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की कोशिश की है। टैक्स की स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे पर नहीं हुआ। भविष्य में बजट के परिणाम दिखें पर एमएसएमई को कुछ खास नहीं मिला। -आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आईआईए
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बजट विदेश व्यापार को आकर्षित करने के लिए है। टैरिफ लगने के बाद देश व्यापार में कहीं न कहीं दिक्कत आई थीं लेकिन हमने अपने जीडीपी के लक्ष्य को पूरा किया। कानपुर के ओडीओपी के दो उत्पाद लेदर व टेक्सटाइल है। इन्हें बजट में सहूलियत दी गई हैं। दोनों सेक्टरों में छाई मंदी को दूर करने के लिए उपाय किए गए हैं। बजट संतुलित है। एमएसएमई के लिए बजट बहुत सहूलियत भरा नहीं है लेकिन जो प्रावधान किए गए हैं, उनका असर दिखाई पड़ेगा।
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सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
बजट में एमएसएमई को कुछ खास नहीं मिल पाया है। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट फंस गई है। उसके रिफंड की प्रक्रिया में कुछ प्रावधान की उम्मीद थी लेकिन इसमें कुछ नहीं बोला गया। इस वजह से उद्यमी का लंबा निवेश फंस जाता है। इससे व्यापार में परेशानी होती है। दो साल पहले बजट में 45 दिन के भुगतान की प्रक्रिया को लागू किया था। छोटे उद्यमियों पर यह प्रक्रिया लागू है लेकिन बड़े उद्योग व सरकारी प्रतिष्ठान में यह प्रक्रिया लागू नहीं है। सरकारी प्रतिष्ठानों में फंसा एमएसएमई के पैसे के लिए कोई प्रक्रिया नहीं लाई गई।
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-दिनेश बरासिया, मंडल अध्यक्ष, आईआईए।
एमएसएमई बड़ा सेक्टर है। इसके लिए 10 हजार करोड़ का फंड दिया है। अभी तक आयकर में दंड का प्रावधान था। उसे खत्म कर जुर्माने में बदला गया है। इससे उद्यमी का तनाव कम होता है। हमारे यहां स्पोर्ट्स गाड़ी की लागत 13 प्रतिशत पर आती है जबकि चीन में पांच प्रतिशत है। इस पर काम करने की जरूरत है। बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, निवेश क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया है। -आरके अग्रवाल, कानपुर चैप्टर चेयरमैन, आईआईए।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव की वजह से बजट में कुछ खास मिलने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की कोशिश की है। टैक्स की स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे पर नहीं हुआ। भविष्य में बजट के परिणाम दिखें पर एमएसएमई को कुछ खास नहीं मिला। -आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आईआईए