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पत्थर के सनम: शिलापट पर नाम न होने पर सांसदों ने खोला मोर्चा, रमेश अवस्थी ने को लिखा पत्र, भोले ने कही ये बात

Wed, 11 Dec 2024 09:30 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 11 Dec 2024 09:30 AM IST
सार

Kanpur News: कैंट के मैस्कर घाट और महाराजपुर में लगे पत्थर पर विधायकों का नाम, लेकिन सांसदों का नहीं होने पर मामला उठा है। रमेश अवस्थी ने पर्यटन मंत्री को पत्र लिखा है। वहीं, देवेंद्र सिंह भोले ने कहा कि क्षेत्र का सांसद मैं तो शिलापट में मेरा नाम क्यों नहीं है।
 

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MPs opened a front over absence of their names on stone plaque Ramesh Awasthi wrote a letter Bhole said this
शिलापट पर नाम न होने का मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

शिलान्यास और उद्घाटन को लेकर लगाए जाने वाले पत्थर भले ही बेजान होते हैं, लेकिन यही पत्थर उस समय चीख-चीखकर बोलने लगते हैं। जब इन पर किसी जनप्रतिनिधि का नाम उनके अधिकार क्षेत्र में होने के बावजूद न लिखा हो। ऐसा ही वाकया इन दिनों खूब चर्चा में है, जिसने जिले के दोनों सांसदों को आहत कर दिया है।

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एक पत्थर महानगर लोकसभा क्षेत्र में लगा है, तो दूसरा अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में। मजे की बात यह है कि इन दोनों पत्थरों से क्षेत्र के सांसदों का नाम ही नदारद है। यह तब हुआ है जब उपचुनाव से पहले कानपुर आए मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान जोर देकर कहा था कि विकास कार्यों के जो भी शिलापट लगाए जाएं, उनपर उस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि का नाम जरूर लिखा जाए।

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सोशल मीडिया पर आ रही अलग-अलग प्रतिक्रिया
इसके बावजूद शिलापटों पर नाम न होने की चर्चा आम होते ही सांसदों ने अपनी शिकायत और आपत्ति प्रदेश सरकार से लेकर दिल्ली तक पहुंचा दी है। उधर, सोशल मीडिया पर तो लोग इसे इस तरह से भी बयां कर रहे हैं...पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा माना, बड़ी भूल हुई मगर हमने ये क्या समझा ये क्या जाना।

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देवेंद्र सिंह भोले: क्षेत्र का सांसद मैं तो शिलापट में मेरा नाम क्यों नहीं
सीएम ग्रिड योजना से बनने वाली सड़क के शिलान्यास में शिलापट्ट पर नाम न होने पर अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले खफा हो गए हैं। उन्होंने नगर आयुक्त सुधीर कुमार को पत्र भेजकर इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में उन्होंने एक सप्ताह में जवाब न देने पर मामले को विशेषाधिकार समिति में ले जाने की चेतावनी भी दी है।

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चार दिसंबर को किया गया था शिलान्यास
बता दें कि तीन दिन पहले सीएम ग्रिड योजना के तहत महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बाईपास कर्रही रोड से हमीरपुर मुख्य मार्ग मेट्रो लाइन तक सड़क के चौड़ीकरण व सौंदर्यीकरण कराने को लेकर शिलान्यास चार दिसंबर को किया गया था। शिलान्यास के लिए जो पत्थर लगाया गया है, उसमें क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और महापौर प्रमिला पांडेय का नाम अंकित किया गया है, लेकिन सांसद का नाम नहीं है।

नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण देने को भी कहा
यही बात सांसद को खटक गई। चूंकि यह क्षेत्र अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है, ऐसे में इस क्षेत्र के सांसद होने की वजह से देवेंद सिंह भोले ने इस पर आपत्ति जताई है। भोले काे उनके क्षेत्र में इस तरह का पत्थर लगने की जानकारी देर से जरूर हुई, लेकिन उन्होंने इस पर आवाज उठाने में देरी न करते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांग डाला। उन्होंने पत्र में साफ लहजे में पूछा है कि क्योंकि वह इस क्षेत्र के सांसद हैं, ऐसे में उनका नाम शिलापट में क्यों नहीं लिखा गया है। उन्होंने इसके लिए नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण देने को भी कहा है।

रमेश अवस्थी ने जताई नाराजगी
कानपुर लोकसभा क्षेत्र के कैंट स्थित मैस्कर घाट का सौंदर्यीकरण का कार्य पर्यटन विभाग की ओर से शुरू किया गया है। 93.24 लाख के बजट से किए जाने वाले कार्य के लिए यहां पर पर्यटन विकास निगम की ओर से शिलापट लगाया गया है। इसमें एमएलसी सलिल विश्नोई और कैंट क्षेत्र से पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया तक का नाम है लेकिन इस क्षेत्र के सांसद रमेश अवस्थी का नाम नहीं है।

नगर सांसद ने पर्यटन मंत्री को लिखा पत्र
सांसद अवस्थी उस समय दिल्ली में थे, ऐसे में जब उनको इसकी भनक लगी तो वे भड़क उठे। उन्होंने पहले तो पर्यटन विभाग के अधिकारियों पर अपना गुस्सा उतारा, फिर पर्यटन मंत्री को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जता दी। मंत्री को लिख पत्र में उन्होंने यह भी मांग किया कि मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अधिकारियों को समुचित दिशा निर्देश जारी किया
मंत्री ने सांसद की पीड़ा और गुस्से को जायज मानते हुए तत्काल इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग लिया है। सांसद अवस्थी ने पत्र में मांग की है कि शिलापट में मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री और सांसद का नाम लिखवाया जाए। यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी अनियमितता न हो, इसके लिए अधिकारियों को समुचित दिशा निर्देश जारी किया जाए।

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