कानपुर के सीएसए विश्वविद्यालय में चल रही रामकथा में संत मोरारी बापू ने महिलाअों को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि हर नारी का पति ही उसका गुरु होता है। पति में ही गुरु के दर्शन करने चाहिए। कलियुग में किसी बाबा या गुरु के पास जाने की जरूरत नहीं हैं। झमाझम बारिश के बावजूद यहां रामकथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे।
बापू ने कहा कि सभी जातियों के लिए उनका सबसे बड़ा गुरु अग्नि है। जो माता, बहन, भाई व बेटी अग्नि के पास बैठते हैं तो समझों आप गुरु के पास बैठे हैं। उन्होंने कहा कि घर के बच्चे भी आपके गुरु हैं। जो अतिथि आपके घर आते हैं वह भी आपके गुरु हैं। जो आपको अच्छा रास्ता दिखाते हैं और मदद करते हैं कहीं न कहीं उनमें भी आपका गुरु है।
उन्होंने कहा कि देव का मतलब ईश्वर होता है। आप अपने माता-पिता और गुरु को ही ईश्वर मान लें। बापू ने कहा कि महादेव का शिवलिंग आवरण है। उपमन्यु ने शिवलिंग को गले लगाया था तो शिवलिंग ने भी उन्हें पूरा ढक लिया था। महादेव का भजन कर कोई भी उनकी भक्ति को पा सकता है। रुद्राक्ष हमारा आवरण और अलंकरण है।
गुरु-शिष्य के बीच धन नहीं आना चाहिए
गुरु-शिष्य के बीच धन नहीं आना चाहिए
आजकल के प्रपंच ने गुरु निष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया है। गुरु शिष्य के बीच कभी ऐसी बातें भी सामने आ जाती है जो समाज में शोभा नहीं देती हैं। गुरु और शिष्य के बीच कभी धन नहीं आना चाहिए। जो तुम्हें अच्छे रास्ते पर ले जाता है और मार्गदर्शन करता है वह आपका गुरु होता है। जैसे जिस जगह पर खाना खिलाया जाता है, वह जगह अन्न क्षेत्र नहीं बल्कि ब्रह्मक्षेत्र कहलाती है। गुरु माने आवरण। गुरु वह होता है, जो आवरण को हटाकर मन का मैल निकाल दे और हमें निर्मल बना दे। गुरु के स्पर्शमात्र से ही आदमी प्रेम में डूब जाता है। व्यक्ति की ऊर्जा खुल जाती हैं।
आठ प्रकार के होते हैं स्पर्श
आठ प्रकार के होते हैं स्पर्श
बापू ने कहा कि स्पर्श आठ प्रकार के होते हैं। स्नेह, रूक्षस, शीत, ऊषण, तीवर, मंद, लघु स्पर्श के अलावा सबसे बड़ा स्पर्श होता है गुरु का स्पर्श। गुरु जब स्पर्श करता है तो शिष्य का मन निर्मल हो जाता है। शिष्य का प्रेम गुरु के प्रति कई गुना बढ़ जाता है।