फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Mother's inspiration reached till point, but lack of money became obstacle

मां की प्रेरणा ने पहुंचाया मुकाम तक लेकिन पैसे की कमी बनी रास्ते का रोड़ा

Sun, 05 Nov 2017 09:01 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 05 Nov 2017 09:01 AM IST
विज्ञापन
Mother's inspiration reached till point, but lack of money became obstacle
शशांक की सराही गई तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
एक किसान का बेटा मां की चित्रकारी से प्रेरित होकर चित्रकार बन गया, उसकी कला के प्रदर्शन के लिए कई बार विदेश जानें का मौका भी मिला लेकिन धन के अभाव वह न जाया पाया। दिल्ली के एक कारोबारी ने फंडिंग का प्रस्ताव दिया लेकिन स्वाभिमानी लड़के ने ऐसा करने से मना कर दिया।
विज्ञापन



कानपुर/पुखरायांः कस्बे में एक किसान का बेटा मां की चित्रकारी से प्रेरित होकर चित्रकार बन गया। प्रतियोगिताओं में लगातार प्रोत्साहन मिलने पर उसने अंतरराज्यीय पहचान बना ली। कला का प्रदर्शन करने के लिए विदेश जाने के मौके भी मिले लेकिन धनाभाव के चलते नहीं जा सका। 

विज्ञापन



कस्बे के मालवीयनगर निवासी किसान सत्यदेव मिश्र के 22 वर्षीय पुत्र शशांक बताते हैं कि उनकी मां ऊषा मिश्रा फुरसत के वक्त चित्र बनाती रहती थीं। उनको देख-देखकर चित्रकार बनने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहीं प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया। बड़े भाई अनादि और नगर के समाजसेवी चिकित्सक डॉ. जय गोयल के प्रोत्साहन ने इस क्षेत्र में काम करने के लिए ऊर्जा का संचार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन



दयानंद एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज कानपुर की तत्कालीन निदेशक नीरू टंडन ने पहली पेंटिंग खरीदकर पहचान दी। 2008-09 में वह उस संस्थान में बीबीए-द्वितीय वर्ष के छात्र थे। इसके बाद 25 व 26 नवंबर 2011 में डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशनल फाउंडेशन की ओर से आयोजित फेश-पेंटिंग में तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक राजेश रॉय के हाथों अवॉर्ड मिला। 

 

Mother's inspiration reached till point, but lack of money became obstacle
शशांक मिश्र
 इस तरह कानपुर में सात प्रतियोगिताओं के दौरान उनकी कला को पहचान मिली। 05 से 09 अक्तूबर 2013 तक आयोजित कानपुर के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में उनको अपने चित्रों की पहली प्रदर्शनी लगाने का अवसर मिला। इसके बाद 03 जनवरी 2016 को कर्नाटका चित्रकला परिषथ, बैंगलूर में बुलाये जाने पर प्रदर्शनी लगाई। जहां संस्थान के प्रेसीडेंट डॉ. बीएल शंकर ने प्रशस्तिपत्र देकर प्रोत्साहित किया।


शशांक ने बताया कि इस बीच उनको मिलान (इटली) और (इजिप्ट) में भी बुलाया गया। लेकिन धनाभाव के चलते नहीं जा सका। दिल्ली के एक कारोबारी की ओर से काम करने के लिए फंडिंग का प्रस्ताव किया गया था लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। बल्कि अपने संसाधनों से ही चित्रकला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का निश्चय किया है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed