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भूख से बिलखते जिगर के टुकड़ों को देख, ‘दुखियारी मां’ ने निगल लिया जहर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:38 AM IST
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जहर निगलकर मेडिकल कालेज में भर्ती आसमां
- फोटो : अमर उजाला
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मां और ममता ये दोनों शब्द कहने में जरूर छोटे हैं लेकिन इनकी विशालता का अंदाजा लगाना बड़ा मुश्किल है। दो दिन से भूखे मासूम बच्चो का रोना एक दुखियारी मां आखिर सहन नहीं कर पाई। उसके कुछ भी बस में नहीं था तो उसने खुद ही जहर खाकर जान देने की कोशिश कर ली। मामला यूपी के कन्नौज जिले का है।
कन्नौज ठठिया थाना क्षेत्र के खामा गांव की निवासी आसमा (28) पत्नी अंसार को मंगलवार की सुबह दस बजे एंबुलेंस के जरिए मेडिकल कालेज की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। उसने जहरीला पदार्थ खाकर जान देने का प्रयास किया था। उसका पति अंसार साथ में मौजूद था। आसमा की हालत में सुधार आने के बाद उसके पति ने बताया कि वह काफी गरीब है। गांव में एक झोपड़ी डालकर अपनी पत्नी व तीन बच्चो के साथ रहता है। उसके पास महज एक बीघा खेती थी। वह कर्ज के कारण गिरवी रखी हुई है।
मजदूरी करके किसी तरह से वह बच्चो के पेट पाल रहा था। पिछले दो दिनो से बारिश होने के कारण उसे कहीं मजदूरी नहीं मिली। जिस वजह से घर में खाना नहीं बना। उसके भाइयो ने भी कोई सहयोग नहीं किया। भूख से बिलखते बच्चे जसरीन, अनस व शबरीन ने मंगलवार की सुबह नौ बजे के करीब जब खाना देने की बात कही तो आसमा से सहन नहीं हुआ। उसने घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया। पति अंसार के मुताबिक पहले उसका बीपीएल कार्ड बना था। बाद में बीपीएल के नए कार्ड की सूची में उसका नाम नहीं आया। खामा की ग्राम प्रधान पिंकी सिंह से उसने अपनी फरियाद की। उन्होंने आन-लाइन आवेदन करने की सलाह दी। आवेदन करने के बावजूद भी उसका बीपीएल कार्ड नहीं बना। मनरेगा मजदूरी का भी जाब कार्ड नहीं बनाया गया। दंपत्ति का दर्द यह है कि डाक्टरो ने उसका जीवन तो बचा लिया पर भूख से बिलखते बच्चो को वह भोजन कहां से लाएगी।
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कन्नौज ठठिया थाना क्षेत्र के खामा गांव की निवासी आसमा (28) पत्नी अंसार को मंगलवार की सुबह दस बजे एंबुलेंस के जरिए मेडिकल कालेज की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। उसने जहरीला पदार्थ खाकर जान देने का प्रयास किया था। उसका पति अंसार साथ में मौजूद था। आसमा की हालत में सुधार आने के बाद उसके पति ने बताया कि वह काफी गरीब है। गांव में एक झोपड़ी डालकर अपनी पत्नी व तीन बच्चो के साथ रहता है। उसके पास महज एक बीघा खेती थी। वह कर्ज के कारण गिरवी रखी हुई है।
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मजदूरी करके किसी तरह से वह बच्चो के पेट पाल रहा था। पिछले दो दिनो से बारिश होने के कारण उसे कहीं मजदूरी नहीं मिली। जिस वजह से घर में खाना नहीं बना। उसके भाइयो ने भी कोई सहयोग नहीं किया। भूख से बिलखते बच्चे जसरीन, अनस व शबरीन ने मंगलवार की सुबह नौ बजे के करीब जब खाना देने की बात कही तो आसमा से सहन नहीं हुआ। उसने घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया। पति अंसार के मुताबिक पहले उसका बीपीएल कार्ड बना था। बाद में बीपीएल के नए कार्ड की सूची में उसका नाम नहीं आया। खामा की ग्राम प्रधान पिंकी सिंह से उसने अपनी फरियाद की। उन्होंने आन-लाइन आवेदन करने की सलाह दी। आवेदन करने के बावजूद भी उसका बीपीएल कार्ड नहीं बना। मनरेगा मजदूरी का भी जाब कार्ड नहीं बनाया गया। दंपत्ति का दर्द यह है कि डाक्टरो ने उसका जीवन तो बचा लिया पर भूख से बिलखते बच्चो को वह भोजन कहां से लाएगी।
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