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एनीमिक लोगों को प्रदूषण से खतरा ज्यादा, विशेषज्ञों ने भयावह स्थिति को देखते हुए दी ये सलाह
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 12 Dec 2018 01:59 PM IST
सार
- विशेषज्ञों ने स्थिति को देखते हुए डाइट चार्ट में बदलाव की सलाह दी
- लोगों को सांस फूलने की दिक्कत दोगुनी, छाती की बीमारियां बढ़ीं
- कानपुर फिजिशियन फोरम जागरुक करेगा शहर के आम डाक्टरों को
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विस्तार
प्रदूषण के नुकसान से बचना है तो अपने शरीर में खून की कमी न होने दें। अगर हीमोग्लोबिन 10 मिग्रा तक आया तो प्रदूषण का हमला तेज हो जाएगा। एनीमिक (खून की कमी) लोगों को निमोनिया, फेफड़ों और गले का संक्रमण, सांस तंत्र के कमजोर होने की दिक्कतें पहले बढ़ेंगी।
यह बात चिकित्सा विशेषज्ञों की ओपीडी के सैंपल सर्वे में सामने आई हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि अपने डाइट चार्ट में बदलाव करें। इसके साथ ही कानपुर फिजिशियन फोरम जनरल प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों को भी जागरूक करने की कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
कानपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन औसत 12 हजार रोगी डाक्टरों की ओपीडी में आते हैं। ओपीडी में आने वाली 50 फीसदी गर्भवती महिलाओं को खून की कमी रहती है। इनका हीमोग्लोबिन लेवल 10 मिग्रा या इसके नीचे रहता है। इसके साथ चौंकाने वाला यह तथ्य भी आया है कि आम रोगियों महिला और पुरुष दोनों में भी यह आंकड़ा कमोवेश एक जैसा ही है।
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यह बात चिकित्सा विशेषज्ञों की ओपीडी के सैंपल सर्वे में सामने आई हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि अपने डाइट चार्ट में बदलाव करें। इसके साथ ही कानपुर फिजिशियन फोरम जनरल प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों को भी जागरूक करने की कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
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कानपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन औसत 12 हजार रोगी डाक्टरों की ओपीडी में आते हैं। ओपीडी में आने वाली 50 फीसदी गर्भवती महिलाओं को खून की कमी रहती है। इनका हीमोग्लोबिन लेवल 10 मिग्रा या इसके नीचे रहता है। इसके साथ चौंकाने वाला यह तथ्य भी आया है कि आम रोगियों महिला और पुरुष दोनों में भी यह आंकड़ा कमोवेश एक जैसा ही है।
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इसके अलावा आर्थिक रूप से पिछड़े और इलीट क्लास की स्थिति भी एक जैसी है। इलीट क्लास में इस स्थिति का मुख्य कारण फास्ट फूड, जंक फूड आदि का सेवन है। फोरम के विशेषज्ञों की सलाह है कि शहरी अपने डाइट चार्ट में बदलाव करें। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे का जो आंकड़ा शासन को भेजा गया है, उसमें भी आम रोगियों में 50 से 70 फीसदी एनीमिक बताए गए हैं।
- प्रदूषित हवा से सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। जिन लोगों में खून की कमी है उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे सांस की दिक्कत बढ़ जाती है। सांस तंत्र कमजोर होने से एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम हो जाता है। यह जानलेवा होता है। ओपीडी में आने वाले लगभग 50 फीसदी रोगी एनीमिक होते हैं। इस संबंध में रोगियों का इलाज करने वाले आम डाक्टरों को जागरूक करने के लिए 16 दिसंबर को फोरम की सीएमई में एसजीपीजीआई के नेफ्रोलोजी विभाग के पूर्व निदेशक प्रोफेसर आरके शर्मा व्याख्यान देंगे।
-डॉ. डीके सिन्हा, अध्यक्ष, कानपुर फिजिशियन फोरम
- प्रदूषित हवा से सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। जिन लोगों में खून की कमी है उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे सांस की दिक्कत बढ़ जाती है। सांस तंत्र कमजोर होने से एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम हो जाता है। यह जानलेवा होता है। ओपीडी में आने वाले लगभग 50 फीसदी रोगी एनीमिक होते हैं। इस संबंध में रोगियों का इलाज करने वाले आम डाक्टरों को जागरूक करने के लिए 16 दिसंबर को फोरम की सीएमई में एसजीपीजीआई के नेफ्रोलोजी विभाग के पूर्व निदेशक प्रोफेसर आरके शर्मा व्याख्यान देंगे।
-डॉ. डीके सिन्हा, अध्यक्ष, कानपुर फिजिशियन फोरम
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एडवाइजरी
- खाने के वक्त सलाद में एक चुकंदर का इस्तेमाल जरूर करें
- अनार या इसका जूस पिएं, मौसमी फल भी खाएं
- लोहे की कढ़ाही में खाना पकाएं, हरी पत्तियों वाली सब्जियों का सेवन करें
- हीमोग्लोबिन खानपान से न बढ़ने पर डाक्टर की सलाह से आयरन की गोलियां लें
- सांस तंत्र को मजबूत करने वाले व्यायाम, प्राणायाम का अभ्यास करें
- बाहर धुंध और धुएं के माहौल में निकलने से बचें
- सीने में जकड़न, सांस फूलने की दिक्कत में फौरन जांच कराएं
- खाने के वक्त सलाद में एक चुकंदर का इस्तेमाल जरूर करें
- अनार या इसका जूस पिएं, मौसमी फल भी खाएं
- लोहे की कढ़ाही में खाना पकाएं, हरी पत्तियों वाली सब्जियों का सेवन करें
- हीमोग्लोबिन खानपान से न बढ़ने पर डाक्टर की सलाह से आयरन की गोलियां लें
- सांस तंत्र को मजबूत करने वाले व्यायाम, प्राणायाम का अभ्यास करें
- बाहर धुंध और धुएं के माहौल में निकलने से बचें
- सीने में जकड़न, सांस फूलने की दिक्कत में फौरन जांच कराएं