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Kanpur News: स्वास्थ्य क्षेत्र पर सबसे अधिक साइबर हमले, उद्यम दूसरे व बैंकिंग सेक्टर तीसरे स्थान पर
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हैकाथॉन का शुभारंभ करते अतिथि।
- फोटो : आईआई्टी
कानपुर। हर क्षेत्र में साइबर हमले के मामले बढ़ते जा रहे हैं। 2024 में हेल्थ सेक्टर इसमें सबसे आगे रहा। यह स्टैटिक रिपोर्ट डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) की ओर से जारी की गई है। हेल्थ के बाद दूसरे नंबर पर उद्यम और तीसरे स्थान पर बैंकिंग सेक्टर है। यह जानकारी आईआईटी कानपुर के सी3आई के परियोजना निदेशक प्रो. संदीप शुक्ला ने सोमवार को साइबर सिक्योरिटी चैलेंज हैकाथॉन के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
आईआईटी में चल रहे आयोजन में उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा पर देश को आत्मनिर्भर बनने और इसमें गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। क्विकहील कंपनी के साथ मिलकर डीएससीआई विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमले के डाटा को एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करती है।
दिसंबर 2024 में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार साइबर हमलावरों ने सबसे अधिक अस्पतालों, क्लीनिकों को अपना निशाना बनाया है। यहां से मरीजों का डाटा सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां चुराईं गईं हैं। प्रो. संदीप ने कहा कि तकनीक को मजबूत करने के लिए युवाओं को प्रेरित करना होगा। ऐसे हैकाथॉन से निश्चित ही बड़ी सफलता मिलेगी।
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2030 तक खुद को अपडेट करने की जरूरत
प्रो. संदीप ने बताया कि अब क्वांटम तकनीक आ रही है, इससे किसी का भी डाटा सुरक्षित नहीं है। इससे बचने के लिए न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को तैयार रहने की जरूरत है। 2030 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके बाद यह और अधिक हमलावरों के निशाने पर रहेगा। तकनीक में निर्भरता खत्म करने की जरूरत है। इसके लिए खुद को अपडेट करने की जरूरत है।
महाकुंभ में दीं 16 एप्लीकेशन, सुधारी थी 120 गड़बड़ियां
प्रो. संदीप ने कहा कि महाकुंभ में आईआईटी कानपुर ने शुरुआत दौर में काम किया था। मेले के शुरू होने से पहले प्रशासन को 16 एप्लीकेशन जैसे ई-टिकट, खोया पाया, रेलवे स्पेशल, टेंट एप्लीकेशन सहित अन्य तैयार कर दी थीं। इसके बाद मेले के निरीक्षण के दौरान करीब 120 गड़बड़ियां मिलीं थी, जिनसे प्रशासन को अवगत कराकर सुधार कराया गया था।
हैकाथॉन के फाइनल में भिड़ेंगी 46 टीमें, 11 स्टार्टअप
कानपुर। आईआईटी में साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब की ओर से ग्लोबल सिक्योरिटी हैकाथॉन 2025 के ग्रैंड फिनाले का शुभारंभ हुआ। इसमें 46 छात्रों की टीमें और 11 स्टार्टअप फाइनल में मुकाबला करेंगे। 18 फरवरी को विजेताओं की घोषणा होगी। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव व नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी में हैकाथॉन का आयोजन किया गया। इसमें देश भर के संस्थानों से 7000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
फाइनल के लिए 46 टीमों में 170 प्रतिभागियों का चयन हुआ। इसके साथ ही ब्लॉकचेन, साइबर क्राइम, वेब 3 सुरक्षा, गोपनीयता बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकियां, मोबाइल सुरक्षा और फोरेंसिक, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा, थ्रेट इंटेलिजेंस, ऑटोमोटिव सुरक्षा, प्रतिकूल एआई खतरा का पता लगाने और एआई की सुरक्षा व एलएलएम सहित अन्य क्षेत्रों से आए स्टार्टअप की 11 टीमें फाइनल में गईं हैं। स्टार्टअप और इंक्यूबेटर अपने प्रदर्शन से निर्णायक मंडल को प्रभावित करेंगे। कार्यक्रम में 30 लाख से अधिक के पुरस्कार दिए जाएंगे।
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आईआईटी में चल रहे आयोजन में उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा पर देश को आत्मनिर्भर बनने और इसमें गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। क्विकहील कंपनी के साथ मिलकर डीएससीआई विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमले के डाटा को एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करती है।
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दिसंबर 2024 में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार साइबर हमलावरों ने सबसे अधिक अस्पतालों, क्लीनिकों को अपना निशाना बनाया है। यहां से मरीजों का डाटा सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां चुराईं गईं हैं। प्रो. संदीप ने कहा कि तकनीक को मजबूत करने के लिए युवाओं को प्रेरित करना होगा। ऐसे हैकाथॉन से निश्चित ही बड़ी सफलता मिलेगी।
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2030 तक खुद को अपडेट करने की जरूरत
प्रो. संदीप ने बताया कि अब क्वांटम तकनीक आ रही है, इससे किसी का भी डाटा सुरक्षित नहीं है। इससे बचने के लिए न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को तैयार रहने की जरूरत है। 2030 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके बाद यह और अधिक हमलावरों के निशाने पर रहेगा। तकनीक में निर्भरता खत्म करने की जरूरत है। इसके लिए खुद को अपडेट करने की जरूरत है।
महाकुंभ में दीं 16 एप्लीकेशन, सुधारी थी 120 गड़बड़ियां
प्रो. संदीप ने कहा कि महाकुंभ में आईआईटी कानपुर ने शुरुआत दौर में काम किया था। मेले के शुरू होने से पहले प्रशासन को 16 एप्लीकेशन जैसे ई-टिकट, खोया पाया, रेलवे स्पेशल, टेंट एप्लीकेशन सहित अन्य तैयार कर दी थीं। इसके बाद मेले के निरीक्षण के दौरान करीब 120 गड़बड़ियां मिलीं थी, जिनसे प्रशासन को अवगत कराकर सुधार कराया गया था।
हैकाथॉन के फाइनल में भिड़ेंगी 46 टीमें, 11 स्टार्टअप
कानपुर। आईआईटी में साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब की ओर से ग्लोबल सिक्योरिटी हैकाथॉन 2025 के ग्रैंड फिनाले का शुभारंभ हुआ। इसमें 46 छात्रों की टीमें और 11 स्टार्टअप फाइनल में मुकाबला करेंगे। 18 फरवरी को विजेताओं की घोषणा होगी। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव व नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी में हैकाथॉन का आयोजन किया गया। इसमें देश भर के संस्थानों से 7000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
फाइनल के लिए 46 टीमों में 170 प्रतिभागियों का चयन हुआ। इसके साथ ही ब्लॉकचेन, साइबर क्राइम, वेब 3 सुरक्षा, गोपनीयता बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकियां, मोबाइल सुरक्षा और फोरेंसिक, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा, थ्रेट इंटेलिजेंस, ऑटोमोटिव सुरक्षा, प्रतिकूल एआई खतरा का पता लगाने और एआई की सुरक्षा व एलएलएम सहित अन्य क्षेत्रों से आए स्टार्टअप की 11 टीमें फाइनल में गईं हैं। स्टार्टअप और इंक्यूबेटर अपने प्रदर्शन से निर्णायक मंडल को प्रभावित करेंगे। कार्यक्रम में 30 लाख से अधिक के पुरस्कार दिए जाएंगे।