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UP: मोदी ने गुरुद्वारे में मत्था टेक सिखों का मन छुआ, सवर्णों पर विश्वास...पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यकों से आस

Sun, 05 May 2024 10:04 AM IST
हिमांशु अवस्थी अंकित शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
अंकित शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 05 May 2024 10:04 AM IST
सार

Kanpur News: रोड-शो में संत समाज द्वारा आरती से शुरुआत, फिर नृत्य के जरिए श्रीराम पूजन का दृश्य दिखाकर राम मंदिर और शिव गर्जन नृत्य के जरिए काशी विश्वनाथ की झलक, इस बड़े वर्ग को पार्टी की मुख्य थीम से जोड़े रखने की कोशिश कही जा सकती है। सवर्णों के मन में घर कर रहे उपेक्षा के भाव को कम करने का प्रयास भी।

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Modi touched the hearts of Sikhs, faith in upper castes, hope from backward, Dalits and minorities
pm modi rally in kanpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन चीजें हैं, जो भाजपा के लिए 2014 से कमाल करती आई हैं। एक तो नरेंद्र मोदी नाम का वजन, दूसरा लोगों को सीधे छू लेने वाले उनके भाषण और तीसरा उनकी उपस्थिति का जादू। पार्टी को इस बार भी यही उम्मीद है। लोकसभा चुनाव 2024 में कानपुर नगर में उनका रोड शो भले ही महज 1200 मीटर लंबा था, उनकी भाव-भंगिमाओं का असर जनपद की दो लोकसभाओं से कहीं आगे तक फैलेगा। यह तय है।

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रोड शो से पहले उन्होंने जिस तरह शहर के प्रतिष्ठित गुरुद्वारे में मत्था टेका, इसका संदेश 700 किमी दूर पंजाब और 535 किमी दूर हरियाणा तक जाएगा, जहां आगे मतदान होना है। जनपद की बात करें तो दो घंटों पीएम की उपस्थिति कानपुर नगर और अकबरपुर, दोनों सीटों पर काडर वोटों को संगठित करेगी और न्यूट्रल वोटरों को आकर्षित। कार्यकर्ताओं में उत्साह फूंकेगी और कटे-कटे चल रहे, टिकट के दावेदार अन्य नेताओं को स्पष्ट मैसेज देगी।

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यह जरूरी भी है। दोनों जगहों पर इस बार चुनौती कड़ी है। पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी को एयरपोर्ट बुलाकर और बाद में रथ पर साथ रखकर मोदी ने साफ कर दिया कि एकजुट रहना ही अंतिम विकल्प है। भाजपा के रणनीतिकारों ने जिस तरह इस रोड-शो में दर्शकदीर्घा को 37 ब्लॉक में बांटा, वह ब्लाॅक नहीं, बल्कि टार्गेट वोटर थे। शुरुआत करते हैं जाति आधारित ब्लॉक से।  इसमें एससी, एसटी और पिछड़ों के लिए अलग-अलग जगह आरक्षित की, तो पिछड़ों में ही आने वाले निषादों को अलग तवज्जो देकर गंगा तट पर बसे शहर में इनके संगठित वोट बैंक को छुआ।

पारंपरिक रूप से कांग्रेस-सपा को वोट डालते आए हैं मुस्लिम
मुस्लिम वर्ग में सिर्फ महिलाओं को ब्लाॅक दिया। तीन तलाक खत्म करने के बाद भाजपा को लगता है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं पार्टी के प्रति सहानुभूति रखती हैं, जो एक छिपा वोट बैंक साबित हो सकता है। कानपुर शहरी सीट में करीब 16 फीसदी मुस्लिम हैं और यह पारंपरिक रूप से कांग्रेस-सपा को वोट डालते आए हैं। इसमें जरा भी सेंध पार्टी को माइलेज देगी। इसी तरह शहर में 18 फीसदी और अकबरपुर सीट में 24 फीसदी के करीब दलित वोटबैंक है, जो लोकसभा में अच्छी संख्या में भाजपा का समर्थन करता है।

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दोनों सीटों पर सवर्ण प्रमुख रूप से भाजपा को वोट डाल रहे हैं
इसलिए पिछड़ों-दलितों का ध्यान रखा। वहीं, गुमटी नंबर पांच गुरुद्वारा साहिब में मोदी की इबादत एक लाख 40 हजार से ज्यादा सिखों को बड़ी संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंचाने का काम कर सकती है। दरअसल, दोनों ही सीटों पर सवर्णो का बोलबाला है, इसीलिए नगर में दोनों पार्टियों ने ब्राह्मण कैंडिडेट उतारे और अकबरपुर में भाजपा ने ठाकुर कैंडिडेट को रिपीट किया। स्पष्ट रूप से दोनों सीटों पर सवर्ण पिछले लंबे समय से प्रमुख रूप से भाजपा को वोट डाल रहे हैं।

जातीय जिमनास्टिक्स दिखाने की कोशिश
रोड-शो में संत समाज द्वारा आरती से शुरुआत, फिर नृत्य के जरिए श्रीराम पूजन का दृश्य दिखाकर राम मंदिर और शिव गर्जन नृत्य के जरिए काशी विश्वनाथ की झलक, इस बड़े वर्ग को पार्टी की मुख्य थीम से जोड़े रखने की कोशिश कही जा सकती है। सवर्णों के मन में घर कर रहे उपेक्षा के भाव को कम करने का प्रयास भी। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने अकबरपुर में पिछड़ी जाति के उम्मीदवार को टिकट देकर जातीय जिमनास्टिक्स दिखाने की कोशिश की है। यहां भी मोदी इफेक्ट कारगर होगा, पर कितना यह वक्त ही बताएगा।

मोदी पार्टी के चुनावी कैंपेन में प्राणवायु फूंक गए
कानपुर औद्योगिक शहर है। यहां श्रमिकों, कारोबारियों और उन पर आधारित व्यवस्था को भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए पेशे आधारित ब्लॉक में किसानों के साथ-साथ उद्यमियों, व्यापारियों, पेशेवरों को अलग अहमीयत मिली। खिलाड़ियों, फर्स्टटाइम वोटरों, युवाओं को अलग स्थान देना मूल रूप से युवा वोटरों को ही रिझाने का प्रयास था। महिला वर्ग को अलग से साधा ताकि नारी उत्थान कार्यक्रमों को भुनाया जा सके। कुल मिलाकर मोदी पार्टी के चुनावी कैंपेन में प्राणवायु फूंक गए। अब बस इंतजार है, 13 मई को मतदाता यानी देश के भाग्यविधाता के फैसले का।

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