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Kanpur News: पंचायत चुनाव की आहट से मनरेगा मजदूरों पर संकट
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कानपुर। पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही गांवों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम लगभग मिट गया है। रोजगार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले ग्राम प्रधानों ने काम कराना बंद कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले तीन महीनों से हजारों मजदूर का एक दिन का भी काम नहीं पा रहा है। वर्तमान में केवल 140 ग्राम पंचायतों में 1545 मजदूरों को ही रोजगार मिल पा रहा है। कल्याणपुर ब्लॉक में तो एक भी जगह काम नहीं चल रहा है जबकि लगभग 451 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। ऐसी चर्चा है कि ग्राम प्रधान काम कराने के बजाय भुगतान पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जिले के 10 ब्लॉकों में कुल 590 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें 75 हजार से अधिक मनरेगा मजदूरों के सक्रिय जॉब कार्ड हैं। मनरेगा के तहत कच्चे काम जैसे सड़क, नाली, खड़ंजा निर्माण और अन्य निर्माण कार्य कराए जाते हैं। वर्तमान में केवल 139 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा के तहत काम चल रहा है जिनमें भी मात्र करीब 1545 मजदूरों को ही काम मिल पा रहा है। इससे स्पष्ट है कि मनरेगा कागजों में जीवित है लेकिन जमीनी स्तर पर लगभग समाप्त हो चुका है। पंचायत चुनाव नजदीक आते ही ग्राम प्रधानों ने नए काम स्वीकृत कराने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। ऐसा माना जा रहा है कि अब सारा ध्यान पुराने भुगतानों को निपटाने और चुनावी प्रबंधन पर है। इस कारण मनरेगा मजदूरों के सामने आर्थिक संकट मंडराने लगा है।
मनरेगा के साथ-साथ पंचायतों में चल रहे पक्के विकास कार्य भी पूरी तरह से ठप हो चुके हैं। पक्के कार्यों के मद में करीब 3.94 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पिछले पांच महीनों से अधिक समय से बकाया है। भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदारों ने पंचायतों को सामग्री की आपूर्ति बंद कर दी है। इसका परिणाम यह हुआ कि कई निर्माण कार्य रुक गए जिससे बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
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एक नजर मजदूरों की संख्या पर
ब्लाक ग्राम पंचायत मजदूरों की संख्या
भीतरगांव 32 271
बिल्हौर 11 111
चौबेपुर 14 233
घाटमपुर 30 293
ककवन 05 57
कल्याणपुर 00 00
पतारा 18 132
सरसौल 12 154
शिवराजपुर 07 121
बिधनू 11 173
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जिले के 10 ब्लॉकों में कुल 590 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें 75 हजार से अधिक मनरेगा मजदूरों के सक्रिय जॉब कार्ड हैं। मनरेगा के तहत कच्चे काम जैसे सड़क, नाली, खड़ंजा निर्माण और अन्य निर्माण कार्य कराए जाते हैं। वर्तमान में केवल 139 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा के तहत काम चल रहा है जिनमें भी मात्र करीब 1545 मजदूरों को ही काम मिल पा रहा है। इससे स्पष्ट है कि मनरेगा कागजों में जीवित है लेकिन जमीनी स्तर पर लगभग समाप्त हो चुका है। पंचायत चुनाव नजदीक आते ही ग्राम प्रधानों ने नए काम स्वीकृत कराने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। ऐसा माना जा रहा है कि अब सारा ध्यान पुराने भुगतानों को निपटाने और चुनावी प्रबंधन पर है। इस कारण मनरेगा मजदूरों के सामने आर्थिक संकट मंडराने लगा है।
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मनरेगा के साथ-साथ पंचायतों में चल रहे पक्के विकास कार्य भी पूरी तरह से ठप हो चुके हैं। पक्के कार्यों के मद में करीब 3.94 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पिछले पांच महीनों से अधिक समय से बकाया है। भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदारों ने पंचायतों को सामग्री की आपूर्ति बंद कर दी है। इसका परिणाम यह हुआ कि कई निर्माण कार्य रुक गए जिससे बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
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एक नजर मजदूरों की संख्या पर
ब्लाक ग्राम पंचायत मजदूरों की संख्या
भीतरगांव 32 271
बिल्हौर 11 111
चौबेपुर 14 233
घाटमपुर 30 293
ककवन 05 57
कल्याणपुर 00 00
पतारा 18 132
सरसौल 12 154
शिवराजपुर 07 121
बिधनू 11 173