MLC election: विपक्षियों में उत्साह की कमी, बूथों की दूरी से गिरा मतदान
कानपुर में स्नातक और शिक्षक एमएलसी के बीच मतदान में बड़ा अंतर देखने को मिला। इसकी वजह यह रही कि एमएलसी से स्नातक मतदाताओं की संख्या कई गुना अधिक है। स्नातक में 2.10 लाख, जबकि शिक्षक में मात्र 19 हजार मतदाता थे।
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इस बार स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतदान प्रतिशत गिरा है। स्नातक के चुनाव में तो महज 40.93 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह पूरे कानपुर खंड में सबसे कम था। इसके अलावा एमएलसी चुनाव में 68.93 फीसदी लोगों ने ही वोट डाले थे। कम मतदान की कई वजह निकलकर सामने आई हैं।
एक तो यह कि स्नातक एमएलसी के लिए विपक्षी पार्टियों में उत्साह नहीं दिखा। दूसरी वजह मतदान बूथों की दूरी अधिक होनी बताई जा रही है। इसके अलावा मतदाता सूची में नाम न होने की वजह से भी घरों से लोग कम निकले। साथ ही एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों में होने से भी वोट प्रतिशत कम रहा। मतदान के दिन यह बात सामने आई थी कि गोविंदनगर विधायक सुरेंद्र मैथानी जब रावतपुर के रामलला स्कूल में बेटी के साथ वोट डालने पहुंचे तो पता चला कि उनका वोट तो है, लेकिन बेटी का वोट आरकेपुरम के प्रभात पब्लिक स्कूल में है।
इसी तरह सीएसए में वोट डालने पहुंचे सुशील और अर्चना गुप्ता का वोट भी अलग-अलग बूथों पर था। इसके अलावा स्नातक और शिक्षक एमएलसी के बीच मतदान में बड़ा अंतर देखने को मिला। इसकी वजह यह रही कि एमएलसी से स्नातक मतदाताओं की संख्या कई गुना अधिक है। स्नातक में 2.10 लाख, जबकि शिक्षक में मात्र 19 हजार मतदाता थे। भाजपा के स्नातक प्रत्याशी अरुण पाठक का कहना है कि कम मतदाताओं के निकलने की वजह यह भी है कि बहुत से मतदाता शहर से बाहर जाकर नौकरी करते हैं और शाम को घर लौटते हैं। ऐसे में वे वोट नहीं डाल सके।
स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव में इस बार 74851 मतदाता बढ़े, इसके बावजूद मतदान प्रतिशत पिछली बार से कम रहा। पिछली बार स्नातक में कुल मतदाताओं की संख्या 134711 थी, जबकि इस बार 208968 रही। शिक्षक एमएलसी में पिछली बार 18808 मतदाता थे। इस बार 19402 रहे।
पिछले चुनाव में 26, इस बार 19 प्रत्याशी मैदान में
स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव में इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा कम प्रत्याशी मैदान में उतरे। 2017 के चुनाव में दोनों पदों के लिए कुल 26 प्रत्याशी थे, जबकि इस बार 19 के बीच मुकाबला है। पिछले चुनाव में स्नातक पद के लिए राजनीतिक पार्टी के रूप में सिर्फ भाजपा ही मैदान में थी। बाकी 12 अन्य प्रत्याशी निर्दलीय थे। भाजपा को 9154 वोट से जीत हासिल हुई थी। भाजपा प्रत्याशी अरुण पाठक को 40633 और निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र स्वरूप को 31479 वोट मिले थे। इसी तरह शिक्षक एमएलसी चुनाव में राजबहादुर सिंह चंदेल विजयी हुए थे, उन्हें कुल 4283 वोट मिले थे। उनके प्रतिद्वंद्वी हेमराज सिंह गौर को 3573 वोट मिले थे। इस बार भाजपा ने शिक्षक एमएलसी पद पर भी वेणुरंजन भदौरिया के रूप में प्रत्याशी उतारा है। इनका मुकाबला पिछली बार के एमएलसी राजबहादुर चंदेल और दूसरे स्थान पर रहे हेमराज से है।
शिक्षक और स्नातक एमएलसी के लिए आईटीआई में दो फरवरी को सुबह 8 बजे से मतगणना होगी। इसके लिए 224 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। दो कमरों में 14-14 मेज लगेंगी। हर मेज पर 4-4 कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
सोमवार को कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव जिले में मतदान हुए थे। मतपेटियों को पांडुनगर स्थित आईटीआई परिसर में रखा गया है। हर मेज पर एक माइक्रोआब्जर्वर, एक मतगणना पर्यवेक्षक और दो सहायक मौजूद रहेंगे। हर उम्मीदवार प्रत्येक मेज पर अपना एक एजेंट रख सकता है। सीडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि मतगणना की तैयारी पूरी कर ली गई है। एक कमरे में 56 कर्मी मतगणना करेंगे। 12 घंटे बाद शिफ्ट बदलेगी। 24 घंटे में मतगणना पूरी होने की संभावना है।