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मुंबई की कंपनी के करोड़ों के हीरे हड़पे
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:11 AM IST
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कानपुर। मुंबई की हीरा कंपनी गुरुकृपा जेम्स के सेल्स मैनेजर मुंबई निवासी दिलीप जवेरचंद सवानी ने कलक्टरगंज थाने में 16 लोगों के खिलाफ 1.66 करोड़ के हीरे ठगने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एफआईआर के मुताबिक दिलीप कंपनी के हीरों की बिक्री के लिए शहर आते-जाते थे और नयागंज के एक होटल में रुकते थे। 2015 में उनकी मुलाकात बिरहाना रोड निवासी हीरा दलाल चंद्र कुमार कोठार उर्फ बाबू भाई से हुई। दिलीप के मुताबिक बाबू ने उन्हें कई और दलालों से मिलवाया। बाबू के माध्यम से दिलीप ने कई व्यापारियों को हीरे दिए और हर डील पर उसे 2 प्रतिशत दलाली भी दी। आरोप है जुलाई 2015 से जनवरी 2016 के बीच बाबू ने 51 लाख के हीरे लिए और मात्र 14 लाख की पेमेंट की और 37 लाख हड़प लिए। बाबू के माध्यम से बिरहाना रोड निवासी विष्णु ने 11.63 लाख, आलोक ने 8 लाख, सोनू ने 6.15 लाख, रिंकू ने 3 लाख, मयूर पटेल ने 5.11 लाख, राकेश ने 13.69 लाख, अशोक ने 2.31 लाख, अमित ने 4.5 लाख, मामा ने 6.55 लाख, पीरोड निवासी राजेश सिंह ने 8.13 लाख, बनारस निवासी उदित ने 23.26 लाख, लखनऊ निवासी अब्दुल ने 11.90 लाख के हीरे लिए लेकिन पेमेंट नहीं दी। पीड़ित ने जब हीरे वापस मांगे तो नहीं किए और जान से मारने की धमकी दी। 27 जुलाई को पीड़ित ने कलक्टरगंज थाने में तहरीर दी जिस पर जांच के बाद गुरुवार को रिपोर्ट दर्ज हो गई। सीओ कलक्टरगंज विवेक त्रिपाठी ने बताया एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
मेमो (जांगड़) पर होता है करोड़ों का धंधा
पीड़ित के मुताबिक लाखों- करोड़ों के हीरे एक पेपर जिसे मेमो और हीरा व्यापारियों की भाषा में ‘जांगड़’ कहते हैं, पर लिए-दिए जाते हैं। जांगड़ पर दलालों को दिए गए हीरों पर मालिकाना हक कंपनी का ही होता है और हीरे बिकने पर दलाल कंपनी को पूरा पेमेंट करते हैं। न बिकने पर हीरे कंपनी को वापस हो जाते हैं। पीड़ित दिलीप के मुताबिक जांगड़ एक कानूनी दस्तावेज होता है।
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एफआईआर के मुताबिक दिलीप कंपनी के हीरों की बिक्री के लिए शहर आते-जाते थे और नयागंज के एक होटल में रुकते थे। 2015 में उनकी मुलाकात बिरहाना रोड निवासी हीरा दलाल चंद्र कुमार कोठार उर्फ बाबू भाई से हुई। दिलीप के मुताबिक बाबू ने उन्हें कई और दलालों से मिलवाया। बाबू के माध्यम से दिलीप ने कई व्यापारियों को हीरे दिए और हर डील पर उसे 2 प्रतिशत दलाली भी दी। आरोप है जुलाई 2015 से जनवरी 2016 के बीच बाबू ने 51 लाख के हीरे लिए और मात्र 14 लाख की पेमेंट की और 37 लाख हड़प लिए। बाबू के माध्यम से बिरहाना रोड निवासी विष्णु ने 11.63 लाख, आलोक ने 8 लाख, सोनू ने 6.15 लाख, रिंकू ने 3 लाख, मयूर पटेल ने 5.11 लाख, राकेश ने 13.69 लाख, अशोक ने 2.31 लाख, अमित ने 4.5 लाख, मामा ने 6.55 लाख, पीरोड निवासी राजेश सिंह ने 8.13 लाख, बनारस निवासी उदित ने 23.26 लाख, लखनऊ निवासी अब्दुल ने 11.90 लाख के हीरे लिए लेकिन पेमेंट नहीं दी। पीड़ित ने जब हीरे वापस मांगे तो नहीं किए और जान से मारने की धमकी दी। 27 जुलाई को पीड़ित ने कलक्टरगंज थाने में तहरीर दी जिस पर जांच के बाद गुरुवार को रिपोर्ट दर्ज हो गई। सीओ कलक्टरगंज विवेक त्रिपाठी ने बताया एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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मेमो (जांगड़) पर होता है करोड़ों का धंधा
पीड़ित के मुताबिक लाखों- करोड़ों के हीरे एक पेपर जिसे मेमो और हीरा व्यापारियों की भाषा में ‘जांगड़’ कहते हैं, पर लिए-दिए जाते हैं। जांगड़ पर दलालों को दिए गए हीरों पर मालिकाना हक कंपनी का ही होता है और हीरे बिकने पर दलाल कंपनी को पूरा पेमेंट करते हैं। न बिकने पर हीरे कंपनी को वापस हो जाते हैं। पीड़ित दिलीप के मुताबिक जांगड़ एक कानूनी दस्तावेज होता है।
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