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मिलिए कानपुर के प्रणव त्रिपाठी से, जो बनने जा रहे हैं सबसे कम उम्र के सिविल जज

Sat, 31 Mar 2018 12:47 PM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 31 Mar 2018 12:47 PM IST
सार

- बैच के सबसे कम उम्र के सिविल जज बनेंगे प्रणव
- पीसीएस-जे 2016 में नौंवी रैंक हासिल करने वाले प्रणव ने 22 साल की उम्र में दी थी परीक्षा

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Meet Pranav Tripathi from Kanpur who are going to be the youngest civil judge
प्रणव त्रिपाठी

विस्तार

कानपुर के प्रणव त्रिपाठी अपने बैच के सबसे कम उम्र के सिविल जज बनने जा रहे हैं। प्रणव ने पीसीएस-जे 2016 में नौंवी रैंक हासिल की है। इसका परिणाम अक्तूबर 2017 में जारी हुआ था। अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने इसमें चयनित सभी उम्मीदवारों को जन्मतिथि सहित सूची जारी की है। 
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सूची के अनुसार प्रणव ने 22 साल की उम्र में ही यह उपलब्धि पाई है। पीसीएस-जे में आवेदन करने की न्यूनतम आयु सीमा भी 22 साल है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 35 वर्ष है। एससी-एसटी के लिए पांच वर्ष की छूट और ओबीसी के लिए तीन वर्ष की छूट है। प्रणव के बाद एक अन्य उम्मीदवार ने 23 वर्ष की आयु में परीक्षा पास की है। इसके अलावा दो चयनित अभ्यर्थियों के पद छोड़ने के चलते प्रणव की रैंक भी अब सातवीं हो गई है। प्रणव बताते हैं कि मई-जून में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। फिलहाल वह ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) में बतौर लीगल एडवाइजर काम कर रहे हैं। प्रणव के पिता नरेंद्र त्रिपाठी पंजाब नेशनल बैंक से सीनियर मैजनेजर पद से रिटायर हुए हैं। 
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स्कूल से लेकर एलएलएम तक के टॉपर
‘अमर उजाला’ को प्रणव ने बताया कि 2011 में उन्होंने पं. दीन दयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय से 12वीं पास की। यहां कक्षा छठवीं से लेकर 12वीं तक वह टॉपर रहे। इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी से एलएलबी ऑनर्स किया, जहां गोल्ड मेडलिस्ट और चांसलर मेडल विजेता रहे। 2016 में क्लैट पीजी में ऑल इंडिया 27वीं रैंक हासिल कर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी बंगलूरू से एलएलएम बिजनेस लॉ की पढ़ाई की। यहां उन्हें तीन गोल्ड मेडल मिले। तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और चीफ जस्टिस प्रणव को मेडल से सम्मानित कर चुके हैं।
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अगले साल परीक्षा देने का था मन
प्रणव बताते हैं कि एलएलएम की पढ़ाई के चलते उन्होंने पीसीएस-जे मेंस की तैयारी नहीं की थी। इसलिए वह अगले साल इसकी परीक्षा देना चाहते थे। लेकिन माता-पिता चाहते थे कि वह इसमें शामिल हों। दोनों के समझाने के बाद उन्होंने परीक्षा दी।
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