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Kanpur News: मेडिकल कॉलेज खुद बीमार, व्यवस्थाएं लाचार
Sun, 19 Jul 2026 01:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 19 Jul 2026 01:25 AM IST
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं दम तोड़ती दिखाई दे रही हैं। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तीमारदारों के कंधों पर आ गई है। हालत ये हैं कि तीमारदार स्वयं अपने मरीज को व्हीलचेयर पर बैठाकर ओपीडी से वार्ड और जांच कक्षों तक के चक्कर लगा रहे हैं।
अकबरपुर मेडिकल कॉलेज में रोजाना डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ मरीज भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल कर्मियों की मदद मिलनी चाहिए लेकिन यहां तीमारदार मरीजों के सहारा बन रहे हैं। शनिवार सुबह संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो ओपीडी से प्रथम तल पर संचालित ओटी में ड्रेसिंग, ऑपरेशन के लिए जाने व वार्ड में शिफ्ट होने के लिए मरीज व तीमारदार परेशान नजर आए। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में व्हीलचेयर तो उपलब्ध है लेकिन उन्हें संचालित करने और मरीजों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश मरीजों को लंबी दूरी तक खुद ही धक्का देकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वॉय डॉक्टरों के कक्ष के बाहर कुर्सी जमाए बैठे रहते हैं।
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केस-1
सैंथा निवासी अंकित ने बताया कि वह चार दिन पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे। पैर टूट जाने की वजह से चलने में असमर्थ हैं। मेडिकल कॉलेज के वार्ड से ड्रेसिंग रूम तक जाने के लिए परिजन को ही स्ट्रेचर घसीटना पड़ा। कोई भी वार्ड ब्वॉय सहायता के लिए नहीं आया।
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केस-2
बेड़ामऊ निवासी रामऔतार को कई दिनों से बुखार आने की वजह से वह चलने फिरने की अवस्था में नहीं थे। वार्ड से पैथोलॉजी तक व्हीलचेयर घसीट कर ले जा रहे उनके भाई ने बताया कि मरीजों को बेड पर लिटाने, जांच के लिए पैथोलॉजी तक ले जाने के लिए परिवार के सदस्यों को ही मशक्कत करनी पड़ती है। मदद मांगने पर भी कोई कर्मचारी सहायता नहीं करता है।
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केस- 3
स्ट्रेचर घसीटते मिले रिंकू ने बताया कि परिवार की माया देवी शनिवार सुबह छत से गिरकर घायल हो गई थीं। वह सुबह 10 बजे मेडिकल कॉलेज आए थे। यहां पर्चा बनवाने के बाद से मरीज को डॉक्टर को दिखाने व जांच करवाने के लिए कई बार स्ट्रेचर घसीटकर ले जाना पड़ा। कई बार कर्मचारियों से मदद मांगी लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। इसके चलते जांच कक्ष आदि को खोजने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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यह होनी चाहिए व्यवस्था
प्रत्येक वार्ड और ओपीडी में व्हीलचेयर सहायक तैनात हो।
गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर और वार्ड ब्वॉय की उपलब्धता हो।
बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग सहायता व्यवस्था हो।
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बयान.....
मेडिकल कॉलेज में 141 स्टाफ नर्स व 193 आउटसोर्स कर्मी तैनात हैं, इनमें वार्ड ब्वॉय, पेशेंट अटेंडर, लैब असिस्टेंट, स्वीपर आदि शामिल हैं। वार्ड ब्वॉय के ड्यूटी के दौरान मरीजों की सहायता न करने के मामले की जांच करवाई जाएगी। साथ ही वह स्वयं भी निरीक्षण करेंगे। ड्यूटी करने में लापरवाही करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. हरप्रीत सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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अकबरपुर मेडिकल कॉलेज में रोजाना डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ मरीज भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल कर्मियों की मदद मिलनी चाहिए लेकिन यहां तीमारदार मरीजों के सहारा बन रहे हैं। शनिवार सुबह संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो ओपीडी से प्रथम तल पर संचालित ओटी में ड्रेसिंग, ऑपरेशन के लिए जाने व वार्ड में शिफ्ट होने के लिए मरीज व तीमारदार परेशान नजर आए। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में व्हीलचेयर तो उपलब्ध है लेकिन उन्हें संचालित करने और मरीजों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश मरीजों को लंबी दूरी तक खुद ही धक्का देकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वॉय डॉक्टरों के कक्ष के बाहर कुर्सी जमाए बैठे रहते हैं।
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केस-1
सैंथा निवासी अंकित ने बताया कि वह चार दिन पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे। पैर टूट जाने की वजह से चलने में असमर्थ हैं। मेडिकल कॉलेज के वार्ड से ड्रेसिंग रूम तक जाने के लिए परिजन को ही स्ट्रेचर घसीटना पड़ा। कोई भी वार्ड ब्वॉय सहायता के लिए नहीं आया।
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केस-2
बेड़ामऊ निवासी रामऔतार को कई दिनों से बुखार आने की वजह से वह चलने फिरने की अवस्था में नहीं थे। वार्ड से पैथोलॉजी तक व्हीलचेयर घसीट कर ले जा रहे उनके भाई ने बताया कि मरीजों को बेड पर लिटाने, जांच के लिए पैथोलॉजी तक ले जाने के लिए परिवार के सदस्यों को ही मशक्कत करनी पड़ती है। मदद मांगने पर भी कोई कर्मचारी सहायता नहीं करता है।
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केस- 3
स्ट्रेचर घसीटते मिले रिंकू ने बताया कि परिवार की माया देवी शनिवार सुबह छत से गिरकर घायल हो गई थीं। वह सुबह 10 बजे मेडिकल कॉलेज आए थे। यहां पर्चा बनवाने के बाद से मरीज को डॉक्टर को दिखाने व जांच करवाने के लिए कई बार स्ट्रेचर घसीटकर ले जाना पड़ा। कई बार कर्मचारियों से मदद मांगी लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। इसके चलते जांच कक्ष आदि को खोजने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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यह होनी चाहिए व्यवस्था
प्रत्येक वार्ड और ओपीडी में व्हीलचेयर सहायक तैनात हो।
गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर और वार्ड ब्वॉय की उपलब्धता हो।
बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग सहायता व्यवस्था हो।
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बयान.....
मेडिकल कॉलेज में 141 स्टाफ नर्स व 193 आउटसोर्स कर्मी तैनात हैं, इनमें वार्ड ब्वॉय, पेशेंट अटेंडर, लैब असिस्टेंट, स्वीपर आदि शामिल हैं। वार्ड ब्वॉय के ड्यूटी के दौरान मरीजों की सहायता न करने के मामले की जांच करवाई जाएगी। साथ ही वह स्वयं भी निरीक्षण करेंगे। ड्यूटी करने में लापरवाही करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. हरप्रीत सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज