Auraiya: स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित प्रसव की बात बेमानी, प्रसूताओं को नहीं मिलता खाना, प्रशासन ने किया ये दावा
औरैया जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित प्रसव कराने की बात बेमानी साबित हो रही है। प्रसूताओं को यहां नाश्ता और भोजन मानक के मुताबिक नहीं दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2022 के लिए अभी तक टेंडर नहीं हुआ है।
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सुरक्षित प्रसव और जननी सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है, लेकिन जिले के अफसर नहीं। स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाली महिलाओं को प्रसव के बाद कम से कम दो दिन भर्ती रखने का प्रावधान है। इस बीच उन्हें दोनों टाइम खाना मुहैया कराने होता है। औरैया जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसा नहीं हो रहा है, हां अधिकारी दावा जरूर कर रहे हैं कि प्रसूताओं को खाना दिया जाता है। जबकि अस्पतालों में खाना मुहैया कराने के लिए न तो संस्था नामित हुई और न ही अभी तक नया टेंडर हुआ है। इसको लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। वहीं कुछ प्रसूताओं ने पड़ताल में बताया कि वह अस्पताल की व्यवस्था देख प्रसव के बाद ही घर चली गईं।
केस-1: दूसरे दिन की छुट्टी नहीं मिला खाना
सहालय निवासी पूजा देवी पत्नी शिवम ने बताया कि 12 जून को प्रसव के लिए सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुई थी। शाम को सामान्य प्रसव होने के बाद दूसरे दिन सुबह छुट्टी कर दी गई। इस बीच अस्पताल से मिलने वाला नाश्ता व खाना नहीं दिया गया।
केस-2
अछल्दा स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए भर्ती हुई नगला तेज निवासी सीमा पत्नी सुनील कुमार ने बताया कि 28 जून को प्रसव हुआ। इसके बाद दूसरे दिन वह छुट्टी कराकर घर चली गई। इस बीच किसी ने भी उन्हें खाना तो दूर चाय, नाश्ता तक नहीं दिया। बताया कि यह उनके साथ नहीं कई अन्य महिलाओं के साथ भी हुआ।
प्रति माह हो रहे सैकड़ों प्रसव
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो एक जून से 30 जून तक अजीतमल सीएचसी में 171, अछल्दा में 111, सहार में 124, दिबियापुर में 265, बिधूना में 21 मई से 20 जून तक 222, ऐरवाकटरा में 85 प्रसव हुए हैं। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी भी प्रसूताओं को भोजन मुहैया कराने के लिए अलग अलग तरह के जवाब देते नजर आए। किसी ने समस्या बताई तो किसी ने दावा किया कि भोजन दें रहे हैं।
विगत वर्ष 70 रुपये में टेंडर हुआ था, मंहगाई बढ़ने के बाद खाना दे पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस लिए फल, चाय बिस्किट मुहैया कराया जा रहा था। मंहगाई को देखते हुए नया टेंडर के लिए जेम पोर्टल पर प्रक्रिया की गई है। 15 दिन में टेंडर करा कर समस्या दूर कर दी जाएगी। -डॉ. अर्चना श्रीवास्तव