नाबालिग से दुष्कर्म के बाद शादी का मामला: पीड़िता और पिता दोनों बयान से मुकरे, कोर्ट ने सुनाई सात साल की सजा
बिठूर निवासी 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के बाद शादी करने के मामले में पीड़िता और पिता दोनों बयान से मुकर गए। एफआईआर कराने वाला पिता ने भी आरोपी और बेटी का रिश्ता स्वीकारा। मामले में कोर्ट ने सबूतों और अन्य गवाहों के आधार पर सजा सुनाई है।
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कानपुर में किशोरी को भगाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने वाले युवक को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) सुरेंद्र पाल सिंह ने सात साल कैद और साढ़े चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पीड़ित और अभियुक्त ने शादी कर ली थी। उनको एक बच्चा भी था, लेकिन उनके बीच हुए समझौते का कोई फायदा अभियुक्त को कोर्ट में नहीं मिला।
पीड़िता और रिपोर्ट दर्ज कराने वाले उसके पिता दोनों ही अदालत में अपने बयान से मुकर गए थे, फिर भी कोर्ट ने सबूतों व अन्य गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी मानकर सजा सुना दी। बिठूर निवासी माता-पिता पैतृक गांव सहजौरा में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। 25 जून 2018 को उनकी 15 वर्षीय बेटी को भी वहां पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंची।
छोटी बेटी ने बताया कि चौबेपुर कलां निवासी संजय सोनी उर्फ अमित दीदी को अक्सर परेशान करता था। जानकारी पर पता चला कि संजय किशोरी को बहलाकर भगा ले गया है, जिसके बाद पिता ने संजय के खिलाफ बिठूर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि कोर्ट में बयान के दौरान पीड़िता ने अपनी मर्जी से संजय के साथ जाने और शारीरिक संबंध बनाकर एक बच्चे को जन्म देने की बात कहकर अभियुक्त का पक्ष लिया था।
वहीं, उसके पिता ने भी दोनों की शादी कराने की बात कही थी। दोनों को ही पक्ष द्रोही घोषित किया गया था। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के साथ दुष्कर्म किए जाने और उसकी उम्र 18 वर्ष से कम होने के आधार पर कोर्ट ने पीड़िता की मर्जी को कानूनन अवैध करार देते हुए युवक को किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी मानकर सजा सुना दी।