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प्री बोर्ड एग्जाम में कड़े मूल्यांकन से कम रहे गए नंबर, छमाही परीक्षाओं के नंबरों के आधार पर जारी हुआ परिणाम 

Sun, 01 Aug 2021 04:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 01 Aug 2021 04:29 PM IST
सार

बोर्ड ने इंटरमीडिएट का परिणाम 10वीं के बोर्ड के अंक, 11वीं के फाइनल रिजल्ट और 12वीं की प्री बोर्ड परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर जारी किया है।

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Marks remained low due to stringent evaluation in pre board exam
यूपी बोर्ड रिजल्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

यूपी बोर्ड का परीक्षा परिणाम प्री बोर्ड एग्जाम और छमाही परीक्षाओं में हुुए कड़े मूल्यांकन की भेंट चढ़ गया है। कड़ा मूल्यांकन कर छात्रों को बोर्ड के लिए तैयार करने के फार्मूले से कई मेधावियों के नंबर कम रह गए हैं। कोरोना की वजह से इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं नहीं हुई थीं।
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बोर्ड ने इंटरमीडिएट का परिणाम 10वीं के बोर्ड के अंक, 11वीं के फाइनल रिजल्ट और 12वीं की प्री बोर्ड परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर जारी किया है। 10वीं का परिणाम 9वीं के फाइनल अंक और 10वीं के प्री बोर्ड एग्जाम में आए अंकों के आधार पर जारी हुआ है। प्रधानाचार्यों ने बताया कि बच्चे बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन कर सके, इसलिए स्कूलों ने गृह परीक्षाओं में कड़ा मूल्यांकन किया था।
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कोरोना के मामले बढ़ने के बाद छात्रों को प्रमोट करने का फैसला लिया गया। इस कारण कई छात्रों क नंबर कम आए हैं। विभाग के सूत्रों का कहना है कि शहर के कई नामचीन स्कूलों ने जैसे-तैसे ही परिणाम भेजा था। कई स्कूल ऐसे भी थे, जिन्होंने प्री बोर्ड एग्जाम भी नहीं करवाए थे और मन मुताबिक ही अंक भेज दिए थे। इसका असर मेधावियों के अंकों पर पड़ा है।  
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स्कूल का परिणाम अच्छा है, लेकिन मेधावी छात्र खुश नहीं हैं। कई मेधावियों को हिंदी और अंग्रेजी में कम अंक मिले हैं। 12वीं में छात्रों को बेहद कम अंक मिले हैं, ऐसे में वह कैसे सीबीएसई और सीआईएससीई छात्रों का मुकाबला कर पाएंगे। मेधावी अगर परीक्षा देेते तो इससे काफी बेहतर परिणाम आता।

राम मिलन सिंह, प्रधानाचार्य, ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन 

वैश्विक महामारी को देखते हुए परीक्षा परिणाम तो संतोषजनक है, लेकिन मेधावी उदास हैं। उनको बेहतर परिणाम की उम्मीद थी। हालांकि सरकार ने परीक्षा न करवाकर भी सही निर्णय लिया। अब उदास होने से बेहतर है कि छात्र आगे के लिए तैयारी करें।


डॉ. रचना अवस्थी, प्रधानाचार्य, पारितोष इंटर कॉलेज

अच्छे स्कूलों को उनकी अच्छाई ने ही परेशान कर दिया। बोर्ड परीक्षार्थियों की 9वीं से सख्त मार्किंग शुरू हो जाती है। यही वजह रही है कि सभी स्कूलों का परिणाम गड़बड़ाया है। छात्र परेशान हैं, अपने परिणाम से खुश नहीं हैं।
डॉ. ममता अवस्थी, प्रधानाचार्य, बीएनएसडी शिक्षा निकेतन

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