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आदमी एक और मृत्यु प्रमाण पत्र तीन, पेंशन के लालच में हुआ खेल
Mon, 01 Feb 2021 04:41 PM IST
शिखा पांडेय
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 01 Feb 2021 04:41 PM IST
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एक आदमी के तीन-तीन मृत्यु प्रमाणपत्र, वो भी अलग-अलग वर्षों के। ऐसा ही एक मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ग्वालटोली शाखा में सामने आया है। बैंक प्रबंधन ने नगर निगम के अफसरों को मामले की जानकारी देते हुए खाते से भुगतान को रोक दिया है।
बैंक की शाखा में 14/4 मकरावटगंज, कर्नलगंज निवासी मोहम्मद हलीम का खाता वर्ष 2001 में खुला था। खाता संख्या 10388277331 में सालों से निकासी बंद थी। 2011 से इस खाते में पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पेंशन के तौर पर हर महीने 1500 रुपये आ रहे थे।
28 दिसंबर 2020 तक पेंशन आई थी, जबकि इस खाते से निकासी नहीं हो रही थी। इसके चलते बैंक ने खाते को इनऑपरेटिव की सूची में डाल दिया था। शनिवार को अर्शी खान नाम की लड़की एक अन्य महिला के साथ बैंक आई थी। मोहम्मद हलीम को पिता बताते हुए उनकी मौत की जानकारी दी और खाते से भुगतान कराने को कहा।
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बैंक अफसर ने आधार कार्ड चेक किया तो उसमें पता और पिता का नाम सही मिला। इसके बाद बैंक ने प्रक्रिया शुरू की। अर्शी से मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा गया तो उसने 23 जुलाई 2011 को नगर निगम की ओर जारी प्रमाण पत्र दिया। बैंक अफसर ने पूछा कि पिता की मृत्यु कब हुई है तो उसने बताया 2017 को देहांत हुआ था और उसने 20 अगस्त 2017 को जारी प्रमाणपत्र दे दिया।
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बैंक की शाखा में 14/4 मकरावटगंज, कर्नलगंज निवासी मोहम्मद हलीम का खाता वर्ष 2001 में खुला था। खाता संख्या 10388277331 में सालों से निकासी बंद थी। 2011 से इस खाते में पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पेंशन के तौर पर हर महीने 1500 रुपये आ रहे थे।
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28 दिसंबर 2020 तक पेंशन आई थी, जबकि इस खाते से निकासी नहीं हो रही थी। इसके चलते बैंक ने खाते को इनऑपरेटिव की सूची में डाल दिया था। शनिवार को अर्शी खान नाम की लड़की एक अन्य महिला के साथ बैंक आई थी। मोहम्मद हलीम को पिता बताते हुए उनकी मौत की जानकारी दी और खाते से भुगतान कराने को कहा।
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बैंक अफसर ने आधार कार्ड चेक किया तो उसमें पता और पिता का नाम सही मिला। इसके बाद बैंक ने प्रक्रिया शुरू की। अर्शी से मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा गया तो उसने 23 जुलाई 2011 को नगर निगम की ओर जारी प्रमाण पत्र दिया। बैंक अफसर ने पूछा कि पिता की मृत्यु कब हुई है तो उसने बताया 2017 को देहांत हुआ था और उसने 20 अगस्त 2017 को जारी प्रमाणपत्र दे दिया।
अफसर को शक हुआ तो उन्होंने पूछा कि क्या और कोई भी प्रमाण पत्र है तो हड़बड़ी में उसने 20 मार्च 2018 में जारी प्रमाण पत्र भी दे दिया। एक की जगह तीन-तीन मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने पर अधिकारी भी सकते में आ गए। इसके बाद बैंक के विधिक मामलों के जानकार मनीष चतुर्वेदी ने मामले की जांच-पड़ताल की और भुगतान न करने की बात कही।
इसी बीच दोनों महिलाएं चली गईं। शाखा प्रबंधक हाकिम सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी नगर निगम के अफसरों को भी दी गई है। नगर निगम से तीनों मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। खाते में 52899 रुपये हैं। आधार कार्ड की विश्वसनीयता की भी जांच कराने की कोशिश की जा रही है।
एक प्रमाण पत्र पर पता है दूसरा
20 अगस्त 2017 के मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक का पता 14/4 मकड़ीखेड़ा दर्ज है। जबकि प्रमाण पत्र का पंजीकरण संख्या कानपुर 2017-098426 दर्ज है। अन्य दो प्रमाण पत्रों में पंजीकरण संख्या कानपुर 018480 दर्ज है। पता 14/4 मकरावटगंज है। हालांकि एक प्रमाण पत्र वर्ष 2011 और दूसरा वर्ष 2018 का है।
कहीं कोई बड़ा घोटाला तो नहीं
सूत्रों ने बताया कि नगर निगम की ओर से अलग-अलग सालों में एक ही व्यक्ति के तीन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना पेंशन मामलों में बड़ा घोटाला की ओर इशारा कर रहा है। हो सकता है सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जालसाज नियमों को दरकिनार करके नगर निगम से प्रमाण पत्र जारी करवा रहे हों। बैंक अफसरों का कहना है कि मौजूदा समय में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि बिना कर्मचारियों की मिलीभगत से यह संभव ही नहीं है।
इसी बीच दोनों महिलाएं चली गईं। शाखा प्रबंधक हाकिम सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी नगर निगम के अफसरों को भी दी गई है। नगर निगम से तीनों मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। खाते में 52899 रुपये हैं। आधार कार्ड की विश्वसनीयता की भी जांच कराने की कोशिश की जा रही है।
एक प्रमाण पत्र पर पता है दूसरा
20 अगस्त 2017 के मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक का पता 14/4 मकड़ीखेड़ा दर्ज है। जबकि प्रमाण पत्र का पंजीकरण संख्या कानपुर 2017-098426 दर्ज है। अन्य दो प्रमाण पत्रों में पंजीकरण संख्या कानपुर 018480 दर्ज है। पता 14/4 मकरावटगंज है। हालांकि एक प्रमाण पत्र वर्ष 2011 और दूसरा वर्ष 2018 का है।
कहीं कोई बड़ा घोटाला तो नहीं
सूत्रों ने बताया कि नगर निगम की ओर से अलग-अलग सालों में एक ही व्यक्ति के तीन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना पेंशन मामलों में बड़ा घोटाला की ओर इशारा कर रहा है। हो सकता है सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जालसाज नियमों को दरकिनार करके नगर निगम से प्रमाण पत्र जारी करवा रहे हों। बैंक अफसरों का कहना है कि मौजूदा समय में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि बिना कर्मचारियों की मिलीभगत से यह संभव ही नहीं है।