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Kanpur News: शहर की जलवायु में तैयार होगा मलेशिया का लाल अमरूद और बारबाडोस की चेरी

Fri, 07 Nov 2025 02:25 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 02:25 AM IST
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Malaysian red guava and Barbados cherry will be grown in the city's climate
किसान मेले में एक स्टाल पर बीज देखते किसान।  - फोटो : संवाद
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में आयोजित अखिल भारतीय किसान मेले में मलेशिया के लाल रंग के अमरूद, बारबाडोस की चेरी को काफी पसंद किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को एक साथ कई फसलों की बोआई करने का तरीका भी बताया।
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मेले में 30 लाख रुपये से अधिक के बीजों की बिक्री हुई। इसी के साथ दो दिवसीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का गुरुवार को समापन हुआ। इसमें प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व बिहार से भी किसान आए।
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विवि के उद्यान महाविद्यालय के डीन प्रो. वीके त्रिपाठी ने बताया कि मलेशिया का लाल अमरूद, बारबाडोस की चेरी और ड्रैगन फ्रूट को शहर की जलवायु के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसका सफल ट्रायल विवि की बागवानी में हो चुका है।
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जल्द ही इसकी पौध किसानों के लिए भी उपलब्ध होगी। लाल अमरूद में विटामिन ए, बी व सी के अलावा आयरन और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक है। वहीं बारबाडोस चेरी में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक है।

उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में जहां उपजाऊ मिट्टी हो वहां पर आम, अमरूद, लीची, जामुन आदि के बीच स्वच्छ प्रणाली के साथ कटहल, पपीता, फालसा और हल्दी की खेती कर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।

जहां कम स्थान पर अधिक उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं वहां अमरूद और आम की उच्च सघन बागवानी तकनीक अपनाई जा सकती है। ढलान बाले क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा रोपण से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। सजावटी पौधों से भी आय के नए अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं।

सहायक निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. मनोज कटियार ने बताया कि मेले में गेहूं की डीबीडब्ल्यू-303, के-1317, के-1616, के-1006, डीबीडब्ल्यू-187, मसूर की केएलबी-345, मटर की केपीएमआर-522, चना की उदय, केडब्ल्यूआर-108 आदि प्रजातियों की मांग अधिक रही।

समापन पर मुख्य अतिथि कल्याणपुर क्षेत्र की विधायक नीलिमा कटियार ने विभिन्न स्टॉल के संचालकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. सीमा सोनकर, डॉ. पीके सिंह, डॉ. पीके राठी, डॉ. वीके कनौजिया, डॉ. खलील खान आदि मौजूद रहे।




चने, मूंगफली के छिलकों से तैयार किया डाई कलर
गृह विज्ञान विभाग में यूजी चतुर्थ वर्ष की छात्रा महक ने बताया कि चने, मूंगफली के छिलकों से डाई कलर तैयार किया गया है। बिना केमिकल वाले इस रंग का इस्तेमाल कपड़ों की रंगाई और छपाई के लिए किया जा सकता है। छात्रा ने बताया कि मूंगफली के दाने के छिलके को निकाल कर पानी की सहायता से पेस्ट बनाया जाता है। इसे छपाई में इस्तेमाल करते हैं। यह पक्का रंग होता है।
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