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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   mahoba : Purchased new bicycle in lockdown, completed 1100 km journey from Maharashtra in 11 days

लॉकडाउन: घर पहुंचने की चाह में खरीदी नई साइकिल, महाराष्ट्र से 11 दिन में पूरा किया 1100 किमी. सफर

Thu, 14 May 2020 10:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 14 May 2020 10:25 PM IST
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mahoba : Purchased new bicycle in lockdown, completed 1100 km journey from Maharashtra in 11 days
महाराष्ट्र से 11 दिन में पूरा किया 1100 किमी. सफर - फोटो : amar ujala
दूसरे प्रांतों से श्रमिकों के आने का सिलसिला जारी है। महाराष्ट्र के पनवेल में फंसे श्रमिक रोजगार छिन जाने से परेशान होकर साइकिलों से अपने घरों के लिए निकल पड़े। 11 दिन में करीब 1100 किलोमीटर की साइकिल से यात्रा करके गुरुवार की सुबह उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के श्रीनगर पहुंचे।
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यहां से अब श्रमिकों को अपने गृह जनपद कौशांबी पहुंचने के लिए 250 किलोमीटर का सफर अभी और करना है। महाराष्ट्र के पनवेल में श्रमिक मजदूरी और कपड़ों में प्रेस करने का काम करते थे। मार्च में अचानक लॉकडाउन कर दिया गया। कुछ दिनों तक लॉकडाउन खुलने का इंतजार किया। पर, लगातार लॉकडाउन बढ़ने पर वह परेशान हो गए। कई दिनों तक साधन नहीं मिला, तो इन लोगों ने नई साइकिलें खरीदी।
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इसके बाद तीन मई को 24 से ज्यादा श्रमिकों का जत्था साइकिल से अपने गृह जनपद के लिए रवाना हुआ। दिन रात साइकिल चलाने के बाद गुरुवार को महाराष्ट्र से यूपी की सीमा में प्रवेश किया। यूपी में प्रवेश करने के बाद श्रमिकों को राहत मिली। यूपी-एमपी की कैमाहा सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उनको खाना खिलाने के बाद गृह जनपद जाने दिया गया। लव, कुश, सुनील, अमित, गजेंद्र, साजन, सनी समेत सभी श्रमिक साइकिलों से घर की तरफ निकल पड़े।

पैसा खत्म होने पर कई दिन रहे भूखे
बस्ती निवासी मुरारीलाल हैदराबाद में पेंटिंग करते थे। एक माह तक लॉकडाउन खुलने का इंतजार करते रहे। इस दौरान सारा पैसा भी खत्म हो गया। हैदराबाद से तीन दिन तक भूखे पैदल चलते रहे। बीच-बीच में बारिश होने पर भींगते हुए सफर किया। रास्ते में महाराष्ट्र में लंगर में खाना मिला। फिर ट्रक से भोपाल तक आए। भोपाल से 300 किमी पैदल चले। पैरों में छाले पड़ गए। छतरपुर पहुंचने पर वहां की पुलिस ने खाना खिलाया। श्रीनगर सीमा पर लंच पैकेट देकर ट्रक से बस्ती के लिए पुलिस ने भेज दिया है।

पैदल चलने से पड़े गए पैरों में छाले
बस्ती निवासी द्वारकाधीश हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। काम छिनने से भूखे मरने की नौबत आने लगी। इस पर वह पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े। चप्पल टूटने से पैरों में छाले पड़ जाने के बाद भी चिलचिलाती धूप में 250 किलोमीटर का सफर तय किया। रास्ते में ट्रक चालकों ने भी मदद की। कुछ दूर पैदल और कुछ दूर ट्रक की मदद से आए। वह कहते हैं अब कभी घर छोड़कर परदेस नहीं जाएंगे। भगवान का नाम लेते-लेते यूपी तक आ गए हैं। अब घर भी मिल ही जाएगा।
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